बालकाण्ड
दोहा 262
5 पद
Chaupai1 / 5
प्रभु दोउ चापखंड महि डारे। देखि लोग सब भए सुखारे।।
कोसिकरुप पयोनिधि पावन। प्रेम बारि अवगाहु सुहावन।।
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प्रभु ने दोनों चापखण्ड (धनुष-टुकड़े) मही (पृथ्वी) पर डाले — देखकर सब लोग सुखी हुए। कौशिक (विश्वामित्र) रूप — पावन पयोनिधि (क्षीरसागर)। प्रेम-बारि (जल) — अवगाह (स्नान) सुहावन (सुन्दर)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The Lord cast the two pieces of the bow upon the ground, and all the people were overjoyed. Sage Kaushika's love was like a holy ocean, and the beautiful waters of love were its bathing pool.
Chaupai2 / 5
रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी।।
बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना।।
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राम-रूप-राकेश (पूर्ण चन्द्रमा) निहारकर — बढ़तीं बीचि (लहरें) — भारी पुलकावली (रोमांच)। नभ (आकाश) में गहगहे (गम्भीर) निशान (नगाड़े) बजे — देवबधू (देव-वधुएँ) गान करतीं नाचतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Seeing the full moon of Rama's beauty, great waves of thrilling joy surged forth. Drums resounded in the sky, and celestial maidens danced and sang.
Chaupai3 / 5
ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा।।
बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला।।
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ब्रह्मा आदि सुर (देवता), सिद्ध, मुनीश (मुनीश्वर) — प्रभु की प्रशंसा करते, आशीर्वाद देते। सुमन (फूल), रंग — बहुत माला बरसातीं। किन्नर रसाल (मधुर) गीत गाते।
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Brahma and all the gods, siddhas, and great sages praised the Lord and gave their blessings. They rained flowers and garlands of many colors, and Kinnaras sang delightful songs.
Chaupai4 / 5
रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।
मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।
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भुवनों (लोकों) को भर गई 'जय-जय' वाणी — धनुषभंग-ध्वनि जाती नहीं जानी (सुनाई नहीं दी)। मुदित (प्रसन्न) कहते जहाँ-तहाँ नर-नारी — भंजा (तोड़ा) राम ने शम्भु-धनु (शिव-धनुष) भारी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Cries of 'Victory! Victory!' filled the worlds, drowning out even the sound of the bow breaking. Everywhere men and women joyfully said, 'Rama has broken Shambhu's mighty bow!'
Doha5 / 5
बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।
करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।
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बन्दी (स्तुतिपाठक), मागध (बन्दीजन), सूतगण (चारण) — मतिधीर (बुद्धिमान) विरुद (यशोगाथा) कहते। सब लोग निछावरी (न्योछावर) करते — हय (घोड़े), गय (हाथी), धन, मणि, चीर (वस्त्र)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Bards, panegyrists, and minstrels recited the Lord's praises with great wisdom. Everyone made offerings of horses, elephants, wealth, jewels, and garments.