बालकाण्ड
दोहा 226
5 पद
Chaupai1 / 5
निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।
कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।
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निशि (रात) प्रवेश पर मुनि ने आज्ञा दी — सबने सन्ध्याबन्दन (सन्ध्या-पूजा) किया। कथा-इतिहास-पुराण कहते — रुचिर (सुन्दर) रजनी (रात) के दो जाम (पहर) सिराने (बीतने)।
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At nightfall, the sage gave his command, and all performed their evening worship. Telling stories from history and the Puranas, two watches of the delightful night passed.
Chaupai2 / 5
मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।
जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।
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मुनिवर ने तब जाकर शयन किया — दोनों भाई चरण चापने (दबाने) लगे। जिनके चरण-सरोरुह (चरण-कमल) को लगकर (पाकर) — विविध जप-योग-विरागी (वैरागी) करते।
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The great sage then went to sleep. The two brothers began pressing his feet — those lotus feet for which ascetics practice various forms of japa, yoga, and renunciation.
Chaupai3 / 5
तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।
बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।
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वही दोनों बन्धु — प्रेम से मानो जीते — गुरु-पद-कमल प्रीत (प्रेम) से पलोटते (दबाते)। बार-बार मुनि ने आज्ञा दी — तब रघुवर जाकर शयन किया।
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Those two brothers, as if conquered by love, lovingly massaged the guru's lotus feet. Again and again the sage ordered them to rest, and then the chief of the Raghus went and lay down.
Chaupai4 / 5
चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।
पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।
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लक्ष्मण चरण चापते (दबाते) — उर (छाती) से लगाकर। सभय (डरे), सप्रेम (प्रेमपूर्ण) — परम सचु (सुख) पाकर। बार-बार प्रभु ने कहा — सोओ, तात! — (तब लक्ष्मण) पद-जलजात (चरण-कमल) हृदय पर धरकर पौढ़े (लेटे)।
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Lakshmana pressed Rama's feet, holding them to his chest, fearful yet loving, experiencing supreme joy. Again and again the Lord said, 'Sleep now, dear brother,' and Lakshmana lay down, clasping the Lord's lotus feet to his heart.
Doha5 / 5
उठे लखन निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।।
गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान।।226।।
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निशि (रात) बीतने पर लक्ष्मण उठे — अरुणशिखा (मुर्गे) की ध्वनि कान में सुनकर। गुरु से भी पहले जगत-पति (जगत के स्वामी) — सुजान (बुद्धिमान) राम जागे।
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Lakshmana rose when the night was over, hearing the crowing of the rooster. But the all-knowing Lord of the universe, Rama, had already awakened even before the guru.