अयोध्याकाण्ड
दोहा 99
5 पद
Chaupai1 / 5
प्राननाथ प्रिय देवर साथा। बीर धुरीन धरें धनु भाथा।।
नहिं मग श्रमु भ्रमु दुख मन मोरें। मोहि लगि सोचु करिअ जनि भोरें।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सीता ने कहा) प्राणनाथ — प्रिय देवर (ननद) साथ। वीरधुरीण (श्रेष्ठ वीर) — धनु (धनुष)-भाथा (तरकश) धारे। मार्ग में श्रम (थकान)-भ्रम (भटकन)-दुख — मन मेरे (में) नहीं। मेरे लिए सोच (चिन्ता) भूलकर भी मत करें।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
prānanātha priya devara sāthā. bīra dhurīna dhareṃ dhanu bhāthā.
nahiṃ maga śramu bhramu dukha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'My Lord, the protector of my life, and my dear brother-in-law are with me — foremost among heroes, bearing bow and quiver. There is no toil, confusion, or sorrow on the way.'
Chaupai2 / 5
सुनि सुमंत्रु सिय सीतलि बानी। भयउ बिकल जनु फनि मनि हानी।।
नयन सूझ नहिं सुनइ न काना। कहि न सकइ कछु अति अकुलाना।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सुमन्त्र ने सीता की शीतल वाणी सुनकर — विकल (व्याकुल) — मानो फनि (साँप) मणि हानी (खोई)। नयन (आँखें) नहीं सूझतीं — कान नहीं सुनते। कुछ कह नहीं सकते — अत्यन्त अकुलाए (व्याकुल)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
suni sumantra siya sītalī bānī. bhayau bikala janu phani mani hānī.
nayana sūjha nahiṃ sunai
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Hearing Sita's cooling words, Sumantra was distraught — like a serpent that has lost its gem. His eyes could not see, his ears could not hear.
Chaupai3 / 5
राम प्रबोधु कीन्ह बहु भाँति। तदपि होति नहिं सीतलि छाती।।
जतन अनेक साथ हित कीन्हे। उचित उतर रघुनंदन दीन्हे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
राम ने बहुत भाँति प्रबोध (सान्त्वना) दिया — तदपि छाती शीतल नहीं होती। साथ (रहने) हेतु अनेक यत्न किए — रघुनन्दन ने उचित उत्तर दिए।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
rāma prabodhu kīnha bahu bhāṃtī. tadapi hotī nahiṃ sītalī chātī.
jatana aneka sātha hita ka
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Rama consoled him in many ways, yet his heart would not be cooled. He tried every means to be taken along.
Chaupai4 / 5
मेटि जाइ नहिं राम रजाई। कठिन करम गति कछु न बसाई।।
राम लखन सिय पद सिरु नाई। फिरेउ बनिक जिमि मूर गवाँई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
राम-आज्ञा मिटाई (टाली) नहीं जाती — कठिन कर्म-गति (भाग्य) — कुछ नहीं वश में। राम-लक्ष्मण-सीता-पद (चरणों) पर सिर नवाकर — लौटे — बणिक (व्यापारी) जैसे मूल (पूँजी) गँवाकर।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
meṭi jāi nahiṃ rāma rajāī. kaṭhina karama gati kachu na basāī.
rāma lakhana siya pada siru nāī.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Rama's command cannot be overturned; the workings of harsh fate cannot be helped. Bowing his head at the feet of Rama, Lakshmana, and Sita, the charioteer departed.
Doha5 / 5
-रथ हाँकेउ हय राम तन हेरि हेरि हिहिनाहिं।
देखि निषाद बिषादबस धुनहिं सीस पछिताहिं।।99।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
रथ हाँका (चलाया) — हय (घोड़े) राम-तन (शरीर) हेरि-हेरि (देख-देखकर) हिनहिनाते। देखकर निषाद (गुह) विषादवश — सिर धुनते (पीटते) — पछताते।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
ratha hāṃkeu haya rāma tana heri heri hihinahiṃ.
dekhi niṣāda biṣādabasa dhunahiṃ sīsa pachi
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The charioteer drove the chariot away. The horses kept looking back at Rama, neighing pitifully. Seeing this, the Nishad chief was overwhelmed with grief, beating his head.