अरण्यकाण्ड पाठ

सम्पूर्ण पाठ — 46 दोहे, 328 पद, एक ही पृष्ठ पर। पाठ में लगभग 2 घंटे लगते हैं। किसी भी पद पर टैप करके उसका हिन्दी अर्थ और अंग्रेज़ी अनुवाद देखें।

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मंगलाचरण

मूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम्। मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शंकरं वन्दे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्रीरामभूपप्रियम्॥1॥
Shloka
अर्थ / Meaning
सान्द्रानन्दपयोदसौभगतनुं पीताम्बरं सुन्दरं पाणौ बाणशरासनं कटिलसत्तूणीरभारं वरम्। राजीवायतलोचनं धृतजटाजूटेन संशोभितं सीतालक्ष्मणसंयुतं पथिगतं रामाभिरामं भजे॥2॥
Shloka
अर्थ / Meaning

दोहा 1

पुर नर भरत प्रीति मैं गाई। मति अनुरूप अनूप सुहाई।। अब प्रभु चरित सुनहु अति पावन। करत जे बन सुर नर मुनि भावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक बार चुनि कुसुम सुहाए। निज कर भूषन राम बनाए।। सीतहि पहिराए प्रभु सादर। बैठे फटिक सिला पर सुंदर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुरपति सुत धरि बायस बेषा। सठ चाहत रघुपति बल देखा।। जिमि पिपीलिका सागर थाहा। महा मंदमति पावन चाहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता चरन चौंच हति भागा। मूढ़ मंदमति कारन कागा।। चला रुधिर रघुनायक जाना। सींक धनुष सायक संधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति कृपाल रघुनायक सदा दीन पर नेह। ता सन आइ कीन्ह छलु मूरख अवगुन गेह।।1।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 2

प्रेरित मंत्र ब्रह्मसर धावा। चला भाजि बायस भय पावा।। धरि निज रुप गयउ पितु पाहीं। राम बिमुख राखा तेहि नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भा निरास उपजी मन त्रासा। जथा चक्र भय रिषि दुर्बासा।। ब्रह्मधाम सिवपुर सब लोका। फिरा श्रमित ब्याकुल भय सोका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काहूँ बैठन कहा न ओही। राखि को सकइ राम कर द्रोही।। मातु मृत्यु पितु समन समाना। सुधा होइ बिष सुनु हरिजाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मित्र करइ सत रिपु कै करनी। ता कहँ बिबुधनदी बैतरनी।। सब जगु ताहि अनलहु ते ताता। जो रघुबीर बिमुख सुनु भ्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नारद देखा बिकल जयंता। लागि दया कोमल चित संता।। पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आतुर सभय गहेसि पद जाई। त्राहि त्राहि दयाल रघुराई।। अतुलित बल अतुलित प्रभुताई। मैं मतिमंद जानि नहिं पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज कृत कर्म जनित फल पायउँ। अब प्रभु पाहि सरन तकि आयउँ।। सुनि कृपाल अति आरत बानी। एकनयन करि तजा भवानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित। प्रभु छाड़ेउ करि छोह को कृपाल रघुबीर सम।।2।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 3

रघुपति चित्रकूट बसि नाना। चरित किए श्रुति सुधा समाना।। बहुरि राम अस मन अनुमाना। होइहि भीर सबहिं मोहि जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सकल मुनिन्ह सन बिदा कराई। सीता सहित चले द्वौ भाई।। अत्रि के आश्रम जब प्रभु गयऊ। सुनत महामुनि हरषित भयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुलकित गात अत्रि उठि धाए। देखि रामु आतुर चलि आए।। करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि राम छबि नयन जुड़ाने। सादर निज आश्रम तब आने।। करि पूजा कहि बचन सुहाए। दिए मूल फल प्रभु मन भाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु आसन आसीन भरि लोचन सोभा निरखि। मुनिबर परम प्रबीन जोरि पानि अस्तुति करत।।3।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 4

नमामि भक्त वत्सलं। कृपालु शील कोमलं।। भजामि ते पदांबुजं। अकामिनां स्वधामदं।। निकाम श्याम सुंदरं। भवाम्बुनाथ मंदरं।। प्रफुल्ल कंज लोचनं। मदादि दोष मोचनं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं।। निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं।। दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं।। मुनींद्र संत रंजनं। सुरारि वृंद भंजनं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं।। विशुद्ध बोध विग्रहं। समस्त दूषणापहं।। नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं।। भजे सशक्ति सानुजं। शची पतिं प्रियानुजं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
त्वदंघ्रि मूल ये नराः। भजंति हीन मत्सरा।। पतंति नो भवार्णवे। वितर्क वीचि संकुले।। विविक्त वासिनः सदा। भजंति मुक्तये मुदा।। निरस्य इंद्रियादिकं। प्रयांति ते गतिं स्वकं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तमेकमभ्दुतं प्रभुं। निरीहमीश्वरं विभुं।। जगद्गुरुं च शाश्वतं। तुरीयमेव केवलं।। भजामि भाव वल्लभं। कुयोगिनां सुदुर्लभं।। स्वभक्त कल्प पादपं। समं सुसेव्यमन्वहं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं।। प्रसीद मे नमामि ते। पदाब्ज भक्ति देहि मे।। पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं।। व्रजंति नात्र संशयं। त्वदीय भक्ति संयुता।।
Chhand
अर्थ / Meaning

दोहा 5

अनुसुइया के पद गहि सीता। मिली बहोरि सुसील बिनीता।। रिषिपतिनी मन सुख अधिकाई। आसिष देइ निकट बैठाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दिब्य बसन भूषन पहिराए। जे नित नूतन अमल सुहाए।। कह रिषिबधू सरस मृदु बानी। नारिधर्म कछु ब्याज बखानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मातु पिता भ्राता हितकारी। मितप्रद सब सुनु राजकुमारी।। अमित दानि भर्ता बयदेही। अधम सो नारि जो सेव न तेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।। बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना। अधं बधिर क्रोधी अति दीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ऐसेहु पति कर किएँ अपमाना। नारि पाव जमपुर दुख नाना।। एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जग पति ब्रता चारि बिधि अहहिं। बेद पुरान संत सब कहहिं।। उत्तम के अस बस मन माहीं। सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मध्यम परपति देखइ कैसें। भ्राता पिता पुत्र निज जैंसें।। धर्म बिचारि समुझि कुल रहई। सो निकिष्ट त्रिय श्रुति अस कहई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिनु अवसर भय तें रह जोई। जानेहु अधम नारि जग सोई।। पति बंचक परपति रति करई। रौरव नरक कल्प सत परई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छन सुख लागि जनम सत कोटि। दुख न समुझ तेहि सम को खोटी।। बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पति प्रतिकुल जनम जहँ जाई। बिधवा होई पाई तरुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सहज अपावनि नारि पति सेवत सुभ गति लहइ। जसु गावत श्रुति चारि अजहु तुलसिका हरिहि प्रिय।।5(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
सुनु सीता तव नाम सुमिर नारि पतिब्रत करहि। तोहि प्रानप्रिय राम कहिउँ कथा संसार हित।।5(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 6

सुनि जानकीं परम सुखु पावा। सादर तासु चरन सिरु नावा।। तब मुनि सन कह कृपानिधाना। आयसु होइ जाउँ बन आना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संतत मो पर कृपा करेहू। सेवक जानि तजेहु जनि नेहू।। धर्म धुरंधर प्रभु कै बानी। सुनि सप्रेम बोले मुनि ग्यानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु कृपा अज सिव सनकादी। चहत सकल परमारथ बादी।। ते तुम्ह राम अकाम पिआरे। दीन बंधु मृदु बचन उचारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब जानी मैं श्री चतुराई। भजी तुम्हहि सब देव बिहाई।। जेहि समान अतिसय नहिं कोई। ता कर सील कस न अस होई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
केहि बिधि कहौं जाहु अब स्वामी। कहहु नाथ तुम्ह अंतरजामी।। अस कहि प्रभु बिलोकि मुनि धीरा। लोचन जल बह पुलक सरीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तन पुलक निर्भर प्रेम पुरन नयन मुख पंकज दिए। मन ग्यान गुन गोतीत प्रभु मैं दीख जप तप का किए।। जप जोग धर्म समूह तें नर भगति अनुपम पावई। रधुबीर चरित पुनीत निसि दिन दास तुलसी गावई।।
Chhand
अर्थ / Meaning
कलिमल समन दमन मन राम सुजस सुखमूल। सादर सुनहि जे तिन्ह पर राम रहहिं अनुकूल।।6(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
कठिन काल मल कोस धर्म न ग्यान न जोग जप। परिहरि सकल भरोस रामहि भजहिं ते चतुर नर।।6(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 7

मुनि पद कमल नाइ करि सीसा। चले बनहि सुर नर मुनि ईसा।। आगे राम अनुज पुनि पाछें। मुनि बर बेष बने अति काछें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उमय बीच श्री सोहइ कैसी। ब्रह्म जीव बिच माया जैसी।। सरिता बन गिरि अवघट घाटा। पति पहिचानी देहिं बर बाटा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ जहँ जाहि देव रघुराया। करहिं मेध तहँ तहँ नभ छाया।। मिला असुर बिराध मग जाता। आवतहीं रघुवीर निपाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।। पुनि आए जहँ मुनि सरभंगा। सुंदर अनुज जानकी संगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखी राम मुख पंकज मुनिबर लोचन भृंग। सादर पान करत अति धन्य जन्म सरभंग।।7।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 8

कह मुनि सुनु रघुबीर कृपाला। संकर मानस राजमराला।। जात रहेउँ बिरंचि के धामा। सुनेउँ श्रवन बन ऐहहिं रामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती। अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती।। नाथ सकल साधन मैं हीना। कीन्ही कृपा जानि जन दीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो कछु देव न मोहि निहोरा। निज पन राखेउ जन मन चोरा।। तब लगि रहहु दीन हित लागी। जब लगि मिलौं तुम्हहि तनु त्यागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जोग जग्य जप तप ब्रत कीन्हा। प्रभु कहँ देइ भगति बर लीन्हा।। एहि बिधि सर रचि मुनि सरभंगा। बैठे हृदयँ छाड़ि सब संगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता अनुज समेत प्रभु नील जलद तनु स्याम। मम हियँ बसहु निरंतर सगुनरुप श्रीराम।।8।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 9

अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। राम कृपाँ बैकुंठ सिधारा।। ताते मुनि हरि लीन न भयऊ। प्रथमहिं भेद भगति बर लयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रिषि निकाय मुनिबर गति देखि। सुखी भए निज हृदयँ बिसेषी।। अस्तुति करहिं सकल मुनि बृंदा। जयति प्रनत हित करुना कंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि रघुनाथ चले बन आगे। मुनिबर बृंद बिपुल सँग लागे।। अस्थि समूह देखि रघुराया। पूछी मुनिन्ह लागि अति दाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जानतहुँ पूछिअ कस स्वामी। सबदरसी तुम्ह अंतरजामी।। निसिचर निकर सकल मुनि खाए। सुनि रघुबीर नयन जल छाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह। सकल मुनिन्ह के आश्रमन्हि जाइ जाइ सुख दीन्ह।।9।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 10

मुनि अगस्ति कर सिष्य सुजाना। नाम सुतीछन रति भगवाना।। मन क्रम बचन राम पद सेवक। सपनेहुँ आन भरोस न देवक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु आगवनु श्रवन सुनि पावा। करत मनोरथ आतुर धावा।। हे बिधि दीनबंधु रघुराया। मो से सठ पर करिहहिं दाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सहित अनुज मोहि राम गोसाई। मिलिहहिं निज सेवक की नाई।। मोरे जियँ भरोस दृढ़ नाहीं। भगति बिरति न ग्यान मन माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नहिं सतसंग जोग जप जागा। नहिं दृढ़ चरन कमल अनुरागा।। एक बानि करुनानिधान की। सो प्रिय जाकें गति न आन की।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
होइहैं सुफल आजु मम लोचन। देखि बदन पंकज भव मोचन।। निर्भर प्रेम मगन मुनि ग्यानी। कहि न जाइ सो दसा भवानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दिसि अरु बिदिसि पंथ नहिं सूझा। को मैं चलेउँ कहाँ नहिं बूझा।। कबहुँक फिरि पाछें पुनि जाई। कबहुँक नृत्य करइ गुन गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अबिरल प्रेम भगति मुनि पाई। प्रभु देखैं तरु ओट लुकाई।। अतिसय प्रीति देखि रघुबीरा। प्रगटे हृदयँ हरन भव भीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि मग माझ अचल होइ बैसा। पुलक सरीर पनस फल जैसा।। तब रघुनाथ निकट चलि आए। देखि दसा निज जन मन भाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यानजनित सुख पावा।। भूप रूप तब राम दुरावा। हृदयँ चतुर्भुज रूप देखावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि अकुलाइ उठा तब कैसें। बिकल हीन मनि फनि बर जैसें।। आगें देखि राम तन स्यामा। सीता अनुज सहित सुख धामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परेउ लकुट इव चरनन्हि लागी। प्रेम मगन मुनिबर बड़भागी।। भुज बिसाल गहि लिए उठाई। परम प्रीति राखे उर लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला। कनक तरुहि जनु भेंट तमाला।। राम बदनु बिलोक मुनि ठाढ़ा। मानहुँ चित्र माझ लिखि काढ़ा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब मुनि हृदयँ धीर धीर गहि पद बारहिं बार। निज आश्रम प्रभु आनि करि पूजा बिबिध प्रकार।।10।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 11

कह मुनि प्रभु सुनु बिनती मोरी। अस्तुति करौं कवन बिधि तोरी।। महिमा अमित मोरि मति थोरी। रबि सन्मुख खद्योत अँजोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
श्याम तामरस दाम शरीरं। जटा मुकुट परिधन मुनिचीरं।। पाणि चाप शर कटि तूणीरं। नौमि निरंतर श्रीरघुवीरं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोह विपिन घन दहन कृशानुः। संत सरोरुह कानन भानुः।। निशिचर करि वरूथ मृगराजः। त्रातु सदा नो भव खग बाजः।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अरुण नयन राजीव सुवेशं। सीता नयन चकोर निशेशं।। हर ह्रदि मानस बाल मरालं। नौमि राम उर बाहु विशालं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संशय सर्प ग्रसन उरगादः। शमन सुकर्कश तर्क विषादः।। भव भंजन रंजन सुर यूथः। त्रातु सदा नो कृपा वरूथः।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निर्गुण सगुण विषम सम रूपं। ज्ञान गिरा गोतीतमनूपं।। अमलमखिलमनवद्यमपारं। नौमि राम भंजन महि भारं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भक्त कल्पपादप आरामः। तर्जन क्रोध लोभ मद कामः।। अति नागर भव सागर सेतुः। त्रातु सदा दिनकर कुल केतुः।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अतुलित भुज प्रताप बल धामः। कलि मल विपुल विभंजन नामः।। धर्म वर्म नर्मद गुण ग्रामः। संतत शं तनोतु मम रामः।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी। सब के हृदयँ निरंतर बासी।। तदपि अनुज श्री सहित खरारी। बसतु मनसि मम काननचारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जे जानहिं ते जानहुँ स्वामी। सगुन अगुन उर अंतरजामी।। जो कोसल पति राजिव नयना। करउ सो राम हृदय मम अयना।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस अभिमान जाइ जनि भोरे। मैं सेवक रघुपति पति मोरे।। सुनि मुनि बचन राम मन भाए। बहुरि हरषि मुनिबर उर लाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम प्रसन्न जानु मुनि मोही। जो बर मागहु देउ सो तोही।। मुनि कह मै बर कबहुँ न जाचा। समुझि न परइ झूठ का साचा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हहि नीक लागै रघुराई। सो मोहि देहु दास सुखदाई।। अबिरल भगति बिरति बिग्याना। होहु सकल गुन ग्यान निधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु जो दीन्ह सो बरु मैं पावा। अब सो देहु मोहि जो भावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अनुज जानकी सहित प्रभु चाप बान धर राम। मम हिय गगन इंदु इव बसहु सदा निहकाम।।11।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 12

एवमस्तु करि रमानिवासा। हरषि चले कुभंज रिषि पासा।। बहुत दिवस गुर दरसन पाएँ। भए मोहि एहिं आश्रम आएँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब प्रभु संग जाउँ गुर पाहीं। तुम्ह कहँ नाथ निहोरा नाहीं।। देखि कृपानिधि मुनि चतुराई। लिए संग बिहसै द्वौ भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पंथ कहत निज भगति अनूपा। मुनि आश्रम पहुँचे सुरभूपा।। तुरत सुतीछन गुर पहिं गयऊ। करि दंडवत कहत अस भयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ कौसलाधीस कुमारा। आए मिलन जगत आधारा।। राम अनुज समेत बैदेही। निसि दिनु देव जपत हहु जेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनत अगस्ति तुरत उठि धाए। हरि बिलोकि लोचन जल छाए।। मुनि पद कमल परे द्वौ भाई। रिषि अति प्रीति लिए उर लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सादर कुसल पूछि मुनि ग्यानी। आसन बर बैठारे आनी।। पुनि करि बहु प्रकार प्रभु पूजा। मोहि सम भाग्यवंत नहिं दूजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा। हरषे सब बिलोकि सुखकंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि समूह महँ बैठे सन्मुख सब की ओर। सरद इंदु तन चितवत मानहुँ निकर चकोर।।12।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 13

तब रघुबीर कहा मुनि पाहीं। तुम्ह सन प्रभु दुराव कछु नाही।। तुम्ह जानहु जेहि कारन आयउँ। ताते तात न कहि समुझायउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब सो मंत्र देहु प्रभु मोही। जेहि प्रकार मारौं मुनिद्रोही।। मुनि मुसकाने सुनि प्रभु बानी। पूछेहु नाथ मोहि का जानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्हरेइँ भजन प्रभाव अघारी। जानउँ महिमा कछुक तुम्हारी।। ऊमरि तरु बिसाल तव माया। फल ब्रह्मांड अनेक निकाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जीव चराचर जंतु समाना। भीतर बसहि न जानहिं आना।। ते फल भच्छक कठिन कराला। तव भयँ डरत सदा सोउ काला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ते तुम्ह सकल लोकपति साईं। पूँछेहु मोहि मनुज की नाईं।। यह बर मागउँ कृपानिकेता। बसहु हृदयँ श्री अनुज समेता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अबिरल भगति बिरति सतसंगा। चरन सरोरुह प्रीति अभंगा।। जद्यपि ब्रह्म अखंड अनंता। अनुभव गम्य भजहिं जेहि संता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस तव रूप बखानउँ जानउँ। फिरि फिरि सगुन ब्रह्म रति मानउँ।। संतत दासन्ह देहु बड़ाई। तातें मोहि पूँछेहु रघुराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ। पावन पंचबटी तेहि नाऊँ।। दंडक बन पुनीत प्रभु करहू। उग्र साप मुनिबर कर हरहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बास करहु तहँ रघुकुल राया। कीजे सकल मुनिन्ह पर दाया।। चले राम मुनि आयसु पाई। तुरतहिं पंचबटी निअराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गीधराज सैं भैंट भइ बहु बिधि प्रीति बढ़ाइ।। गोदावरी निकट प्रभु रहे परन गृह छाइ।।13।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 14

जब ते राम कीन्ह तहँ बासा। सुखी भए मुनि बीती त्रासा।। गिरि बन नदीं ताल छबि छाए। दिन दिन प्रति अति हौहिं सुहाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खग मृग बृंद अनंदित रहहीं। मधुप मधुर गंजत छबि लहहीं।। सो बन बरनि न सक अहिराजा। जहाँ प्रगट रघुबीर बिराजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक बार प्रभु सुख आसीना। लछिमन बचन कहे छलहीना।। सुर नर मुनि सचराचर साईं। मैं पूछउँ निज प्रभु की नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोहि समुझाइ कहहु सोइ देवा। सब तजि करौं चरन रज सेवा।। कहहु ग्यान बिराग अरु माया। कहहु सो भगति करहु जेहिं दाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ईस्वर जीव भेद प्रभु सकल कहौ समुझाइ।। जातें होइ चरन रति सोक मोह भ्रम जाइ।।14।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 15

थोरेहि महँ सब कहउँ बुझाई। सुनहु तात मति मन चित लाई।। मैं अरु मोर तोर तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गो गोचर जहँ लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई।। तेहि कर भेद सुनहु तुम्ह सोऊ। बिद्या अपर अबिद्या दोऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक दुष्ट अतिसय दुखरूपा। जा बस जीव परा भवकूपा।। एक रचइ जग गुन बस जाकें। प्रभु प्रेरित नहिं निज बल ताकें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ग्यान मान जहँ एकउ नाहीं। देख ब्रह्म समान सब माही।। कहिअ तात सो परम बिरागी। तृन सम सिद्धि तीनि गुन त्यागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
माया ईस न आपु कहुँ जान कहिअ सो जीव। बंध मोच्छ प्रद सर्बपर माया प्रेरक सीव।।15।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 16

धर्म तें बिरति जोग तें ग्याना। ग्यान मोच्छप्रद बेद बखाना।। जातें बेगि द्रवउँ मैं भाई। सो मम भगति भगत सुखदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो सुतंत्र अवलंब न आना। तेहि आधीन ग्यान बिग्याना।। भगति तात अनुपम सुखमूला। मिलइ जो संत होइँ अनुकूला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भगति कि साधन कहउँ बखानी। सुगम पंथ मोहि पावहिं प्रानी।। प्रथमहिं बिप्र चरन अति प्रीती। निज निज कर्म निरत श्रुति रीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि कर फल पुनि बिषय बिरागा। तब मम धर्म उपज अनुरागा।। श्रवनादिक नव भक्ति दृढ़ाहीं। मम लीला रति अति मन माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत चरन पंकज अति प्रेमा। मन क्रम बचन भजन दृढ़ नेमा।। गुरु पितु मातु बंधु पति देवा। सब मोहि कहँ जाने दृढ़ सेवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मम गुन गावत पुलक सरीरा। गदगद गिरा नयन बह नीरा।। काम आदि मद दंभ न जाकें। तात निरंतर बस मैं ताकें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बचन कर्म मन मोरि गति भजनु करहिं निःकाम।। तिन्ह के हृदय कमल महुँ करउँ सदा बिश्राम।।16।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 17

भगति जोग सुनि अति सुख पावा। लछिमन प्रभु चरनन्हि सिरु नावा।। एहि बिधि गए कछुक दिन बीती। कहत बिराग ग्यान गुन नीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सूपनखा रावन कै बहिनी। दुष्ट हृदय दारुन जस अहिनी।। पंचबटी सो गइ एक बारा। देखि बिकल भइ जुगल कुमारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भ्राता पिता पुत्र उरगारी। पुरुष मनोहर निरखत नारी।। होइ बिकल सक मनहि न रोकी। जिमि रबिमनि द्रव रबिहि बिलोकी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रुचिर रुप धरि प्रभु पहिं जाई। बोली बचन बहुत मुसुकाई।। तुम्ह सम पुरुष न मो सम नारी। यह सँजोग बिधि रचा बिचारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मम अनुरूप पुरुष जग माहीं। देखेउँ खोजि लोक तिहु नाहीं।। ताते अब लगि रहिउँ कुमारी। मनु माना कछु तुम्हहि निहारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीतहि चितइ कही प्रभु बाता। अहइ कुआर मोर लघु भ्राता।। गइ लछिमन रिपु भगिनी जानी। प्रभु बिलोकि बोले मृदु बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुंदरि सुनु मैं उन्ह कर दासा। पराधीन नहिं तोर सुपासा।। प्रभु समर्थ कोसलपुर राजा। जो कछु करहिं उनहि सब छाजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेवक सुख चह मान भिखारी। ब्यसनी धन सुभ गति बिभिचारी।। लोभी जसु चह चार गुमानी। नभ दुहि दूध चहत ए प्रानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि फिरि राम निकट सो आई। प्रभु लछिमन पहिं बहुरि पठाई।। लछिमन कहा तोहि सो बरई। जो तृन तोरि लाज परिहरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब खिसिआनि राम पहिं गई। रूप भयंकर प्रगटत भई।। सीतहि सभय देखि रघुराई। कहा अनुज सन सयन बुझाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्हि। ताके कर रावन कहँ मनौ चुनौती दीन्हि।।17।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 18

नाक कान बिनु भइ बिकरारा। जनु स्त्रव सैल गैरु कै धारा।। खर दूषन पहिं गइ बिलपाता। धिग धिग तव पौरुष बल भ्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि पूछा सब कहेसि बुझाई। जातुधान सुनि सेन बनाई।। धाए निसिचर निकर बरूथा। जनु सपच्छ कज्जल गिरि जूथा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना बाहन नानाकारा। नानायुध धर घोर अपारा।। सुपनखा आगें करि लीनी। असुभ रूप श्रुति नासा हीनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
असगुन अमित होहिं भयकारी। गनहिं न मृत्यु बिबस सब झारी।। गर्जहि तर्जहिं गगन उड़ाहीं। देखि कटकु भट अति हरषाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोउ कह जिअत धरहु द्वौ भाई। धरि मारहु तिय लेहु छड़ाई।। धूरि पूरि नभ मंडल रहा। राम बोलाइ अनुज सन कहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लै जानकिहि जाहु गिरि कंदर। आवा निसिचर कटकु भयंकर।। रहेहु सजग सुनि प्रभु कै बानी। चले सहित श्री सर धनु पानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि राम रिपुदल चलि आवा। बिहसि कठिन कोदंड चढ़ावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning

दोहा 19

प्रभु बिलोकि सर सकहिं न डारी। थकित भई रजनीचर धारी।। सचिव बोलि बोले खर दूषन। यह कोउ नृपबालक नर भूषन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाग असुर सुर नर मुनि जेते। देखे जिते हते हम केते।। हम भरि जन्म सुनहु सब भाई। देखी नहिं असि सुंदरताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जद्यपि भगिनी कीन्ह कुरूपा। बध लायक नहिं पुरुष अनूपा।। देहु तुरत निज नारि दुराई। जीअत भवन जाहु द्वौ भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मोर कहा तुम्ह ताहि सुनावहु। तासु बचन सुनि आतुर आवहु।। दूतन्ह कहा राम सन जाई। सुनत राम बोले मुसकाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हम छत्री मृगया बन करहीं। तुम्ह से खल मृग खौजत फिरहीं।। रिपु बलवंत देखि नहिं डरहीं। एक बार कालहु सन लरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जद्यपि मनुज दनुज कुल घालक। मुनि पालक खल सालक बालक।। जौं न होइ बल घर फिरि जाहू। समर बिमुख मैं हतउँ न काहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रन चढ़ि करिअ कपट चतुराई। रिपु पर कृपा परम कदराई।। दूतन्ह जाइ तुरत सब कहेऊ। सुनि खर दूषन उर अति दहेऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning

दोहा 20

तब चले जान बबान कराल। फुंकरत जनु बहु ब्याल।। कोपेउ समर श्रीराम। चले बिसिख निसित निकाम।। अवलोकि खरतर तीर। मुरि चले निसिचर बीर।। भए क्रुद्ध तीनिउ भाइ। जो भागि रन ते जाइ।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तेहि बधब हम निज पानि। फिरे मरन मन महुँ ठानि।। आयुध अनेक प्रकार। सनमुख ते करहिं प्रहार।। रिपु परम कोपे जानि। प्रभु धनुष सर संधानि।। छाँड़े बिपुल नाराच। लगे कटन बिकट पिसाच।।
Chhand
अर्थ / Meaning
उर सीस भुज कर चरन। जहँ तहँ लगे महि परन।। चिक्करत लागत बान। धर परत कुधर समान।। भट कटत तन सत खंड। पुनि उठत करि पाषंड।। नभ उड़त बहु भुज मुंड। बिनु मौलि धावत रुंड।।
Chhand
अर्थ / Meaning
खग कंक काक सृगाल। कटकटहिं कठिन कराल।। कटकटहिं ज़ंबुक भूत प्रेत पिसाच खर्पर संचहीं। बेताल बीर कपाल ताल बजाइ जोगिनि नंचहीं।। रघुबीर बान प्रचंड खंडहिं भटन्ह के उर भुज सिरा।
Chhand
अर्थ / Meaning
जहँ तहँ परहिं उठि लरहिं धर धरु धरु करहिं भयकर गिरा।। अंतावरीं गहि उड़त गीध पिसाच कर गहि धावहीं।। संग्राम पुर बासी मनहुँ बहु बाल गुड़ी उड़ावहीं।। मारे पछारे उर बिदारे बिपुल भट कहँरत परे।
Chhand
अर्थ / Meaning
अवलोकि निज दल बिकल भट तिसिरादि खर दूषन फिरे।। सर सक्ति तोमर परसु सूल कृपान एकहि बारहीं। करि कोप श्रीरघुबीर पर अगनित निसाचर डारहीं।। प्रभु निमिष महुँ रिपु सर निवारि पचारि डारे सायका।
Chhand
अर्थ / Meaning
दस दस बिसिख उर माझ मारे सकल निसिचर नायका।। महि परत उठि भट भिरत मरत न करत माया अति घनी। सुर डरत चौदह सहस प्रेत बिलोकि एक अवध धनी।। सुर मुनि सभय प्रभु देखि मायानाथ अति कौतुक कर् यो।
Chhand
अर्थ / Meaning
देखहि परसपर राम करि संग्राम रिपुदल लरि मर् यो।।
Chhand
अर्थ / Meaning

दोहा 21

जब रघुनाथ समर रिपु जीते। सुर नर मुनि सब के भय बीते।। तब लछिमन सीतहि लै आए। प्रभु पद परत हरषि उर लाए।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता चितव स्याम मृदु गाता। परम प्रेम लोचन न अघाता।। पंचवटीं बसि श्रीरघुनायक। करत चरित सुर मुनि सुखदायक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धुआँ देखि खरदूषन केरा। जाइ सुपनखाँ रावन प्रेरा।। बोलि बचन क्रोध करि भारी। देस कोस कै सुरति बिसारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करसि पान सोवसि दिनु राती। सुधि नहिं तव सिर पर आराती।। राज नीति बिनु धन बिनु धर्मा। हरिहि समर्पे बिनु सतकर्मा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिद्या बिनु बिबेक उपजाएँ। श्रम फल पढ़े किएँ अरु पाएँ।। संग ते जती कुमंत्र ते राजा। मान ते ग्यान पान तें लाजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी। नासहि बेगि नीति अस सुनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रिपु रुज पावक पाप प्रभु अहि गनिअ न छोट करि। अस कहि बिबिध बिलाप करि लागी रोदन करन।।21(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
सभा माझ परि ब्याकुल बहु प्रकार कह रोइ। तोहि जिअत दसकंधर मोरि कि असि गति होइ।।21(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर। जहँ बस संभु भवानी सो कासी सेइअ कस न।।
Soratha
अर्थ / Meaning
जरत सकल सुर बृंद बिषम गरल जेहिं पान किय। तेहिं न भजसि मन मंद को कृपाल संकर सरिस।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 22

सुनत सभासद उठे अकुलाई। समुझाई गहि बाहँ उठाई।। कह लंकेस कहसि निज बाता। केंइँ तव नासा कान निपाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अवध नृपति दसरथ के जाए। पुरुष सिंघ बन खेलन आए।। समुझि परी मोहि उन्ह कै करनी। रहित निसाचर करिहहिं धरनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जिन्ह कर भुजबल पाइ दसानन। अभय भए बिचरत मुनि कानन।। देखत बालक काल समाना। परम धीर धन्वी गुन नाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अतुलित बल प्रताप द्वौ भ्राता। खल बध रत सुर मुनि सुखदाता।। सोभाधाम राम अस नामा। तिन्ह के संग नारि एक स्यामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रुप रासि बिधि नारि सँवारी। रति सत कोटि तासु बलिहारी।। तासु अनुज काटे श्रुति नासा। सुनि तव भगिनि करहिं परिहासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खर दूषन सुनि लगे पुकारा। छन महुँ सकल कटक उन्ह मारा।। खर दूषन तिसिरा कर घाता। सुनि दससीस जरे सब गाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुपनखहि समुझाइ करि बल बोलेसि बहु भाँति। गयउ भवन अति सोचबस नीद परइ नहिं राति।।22।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 23

सुर नर असुर नाग खग माहीं। मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीं।। खर दूषन मोहि सम बलवंता। तिन्हहि को मारइ बिनु भगवंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुर रंजन भंजन महि भारा। जौं भगवंत लीन्ह अवतारा।। तौ मै जाइ बैरु हठि करऊँ। प्रभु सर प्रान तजें भव तरऊँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
होइहि भजनु न तामस देहा। मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा।। जौं नररुप भूपसुत कोऊ। हरिहउँ नारि जीति रन दोऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चला अकेल जान चढि तहवाँ। बस मारीच सिंधु तट जहवाँ।। इहाँ राम जसि जुगुति बनाई। सुनहु उमा सो कथा सुहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन गए बनहिं जब लेन मूल फल कंद। जनकसुता सन बोले बिहसि कृपा सुख बृंद।। 23।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 24

सुनहु प्रिया ब्रत रुचिर सुसीला। मैं कछु करबि ललित नरलीला।। तुम्ह पावक महुँ करहु निवासा। जौ लगि करौं निसाचर नासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जबहिं राम सब कहा बखानी। प्रभु पद धरि हियँ अनल समानी।। निज प्रतिबिंब राखि तहँ सीता। तैसइ सील रुप सुबिनीता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमनहूँ यह मरमु न जाना। जो कछु चरित रचा भगवाना।। दसमुख गयउ जहाँ मारीचा। नाइ माथ स्वारथ रत नीचा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नवनि नीच कै अति दुखदाई। जिमि अंकुस धनु उरग बिलाई।। भयदायक खल कै प्रिय बानी। जिमि अकाल के कुसुम भवानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करि पूजा मारीच तब सादर पूछी बात। कवन हेतु मन ब्यग्र अति अकसर आयहु तात।।24।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 25

दसमुख सकल कथा तेहि आगें। कही सहित अभिमान अभागें।। होहु कपट मृग तुम्ह छलकारी। जेहि बिधि हरि आनौ नृपनारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहिं पुनि कहा सुनहु दससीसा। ते नररुप चराचर ईसा।। तासों तात बयरु नहिं कीजे। मारें मरिअ जिआएँ जीजै।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि मख राखन गयउ कुमारा। बिनु फर सर रघुपति मोहि मारा।। सत जोजन आयउँ छन माहीं। तिन्ह सन बयरु किएँ भल नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भइ मम कीट भृंग की नाई। जहँ तहँ मैं देखउँ दोउ भाई।। जौं नर तात तदपि अति सूरा। तिन्हहि बिरोधि न आइहि पूरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहिं ताड़का सुबाहु हति खंडेउ हर कोदंड।। खर दूषन तिसिरा बधेउ मनुज कि अस बरिबंड।।25।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 26

जाहु भवन कुल कुसल बिचारी। सुनत जरा दीन्हिसि बहु गारी।। गुरु जिमि मूढ़ करसि मम बोधा। कहु जग मोहि समान को जोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब मारीच हृदयँ अनुमाना। नवहि बिरोधें नहिं कल्याना।। सस्त्री मर्मी प्रभु सठ धनी। बैद बंदि कबि भानस गुनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उभय भाँति देखा निज मरना। तब ताकिसि रघुनायक सरना।। उतरु देत मोहि बधब अभागें। कस न मरौं रघुपति सर लागें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस जियँ जानि दसानन संगा। चला राम पद प्रेम अभंगा।। मन अति हरष जनाव न तेही। आजु देखिहउँ परम सनेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning

दोहा 27

तेहि बन निकट दसानन गयऊ। तब मारीच कपटमृग भयऊ।। अति बिचित्र कछु बरनि न जाई। कनक देह मनि रचित बनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता परम रुचिर मृग देखा। अंग अंग सुमनोहर बेषा।। सुनहु देव रघुबीर कृपाला। एहि मृग कर अति सुंदर छाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सत्यसंध प्रभु बधि करि एही। आनहु चर्म कहति बैदेही।। तब रघुपति जानत सब कारन। उठे हरषि सुर काजु सँवारन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मृग बिलोकि कटि परिकर बाँधा। करतल चाप रुचिर सर साँधा।। प्रभु लछिमनिहि कहा समुझाई। फिरत बिपिन निसिचर बहु भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता केरि करेहु रखवारी। बुधि बिबेक बल समय बिचारी।। प्रभुहि बिलोकि चला मृग भाजी। धाए रामु सरासन साजी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निगम नेति सिव ध्यान न पावा। मायामृग पाछें सो धावा।। कबहुँ निकट पुनि दूरि पराई। कबहुँक प्रगटइ कबहुँ छपाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रगटत दुरत करत छल भूरी। एहि बिधि प्रभुहि गयउ लै दूरी।। तब तकि राम कठिन सर मारा। धरनि परेउ करि घोर पुकारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन कर प्रथमहिं लै नामा। पाछें सुमिरेसि मन महुँ रामा।। प्रान तजत प्रगटेसि निज देहा। सुमिरेसि रामु समेत सनेहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंतर प्रेम तासु पहिचाना। मुनि दुर्लभ गति दीन्हि सुजाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिपुल सुमन सुर बरषहिं गावहिं प्रभु गुन गाथ। निज पद दीन्ह असुर कहुँ दीनबंधु रघुनाथ।।27।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 28

खल बधि तुरत फिरे रघुबीरा। सोह चाप कर कटि तूनीरा।। आरत गिरा सुनी जब सीता। कह लछिमन सन परम सभीता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जाहु बेगि संकट अति भ्राता। लछिमन बिहसि कहा सुनु माता।। भृकुटि बिलास सृष्टि लय होई। सपनेहुँ संकट परइ कि सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मरम बचन जब सीता बोला। हरि प्रेरित लछिमन मन डोला।। बन दिसि देव सौंपि सब काहू। चले जहाँ रावन ससि राहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सून बीच दसकंधर देखा। आवा निकट जती कें बेषा।। जाकें डर सुर असुर डेराहीं। निसि न नीद दिन अन्न न खाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो दससीस स्वान की नाई। इत उत चितइ चला भड़िहाई।। इमि कुपंथ पग देत खगेसा। रह न तेज बुधि बल लेसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना बिधि करि कथा सुहाई। राजनीति भय प्रीति देखाई।। कह सीता सुनु जती गोसाईं। बोलेहु बचन दुष्ट की नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब रावन निज रूप देखावा। भई सभय जब नाम सुनावा।। कह सीता धरि धीरजु गाढ़ा। आइ गयउ प्रभु रहु खल ठाढ़ा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जिमि हरिबधुहि छुद्र सस चाहा। भएसि कालबस निसिचर नाहा।। सुनत बचन दससीस रिसाना। मन महुँ चरन बंदि सुख माना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
क्रोधवंत तब रावन लीन्हिसि रथ बैठाइ। चला गगनपथ आतुर भयँ रथ हाँकि न जाइ।।28।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 29

हा जग एक बीर रघुराया। केहिं अपराध बिसारेहु दाया।। आरति हरन सरन सुखदायक। हा रघुकुल सरोज दिननायक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हा लछिमन तुम्हार नहिं दोसा। सो फलु पायउँ कीन्हेउँ रोसा।। बिबिध बिलाप करति बैदेही। भूरि कृपा प्रभु दूरि सनेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा। पुरोडास चह रासभ खावा।। सीता कै बिलाप सुनि भारी। भए चराचर जीव दुखारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गीधराज सुनि आरत बानी। रघुकुलतिलक नारि पहिचानी।। अधम निसाचर लीन्हे जाई। जिमि मलेछ बस कपिला गाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीते पुत्रि करसि जनि त्रासा। करिहउँ जातुधान कर नासा।। धावा क्रोधवंत खग कैसें। छूटइ पबि परबत कहुँ जैसे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रे रे दुष्ट ठाढ़ किन होही। निर्भय चलेसि न जानेहि मोही।। आवत देखि कृतांत समाना। फिरि दसकंधर कर अनुमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
की मैनाक कि खगपति होई। मम बल जान सहित पति सोई।। जाना जरठ जटायू एहा। मम कर तीरथ छाँड़िहि देहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनत गीध क्रोधातुर धावा। कह सुनु रावन मोर सिखावा।। तजि जानकिहि कुसल गृह जाहू। नाहिं त अस होइहि बहुबाहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम रोष पावक अति घोरा। होइहि सकल सलभ कुल तोरा।। उतरु न देत दसानन जोधा। तबहिं गीध धावा करि क्रोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धरि कच बिरथ कीन्ह महि गिरा। सीतहि राखि गीध पुनि फिरा।। चौचन्ह मारि बिदारेसि देही। दंड एक भइ मुरुछा तेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब सक्रोध निसिचर खिसिआना। काढ़ेसि परम कराल कृपाना।। काटेसि पंख परा खग धरनी। सुमिरि राम करि अदभुत करनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीतहि जानि चढ़ाइ बहोरी। चला उताइल त्रास न थोरी।। करति बिलाप जाति नभ सीता। ब्याध बिबस जनु मृगी सभीता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गिरि पर बैठे कपिन्ह निहारी। कहि हरि नाम दीन्ह पट डारी।। एहि बिधि सीतहि सो लै गयऊ। बन असोक महँ राखत भयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हारि परा खल बहु बिधि भय अरु प्रीति देखाइ। तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ।।29(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जेहि बिधि कपट कुरंग सँग धाइ चले श्रीराम। सो छबि सीता राखि उर रटति रहति हरिनाम।।29(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 30

रघुपति अनुजहि आवत देखी। बाहिज चिंता कीन्हि बिसेषी।। जनकसुता परिहरिहु अकेली। आयहु तात बचन मम पेली।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निसिचर निकर फिरहिं बन माहीं। मम मन सीता आश्रम नाहीं।। गहि पद कमल अनुज कर जोरी। कहेउ नाथ कछु मोहि न खोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अनुज समेत गए प्रभु तहवाँ। गोदावरि तट आश्रम जहवाँ।। आश्रम देखि जानकी हीना। भए बिकल जस प्राकृत दीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हा गुन खानि जानकी सीता। रूप सील ब्रत नेम पुनीता।। लछिमन समुझाए बहु भाँती। पूछत चले लता तरु पाँती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी। तुम्ह देखी सीता मृगनैनी।। खंजन सुक कपोत मृग मीना। मधुप निकर कोकिला प्रबीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कुंद कली दाड़िम दामिनी। कमल सरद ससि अहिभामिनी।। बरुन पास मनोज धनु हंसा। गज केहरि निज सुनत प्रसंसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
श्रीफल कनक कदलि हरषाहीं। नेकु न संक सकुच मन माहीं।। सुनु जानकी तोहि बिनु आजू। हरषे सकल पाइ जनु राजू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
किमि सहि जात अनख तोहि पाहीं । प्रिया बेगि प्रगटसि कस नाहीं।। एहि बिधि खौजत बिलपत स्वामी। मनहुँ महा बिरही अति कामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पूरनकाम राम सुख रासी। मनुज चरित कर अज अबिनासी।। आगे परा गीधपति देखा। सुमिरत राम चरन जिन्ह रेखा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कर सरोज सिर परसेउ कृपासिंधु रधुबीर।। निरखि राम छबि धाम मुख बिगत भई सब पीर।।30।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 31

तब कह गीध बचन धरि धीरा । सुनहु राम भंजन भव भीरा।। नाथ दसानन यह गति कीन्ही। तेहि खल जनकसुता हरि लीन्ही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लै दच्छिन दिसि गयउ गोसाई। बिलपति अति कुररी की नाई।। दरस लागी प्रभु राखेंउँ प्राना। चलन चहत अब कृपानिधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम कहा तनु राखहु ताता। मुख मुसकाइ कही तेहिं बाता।। जा कर नाम मरत मुख आवा। अधमउ मुकुत होई श्रुति गावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो मम लोचन गोचर आगें। राखौं देह नाथ केहि खाँगें।। जल भरि नयन कहहिं रघुराई। तात कर्म निज ते गतिं पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परहित बस जिन्ह के मन माहीं। तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं।। तनु तजि तात जाहु मम धामा। देउँ काह तुम्ह पूरनकामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता हरन तात जनि कहहु पिता सन जाइ।। जौं मैं राम त कुल सहित कहिहि दसानन आइ।।31।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 32

गीध देह तजि धरि हरि रुपा। भूषन बहु पट पीत अनूपा।। स्याम गात बिसाल भुज चारी। अस्तुति करत नयन भरि बारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning

दोहा 33

कोमल चित अति दीनदयाला। कारन बिनु रघुनाथ कृपाला।। गीध अधम खग आमिष भोगी। गति दीन्हि जो जाचत जोगी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनहु उमा ते लोग अभागी। हरि तजि होहिं बिषय अनुरागी।। पुनि सीतहि खोजत द्वौ भाई। चले बिलोकत बन बहुताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संकुल लता बिटप घन कानन। बहु खग मृग तहँ गज पंचानन।। आवत पंथ कबंध निपाता। तेहिं सब कही साप कै बाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दुरबासा मोहि दीन्ही सापा। प्रभु पद पेखि मिटा सो पापा।। सुनु गंधर्ब कहउँ मै तोही। मोहि न सोहाइ ब्रह्मकुल द्रोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मन क्रम बचन कपट तजि जो कर भूसुर सेव। मोहि समेत बिरंचि सिव बस ताकें सब देव।।33।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 34

सापत ताड़त परुष कहंता। बिप्र पूज्य अस गावहिं संता।। पूजिअ बिप्र सील गुन हीना। सूद्र न गुन गन ग्यान प्रबीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहि निज धर्म ताहि समुझावा। निज पद प्रीति देखि मन भावा।। रघुपति चरन कमल सिरु नाई। गयउ गगन आपनि गति पाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताहि देइ गति राम उदारा। सबरी कें आश्रम पगु धारा।। सबरी देखि राम गृहँ आए। मुनि के बचन समुझि जियँ भाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सरसिज लोचन बाहु बिसाला। जटा मुकुट सिर उर बनमाला।। स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। सबरी परी चरन लपटाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रेम मगन मुख बचन न आवा। पुनि पुनि पद सरोज सिर नावा।। सादर जल लै चरन पखारे। पुनि सुंदर आसन बैठारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कंद मूल फल सुरस अति दिए राम कहुँ आनि। प्रेम सहित प्रभु खाए बारंबार बखानि।।34।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 35

पानि जोरि आगें भइ ठाढ़ी। प्रभुहि बिलोकि प्रीति अति बाढ़ी।। केहि बिधि अस्तुति करौ तुम्हारी। अधम जाति मैं जड़मति भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अधम ते अधम अधम अति नारी। तिन्ह महँ मैं मतिमंद अघारी।। कह रघुपति सुनु भामिनि बाता। मानउँ एक भगति कर नाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जाति पाँति कुल धर्म बड़ाई। धन बल परिजन गुन चतुराई।। भगति हीन नर सोहइ कैसा। बिनु जल बारिद देखिअ जैसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं। सावधान सुनु धरु मन माहीं।। प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गुर पद पंकज सेवा तीसरि भगति अमान। चौथि भगति मम गुन गन करइ कपट तजि गान।।35।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 36

मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा।। छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सातवँ सम मोहि मय जग देखा। मोतें संत अधिक करि लेखा।। आठवँ जथालाभ संतोषा। सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नवम सरल सब सन छलहीना। मम भरोस हियँ हरष न दीना।। नव महुँ एकउ जिन्ह के होई। नारि पुरुष सचराचर कोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ अतिसय प्रिय भामिनि मोरे। सकल प्रकार भगति दृढ़ तोरें।। जोगि बृंद दुरलभ गति जोई। तो कहुँ आजु सुलभ भइ सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मम दरसन फल परम अनूपा। जीव पाव निज सहज सरूपा।। जनकसुता कइ सुधि भामिनी। जानहि कहु करिबरगामिनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पंपा सरहि जाहु रघुराई। तहँ होइहि सुग्रीव मिताई।। सो सब कहिहि देव रघुबीरा। जानतहूँ पूछहु मतिधीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बार बार प्रभु पद सिरु नाई। प्रेम सहित सब कथा सुनाई।।
Chaupai
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दोहा 37

चले राम त्यागा बन सोऊ। अतुलित बल नर केहरि दोऊ।। बिरही इव प्रभु करत बिषादा। कहत कथा अनेक संबादा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन देखु बिपिन कइ सोभा। देखत केहि कर मन नहिं छोभा।। नारि सहित सब खग मृग बृंदा। मानहुँ मोरि करत हहिं निंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हमहि देखि मृग निकर पराहीं। मृगीं कहहिं तुम्ह कहँ भय नाहीं।। तुम्ह आनंद करहु मृग जाए। कंचन मृग खोजन ए आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संग लाइ करिनीं करि लेहीं। मानहुँ मोहि सिखावनु देहीं।। सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। भूप सुसेवित बस नहिं लेखिअ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राखिअ नारि जदपि उर माहीं। जुबती सास्त्र नृपति बस नाहीं।। देखहु तात बसंत सुहावा। प्रिया हीन मोहि भय उपजावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिरह बिकल बलहीन मोहि जानेसि निपट अकेल। सहित बिपिन मधुकर खग मदन कीन्ह बगमेल।।37(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
देखि गयउ भ्राता सहित तासु दूत सुनि बात। डेरा कीन्हेउ मनहुँ तब कटकु हटकि मनजात।।37(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 38

बिटप बिसाल लता अरुझानी। बिबिध बितान दिए जनु तानी।। कदलि ताल बर धुजा पताका। दैखि न मोह धीर मन जाका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिबिध भाँति फूले तरु नाना। जनु बानैत बने बहु बाना।। कहुँ कहुँ सुन्दर बिटप सुहाए। जनु भट बिलग बिलग होइ छाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कूजत पिक मानहुँ गज माते। ढेक महोख ऊँट बिसराते।। मोर चकोर कीर बर बाजी। पारावत मराल सब ताजी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तीतिर लावक पदचर जूथा। बरनि न जाइ मनोज बरुथा।। रथ गिरि सिला दुंदुभी झरना। चातक बंदी गुन गन बरना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मधुकर मुखर भेरि सहनाई। त्रिबिध बयारि बसीठीं आई।। चतुरंगिनी सेन सँग लीन्हें। बिचरत सबहि चुनौती दीन्हें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन देखत काम अनीका। रहहिं धीर तिन्ह कै जग लीका।। एहि कें एक परम बल नारी। तेहि तें उबर सुभट सोइ भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ। मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।38(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि। क्रोध के परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि।।38(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 39

गुनातीत सचराचर स्वामी। राम उमा सब अंतरजामी।। कामिन्ह कै दीनता देखाई। धीरन्ह कें मन बिरति दृढ़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम कीं दाया।। सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत सब सपना।। पुनि प्रभु गए सरोबर तीरा। पंपा नाम सुभग गंभीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत हृदय जस निर्मल बारी। बाँधे घाट मनोहर चारी।। जहँ तहँ पिअहिं बिबिध मृग नीरा। जनु उदार गृह जाचक भीरा।।
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अर्थ / Meaning
पुरइनि सबन ओट जल बेगि न पाइअ मर्म। मायाछन्न न देखिऐ जैसे निर्गुन ब्रह्म।।39(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सुखि मीन सब एकरस अति अगाध जल माहिं। जथा धर्मसीलन्ह के दिन सुख संजुत जाहिं।।39(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 40

बिकसे सरसिज नाना रंगा। मधुर मुखर गुंजत बहु भृंगा।। बोलत जलकुक्कुट कलहंसा। प्रभु बिलोकि जनु करत प्रसंसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चक्रवाक बक खग समुदाई। देखत बनइ बरनि नहिं जाई।। सुन्दर खग गन गिरा सुहाई। जात पथिक जनु लेत बोलाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ताल समीप मुनिन्ह गृह छाए। चहु दिसि कानन बिटप सुहाए।। चंपक बकुल कदंब तमाला। पाटल पनस परास रसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नव पल्लव कुसुमित तरु नाना। चंचरीक पटली कर गाना।। सीतल मंद सुगंध सुभाऊ। संतत बहइ मनोहर बाऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीं। सुनि रव सरस ध्यान मुनि टरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
फल भारन नमि बिटप सब रहे भूमि निअराइ। पर उपकारी पुरुष जिमि नवहिं सुसंपति पाइ।।40।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 41

देखि राम अति रुचिर तलावा। मज्जनु कीन्ह परम सुख पावा।। देखी सुंदर तरुबर छाया। बैठे अनुज सहित रघुराया।।
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तहँ पुनि सकल देव मुनि आए। अस्तुति करि निज धाम सिधाए।। बैठे परम प्रसन्न कृपाला। कहत अनुज सन कथा रसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिरहवंत भगवंतहि देखी। नारद मन भा सोच बिसेषी।। मोर साप करि अंगीकारा। सहत राम नाना दुख भारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई। पुनि न बनिहि अस अवसरु आई।। यह बिचारि नारद कर बीना। गए जहाँ प्रभु सुख आसीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गावत राम चरित मृदु बानी। प्रेम सहित बहु भाँति बखानी।। करत दंडवत लिए उठाई। राखे बहुत बार उर लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
स्वागत पूँछि निकट बैठारे। लछिमन सादर चरन पखारे।।
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अर्थ / Meaning
नाना बिधि बिनती करि प्रभु प्रसन्न जियँ जानि। नारद बोले बचन तब जोरि सरोरुह पानि।।41।।
Doha
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दोहा 42

सुनहु उदार सहज रघुनायक। सुंदर अगम सुगम बर दायक।। देहु एक बर मागउँ स्वामी। जद्यपि जानत अंतरजामी।।
Chaupai
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जानहु मुनि तुम्ह मोर सुभाऊ। जन सन कबहुँ कि करउँ दुराऊ।। कवन बस्तु असि प्रिय मोहि लागी। जो मुनिबर न सकहु तुम्ह मागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जन कहुँ कछु अदेय नहिं मोरें। अस बिस्वास तजहु जनि भोरें।। तब नारद बोले हरषाई । अस बर मागउँ करउँ ढिठाई।।
Chaupai
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जद्यपि प्रभु के नाम अनेका। श्रुति कह अधिक एक तें एका।। राम सकल नामन्ह ते अधिका। होउ नाथ अघ खग गन बधिका।।
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राका रजनी भगति तव राम नाम सोइ सोम। अपर नाम उडगन बिमल बसुहुँ भगत उर ब्योम।।42(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
एवमस्तु मुनि सन कहेउ कृपासिंधु रघुनाथ। तब नारद मन हरष अति प्रभु पद नायउ माथ।।42(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 43

अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी। पुनि नारद बोले मृदु बानी।। राम जबहिं प्रेरेउ निज माया। मोहेहु मोहि सुनहु रघुराया।।
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तब बिबाह मैं चाहउँ कीन्हा। प्रभु केहि कारन करै न दीन्हा।। सुनु मुनि तोहि कहउँ सहरोसा। भजहिं जे मोहि तजि सकल भरोसा।।
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करउँ सदा तिन्ह कै रखवारी। जिमि बालक राखइ महतारी।। गह सिसु बच्छ अनल अहि धाई। तहँ राखइ जननी अरगाई।।
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प्रौढ़ भएँ तेहि सुत पर माता। प्रीति करइ नहिं पाछिलि बाता।। मोरे प्रौढ़ तनय सम ग्यानी। बालक सुत सम दास अमानी।।
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जनहि मोर बल निज बल ताही। दुहु कहँ काम क्रोध रिपु आही।। यह बिचारि पंडित मोहि भजहीं। पाएहुँ ग्यान भगति नहिं तजहीं।।
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काम क्रोध लोभादि मद प्रबल मोह कै धारि। तिन्ह महँ अति दारुन दुखद मायारूपी नारि।।43।।
Doha
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दोहा 44

सुनि मुनि कह पुरान श्रुति संता। मोह बिपिन कहुँ नारि बसंता।। जप तप नेम जलाश्रय झारी। होइ ग्रीषम सोषइ सब नारी।।
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काम क्रोध मद मत्सर भेका। इन्हहि हरषप्रद बरषा एका।। दुर्बासना कुमुद समुदाई। तिन्ह कहँ सरद सदा सुखदाई।।
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धर्म सकल सरसीरुह बृंदा। होइ हिम तिन्हहि दहइ सुख मंदा।। पुनि ममता जवास बहुताई। पलुहइ नारि सिसिर रितु पाई।।
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पाप उलूक निकर सुखकारी। नारि निबिड़ रजनी अँधिआरी।। बुधि बल सील सत्य सब मीना। बनसी सम त्रिय कहहिं प्रबीना।।
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अर्थ / Meaning
अवगुन मूल सूलप्रद प्रमदा सब दुख खानि। ताते कीन्ह निवारन मुनि मैं यह जियँ जानि।।44।।
Doha
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दोहा 45

सुनि रघुपति के बचन सुहाए। मुनि तन पुलक नयन भरि आए।। कहहु कवन प्रभु कै असि रीती। सेवक पर ममता अरु प्रीती।।
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जे न भजहिं अस प्रभु भ्रम त्यागी। ग्यान रंक नर मंद अभागी।। पुनि सादर बोले मुनि नारद। सुनहु राम बिग्यान बिसारद।।
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संतन्ह के लच्छन रघुबीरा। कहहु नाथ भव भंजन भीरा।। सुनु मुनि संतन्ह के गुन कहऊँ। जिन्ह ते मैं उन्ह कें बस रहऊँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
षट बिकार जित अनघ अकामा। अचल अकिंचन सुचि सुखधामा।। अमितबोध अनीह मितभोगी। सत्यसार कबि कोबिद जोगी।।
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अर्थ / Meaning
सावधान मानद मदहीना। धीर धर्म गति परम प्रबीना।।
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गुनागार संसार दुख रहित बिगत संदेह।। तजि मम चरन सरोज प्रिय तिन्ह कहुँ देह न गेह।।45।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 46

निज गुन श्रवन सुनत सकुचाहीं। पर गुन सुनत अधिक हरषाहीं।। सम सीतल नहिं त्यागहिं नीती। सरल सुभाउ सबहिं सन प्रीती।।
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अर्थ / Meaning
जप तप ब्रत दम संजम नेमा। गुरु गोबिंद बिप्र पद प्रेमा।। श्रद्धा छमा मयत्री दाया। मुदिता मम पद प्रीति अमाया।।
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अर्थ / Meaning
बिरति बिबेक बिनय बिग्याना। बोध जथारथ बेद पुराना।। दंभ मान मद करहिं न काऊ। भूलि न देहिं कुमारग पाऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गावहिं सुनहिं सदा मम लीला। हेतु रहित परहित रत सीला।। मुनि सुनु साधुन्ह के गुन जेते। कहि न सकहिं सारद श्रुति तेते।।
Chaupai
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