बालकाण्ड

दोहा 175

5 पद

Chaupai1 / 5
अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।। सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।
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ऐसा कहकर सब महीदेव (ब्राह्मण) चले गए। समाचार पुरलोगों (नगरवासियों) ने पाए। सोचते, दैव (भाग्य) को दोष देते — (मानो) विचरते हंस को काग (कौआ) बना दिया जिसने (विधाता ने)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
So saying, all the Brahmins departed. The townsfolk heard the news and grieved, blaming fate for the wrong — just as a swan is turned into a crow by the Creator.
Chaupai2 / 5
उपरोहितहि भवन पहुँचाई। असुर तापसहि खबरि जनाई।। तेहिं खल जहँ तहँ पत्र पठाए। सजि सजि सेन भूप सब धाए।।
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उपरोहित (पुरोहित) को भवन पहुँचाकर — असुर (राक्षस) ने तापस (कपट-तापस राजा) को खबर जनाई। उस खल (दुष्ट) ने जहाँ-तहाँ पत्र (सन्देश) पठाए — सजि-सजिकर सेना — सब भूप (राजा) दौड़े।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
After delivering the family priest back to his home, the demon informed the ascetic-king. That wicked one then sent messages far and wide, and kings everywhere mustered their armies and marched forth.
Chaupai3 / 5
घेरेन्हि नगर निसान बजाई। बिबिध भाँति नित होई लराई।। जूझे सकल सुभट करि करनी। बंधु समेत परेउ नृप धरनी।।
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निशान (नगाड़े) बजाकर नगर घेर लिया — विविध भाँति नित्य लड़ाई होती। सब सुभट (योद्धा) करनी करके जूझे (मरे) — बन्धु (भाई) समेत नृप (राजा) धरनी (पृथ्वी) पर पड़ा (मारा गया)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
They besieged the city with drums beating; diverse battles raged day after day. All the brave warriors fought valiantly and fell; the king too fell along with his brother.
Chaupai4 / 5
सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।। रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।
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सत्यकेतु-कुल में कोई नहीं बचा — विप्र-शाप कैसे असत्य (झूठा) हो? रिपु (शत्रु) जीतकर सब नृपों ने नगर बसाया — निज पुर (अपने नगर) गए, जय-यश पाकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Not one person of Satyaketu's line survived — for how can a Brahmin's curse prove false? Having defeated their foe, all the kings settled in the city, and then returned to their own cities with glory and triumph.
Doha5 / 5
भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम। धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।
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भरद्वाज! सुनो — जिसे जब विधाता (भाग्य) बाम (प्रतिकूल) होता। धूरि (धूल) मेरु-समान, जनक (पिता) यम (मृत्यु) — उसे ब्याल (साँप) समान दाम (माला)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Listen, Bharadvaja — when fate turns hostile, dust becomes like Mount Meru, a protector becomes Death itself, and a garland becomes a serpent.

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