बालकाण्ड

दोहा 210

7 पद

Chaupai1 / 7
प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई।। होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी।।
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प्रातः (सवेरे) रघुराई ने मुनि से कहा — (कहा) निर्भय होकर यज्ञ करो, जाओ। मुनियों की झारी (समूह) होम (हवन) करने लगी — आपु (प्रभु) रहे मख (यज्ञ) की रखवारी (रक्षा) करते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
At dawn, the Lord of the Raghus said to the sage: 'Go and perform your sacrifice without fear.' The host of sages began the fire-ritual, while the Lord Himself stood guard over the sacrifice.
Chaupai2 / 7
सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।। बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।
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सुनकर मारीच — क्रोधी निशाचर (राक्षस) — सहायकों को लेकर मुनिद्रोही (मुनियों का शत्रु) दौड़ा। बिनुफर (बिना फल वाले) बाण से राम ने उसे मारा — सौ योजन दूर सागर पार गया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Hearing this, the wrathful demon Maricha rushed forth with his allies to attack the sages. Rama struck him with a headless arrow that hurled him a hundred yojanas across the ocean.
Chaupai3 / 7
पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा।। मारि असुर द्विज निर्मयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी।।
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पावक-सर (अग्नि-बाण) से सुबाहु को फिर मारा — अनुज (लक्ष्मण) ने निशाचर-कटक (राक्षस-सेना) संहारा। असुर मारकर द्विज (ब्राह्मणों) को निर्भय किया — देवता और मुनि-समूह स्तुति करते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then He slew Subahu with a fire-arrow, and His younger brother destroyed the entire demon army. Having slain the demons and freed the Brahmins from fear, gods and sages all joined in praise.
Chaupai4 / 7
तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।। भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।
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वहाँ फिर कुछ दिवस रघुराय रहे — विप्रों (ब्राह्मणों) पर दया की। भक्ति हेतु बहुत कथा-पुराण — विप्रों ने कहे — यद्यपि प्रभु जानते (ही थे)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The Lord of the Raghus stayed there for some more days, showing kindness to the Brahmins. Though the Lord already knew everything, the Brahmins narrated many Puranic stories for the sake of devotion.
Chaupai5 / 7
तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।। धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।
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तब मुनि ने सादर बुझाकर (समझाकर) कहा — (कहा) एक चरित्र (घटना), प्रभु! जाकर देखिए। धनुषयज्ञ (धनुष-यज्ञ), मुनि! रघुकुल-नाथ — हर्षित होकर मुनिवर के साथ चले।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then the sage respectfully said: 'Lord, let us go and witness an event. There is a bow-sacrifice, O Lord of the Raghu dynasty.' The Lord joyfully set out with the great sage.
Chaupai6 / 7
आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं।। पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी।।
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मार्ग में एक आश्रम दीख — खग (पक्षी), मृग (पशु), जीव-जन्तु वहाँ नहीं। प्रभु ने शिला (पत्थर) देखकर मुनि से पूछा — मुनि ने विशेष (विस्तार से) सकल कथा कही।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
On the way, they saw a hermitage, but neither bird, deer, nor any creature was there. The Lord noticed a stone and asked the sage about it; the sage narrated the entire story in detail.
Doha7 / 7
गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर। चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।
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(विश्वामित्र ने कहा) गौतम-नारी (अहल्या) — शाप-वश — उपल (पत्थर) देह धारण किए धीर (धैर्यपूर्वक) रही। चरण-कमल-रज (चरण-धूलि) चाहती — कृपा करो, रघुवीर!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'She is Gautama's wife, who by the force of a curse endures patiently in this stone form. She longs for the dust of Your lotus feet — be gracious, O Hero of the Raghus.'

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