Sundar Kand (सुन्दरकाण्ड)

Ramcharitmanas verses with Hindi meaning & English translation

60 Dohas · 345 verses

Sundar Kand recounts Hanuman's leap across the ocean to Lanka, his search for Sita, their meeting in the Ashok Vatika, the burning of Lanka, and his return with Sita's message — the Kand most often recited as a complete paath.

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Mangalacharan

शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं

3 verses

Doha 1

जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।।

6 verses

Doha 2

जात पवनसुत देवन्ह देखा। जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा।।

7 verses

Doha 3

निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।

10 verses

Doha 4

मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी।।

5 verses

Doha 5

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।

5 verses

Doha 6

लंका निसिचर निकर निवासा। इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा।।

5 verses

Doha 7

सुनहु पवनसुत रहनि हमारी। जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी।।

5 verses

Doha 8

जानतहूँ अस स्वामि बिसारी। फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी।।

5 verses

Doha 9

तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई।।

6 verses

Doha 10

सीता तैं मम कृत अपमाना। कटिहउँ तव सिर कठिन कृपाना।।

6 verses

Doha 11

त्रिजटा नाम राच्छसी एका। राम चरन रति निपुन बिबेका।।

5 verses

Doha 12

त्रिजटा सन बोली कर जोरी। मातु बिपति संगिनि तैं मोरी।।

7 verses

Doha 13

तब देखी मुद्रिका मनोहर। राम नाम अंकित अति सुंदर।।

7 verses

Doha 14

हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी।।

6 verses

Doha 15

कहेउ राम बियोग तव सीता। मो कहुँ सकल भए बिपरीता।।

6 verses

Doha 16

जौं रघुबीर होति सुधि पाई। करते नहिं बिलंबु रघुराई।।

6 verses

Doha 17

मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी।।

6 verses

Doha 18

चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा।।

5 verses

Doha 19

सुनि सुत बध लंकेस रिसाना। पठएसि मेघनाद बलवाना।।

6 verses

Doha 20

ब्रह्मबान कपि कहुँ तेहि मारा। परतिहुँ बार कटकु संघारा।।

5 verses

Doha 21

कह लंकेस कवन तैं कीसा। केहिं के बल घालेहि बन खीसा।।

6 verses

Doha 22

जानउँ मैं तुम्हारि प्रभुताई। सहसबाहु सन परी लराई।।

6 verses

Doha 23

राम चरन पंकज उर धरहू। लंका अचल राज तुम्ह करहू।।

5 verses

Doha 24

जदपि कहि कपि अति हित बानी। भगति बिबेक बिरति नय सानी।।

6 verses

Doha 25

पूँछहीन बानर तहँ जाइहि। तब सठ निज नाथहि लइ आइहि।।

6 verses

Doha 26

देह बिसाल परम हरुआई। मंदिर तें मंदिर चढ़ धाई।।

5 verses

Doha 27

मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा। जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा।।

5 verses

Doha 28

चलत महाधुनि गर्जेसि भारी। गर्भ स्त्रवहिं सुनि निसिचर नारी।।

5 verses

Doha 29

जौं न होति सीता सुधि पाई। मधुबन के फल सकहिं कि खाई।।

5 verses

Doha 30

जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया।।

5 verses

Doha 31

चलत मोहि चूड़ामनि दीन्ही। रघुपति हृदयँ लाइ सोइ लीन्ही।।

6 verses

Doha 32

सुनि सीता दुख प्रभु सुख अयना। भरि आए जल राजिव नयना।।

5 verses

Doha 33

बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा।।

6 verses

Doha 34

नाथ भगति अति सुखदायनी। देहु कृपा करि अनपायनी।।

5 verses

Doha 35

प्रभु पद पंकज नावहिं सीसा। गरजहिं भालु महाबल कीसा।।

8 verses

Doha 36

उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब ते जारि गयउ कपि लंका।।

6 verses

Doha 37

श्रवन सुनी सठ ता करि बानी। बिहसा जगत बिदित अभिमानी।।

6 verses

Doha 38

सोइ रावन कहुँ बनि सहाई। अस्तुति करहिं सुनाइ सुनाई।।

5 verses

Doha 39

तात राम नहिं नर भूपाला। भुवनेस्वर कालहु कर काला।।

6 verses

Doha 40

माल्यवंत अति सचिव सयाना। तासु बचन सुनि अति सुख माना।।

5 verses

Doha 41

बुध पुरान श्रुति संमत बानी। कही बिभीषन नीति बखानी।।

6 verses

Doha 42

अस कहि चला बिभीषनु जबहीं। आयूहीन भए सब तबहीं।।

5 verses

Doha 43

एहि बिधि करत सप्रेम बिचारा। आयउ सपदि सिंधु एहिं पारा।।

6 verses

Doha 44

कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू। आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू।।

5 verses

Doha 45

सादर तेहि आगें करि बानर। चले जहाँ रघुपति करुनाकर।।

5 verses

Doha 46

अस कहि करत दंडवत देखा। तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा।।

5 verses

Doha 47

तब लगि हृदयँ बसत खल नाना। लोभ मोह मच्छर मद माना।।

5 verses

Doha 48

सुनहु सखा निज कहउँ सुभाऊ। जान भुसुंडि संभु गिरिजाऊ।।

5 verses

Doha 49

सुनु लंकेस सकल गुन तोरें। तातें तुम्ह अतिसय प्रिय मोरें।।

7 verses

Doha 50

अस प्रभु छाड़ि भजहिं जे आना। ते नर पसु बिनु पूँछ बिषाना।।

5 verses

Doha 51

सखा कही तुम्ह नीकि उपाई। करिअ दैव जौं होइ सहाई।।

5 verses

Doha 52

प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।।

5 verses

Doha 53

तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा।।

5 verses

Doha 54

नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें।।

5 verses

Doha 55

ए कपि सब सुग्रीव समाना। इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना।।

5 verses

Doha 56

राम तेज बल बुधि बिपुलाई। सेष सहस सत सकहिं न गाई।।

7 verses

Doha 57

सुनत सभय मन मुख मुसुकाई। कहत दसानन सबहि सुनाई।।

7 verses

Doha 58

लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू।।

5 verses

Doha 59

सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे।।

5 verses

Doha 60

नाथ नील नल कपि द्वौ भाई। लरिकाई रिषि आसिष पाई।।

8 verses

Sundara Kanda — Valmiki Ramayana (Sanskrit)

The same Kand in Maharshi Valmiki's original Sanskrit, across 68 sargas with English translation.

Frequently asked about Sundar Kand

How many dohas are in Sundar Kand?

Sundar Kand (सुन्दरकाण्ड) of the Tulsidas Ramcharitmanas has 60 dohas, grouped into 61 sections containing 345 individual verses in total — chaupais, dohas, sorathas and chhands.

What happens in Sundar Kand?

Sundar Kand recounts Hanuman's leap across the ocean to Lanka, his search for Sita, their meeting in the Ashok Vatika, the burning of Lanka, and his return with Sita's message — the Kand most often recited as a complete paath.

Which famous passages are in Sundar Kand?

Sundar Kand contains Hanuman's ocean leap, the Ashok Vatika meeting, Lanka Dahan, and the Ram-Sugriv Sanvad. Each passage can be read verse by verse with its meaning and translation.

How many sargas are in Valmiki's Sundara Kanda?

Sundara Kanda (सुन्दरकाण्डम्) of the Valmiki Ramayana has 68 sargas of Sanskrit shlokas, each available here with an English translation.

Can I read Sundar Kand in Hindi and English?

Yes. Every verse of Sundar Kand on RamayanaPath shows the original Awadhi text in Devanagari, a Hindi meaning (अर्थ), an English translation, and IAST transliteration — free and without registration.