बालकाण्ड

दोहा 136

5 पद

Chaupai1 / 5
पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।। फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।
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फिर जल में देखा — अपना निज रूप पाया — तदपि हृदय में सन्तोष नहीं आया। अधर फड़कते, मन में कोप — तुरन्त कमलापति (विष्णु) के पास चले।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then, looking in the water again, he saw his own true form restored, yet his heart found no peace. His lips quivered with anger as he strode swiftly toward the Lord of Lakshmi.
Chaupai2 / 5
देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोर उपहास कराई।। बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी।।
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(नारद ने सोचा) शाप दूँगा या मरकर जाऊँगा — जगत में मेरा उपहास कराया! बीच पथ (रास्ते) में दनुजारि (विष्णु) मिले — संग में रमा (लक्ष्मी) और वही राजकुमारी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'I shall either curse him or go and die — he has made me a laughingstock before the world!' On the way, he met the slayer of demons, with Lakshmi and that same princess by his side.
Chaupai3 / 5
बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।। सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।
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सुरसाईं (देवताओं के स्वामी विष्णु) ने मधुर वचन बोले — (कहा) मुनि! कहाँ चले, विकल (व्याकुल) की तरह? वचन सुनते ही अत्यन्त क्रोध उपजा — माया-वश मन में बोध (ज्ञान) नहीं रहा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The Lord of the gods spoke in sweet words: 'O sage, where are you going in such agitation?' Hearing his words, extreme anger arose; under Maya's power, wisdom did not remain in his mind.
Chaupai4 / 5
पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।। मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।
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(नारद ने कहा) पर-सम्पदा (दूसरों की सम्पत्ति) नहीं देख सकते! तुम्हारे (हृदय में) विशेष ईर्ष्या और कपट। समुद्र-मन्थन में रुद्र (शिव) को बौराया — देवताओं को प्रेरित करके विष पिलाया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'You cannot bear to see another's prosperity; you are full of envy and deceit. When churning the ocean, you drove Rudra mad and made the gods give him poison to drink.'
Doha5 / 5
असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु। स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।
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(नारद ने कहा) असुरों को सुरा (मदिरा), विष शंकर को — और आप (ने) रमा (लक्ष्मी) और चारु (सुन्दर) मणि (कौस्तुभ रखी)। स्वार्थ-साधक, कुटिल तुम — सदा कपट-व्यवहार!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'You gave the demons the wine, poison to Shankara, and kept Lakshmi and the precious jewel for yourself. You are a selfish schemer — your dealings are always full of deceit.'

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