बालकाण्ड

दोहा 160

5 पद

Chaupai1 / 5
भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।। नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।
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(नृप ने कहा) भलेहीं, नाथ! आयसु (आज्ञा) सिर पर धरकर। वृक्ष से तुरग (घोड़ा) बाँधकर महीश (राजा) बैठा। नृप ने बहुत भाँति उसकी प्रशंसा की — चरण वन्दना करके निज भाग्य सराहा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Very well, my lord,' said the king, placing the command on his head. He tied his horse to a tree and sat down. He praised the sage in many ways, bowed at his feet, and counted his own fortune blessed.
Chaupai2 / 5
पुनि बोले मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करउँ ढिठाई।। मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी।।
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फिर मृदु (कोमल) सुहावनी गिरा (वाणी) बोली — (कहा) पिता-प्रभु जानकर ढिठाई (धृष्टता) करता हूँ। मुझे मुनीश (मुनियों के ईश)! पुत्र-सेवक जानकर — नाथ! अपना नाम बखानकर कहो।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then he spoke again in gentle, pleasant words: 'Knowing you to be like a father, Lord, I make bold. Considering me your son and servant, please tell me your revered name.'
Chaupai3 / 5
तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुह्रद सो कपट सयाना।। बैरी पुनि छत्री पुनि राजा। छल बल कीन्ह चहइ निज काजा।।
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उसने (कपट-तापस ने) नृप को नहीं जाना — नृप ने उसे (पहचान लिया)। भूप सुहृद (सरल-हृदय) — वह कपट-सयाना (छल में चतुर)। बैरी (शत्रु), फिर क्षत्रिय, फिर राजा — छल-बल से अपना काज (काम) करना चाहता।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The king did not know the ascetic, but the ascetic knew the king. The king was guileless, but the other was cunning. He was an enemy, moreover a Kshatriya, moreover a king — by deceit and force he wished to accomplish his purpose.
Chaupai4 / 5
समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।। सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।
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राजसुख समझकर (याद करके) दुखी अराती (शत्रु) — अवाँ (भट्ठे) की अग्नि जैसे छाती सुलगती। नृप के सरल वचन कान से सुनकर — वैर (शत्रुता) सम्भारकर (याद करके) हृदय में हर्षित हुआ।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Brooding over his lost royal pleasures, the enemy's breast burned like a furnace of fire. Hearing the king's guileless words, he recalled his enmity and felt delighted within.
Doha5 / 5
कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत। नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेति।।160।।
हिन्दी अर्थ देखें
कपट में बोरकर (डुबोकर) मृदुल (कोमल) वाणी — युक्ति (चतुराई) समेत बोला। (कहा) नाम हमारा 'भिखारी' — अब निर्धन (गरीब), निकेत (घर) रहित।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Steeping his words in deceit, he spoke gently and with cunning: 'My name is Bhikhari (beggar) — I am now a penniless, homeless wanderer.'

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