बालकाण्ड

दोहा 265

5 पद

Chaupai1 / 5
पुर अरु ब्योम बाजने बाजे। खल भए मलिन साधु सब राजे।। सुर किंनर नर नाग मुनीसा। जय जय जय कहि देहिं असीसा।।
हिन्दी अर्थ देखें
पुर (नगर) और व्योम (आकाश) में बाजने बजे। खल (दुष्ट) मलिन (उदास) हुए — साधु (सज्जन) सब राजे (प्रसन्न हुए)। सुर (देवता), किन्नर, नर, नाग, मुनीश — 'जय-जय-जय' कहकर आशीर्वाद देते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Instruments played in the city and in the heavens. The wicked were disheartened while all the virtuous rejoiced. Gods, Kinnaras, men, nagas, and great sages all cried 'Victory! Victory!' and gave their blessings.
Chaupai2 / 5
नाचहिं गावहिं बिबुध बधूटीं। बार बार कुसुमांजलि छूटीं।। जहँ तहँ बिप्र बेदधुनि करहीं। बंदी बिरदावलि उच्चरहीं।।
हिन्दी अर्थ देखें
विबुध-बधूटी (देव-वधुएँ) नाचतीं-गातीं — बार-बार कुसुमांजलि (फूलों की अंजलि) छूटती। जहाँ-तहाँ विप्र (ब्राह्मण) वेदध्वनि करते — बन्दी (स्तुतिपाठक) विरिदावली (यशोगाथा) उच्चारते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Celestial women danced and sang, and showers of flower-offerings fell again and again. Here and there, Brahmins chanted Vedic hymns, and bards recited the praises of the Lord.
Chaupai3 / 5
महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।। करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।
हिन्दी अर्थ देखें
मही (पृथ्वी), पाताल, नाक (स्वर्ग) में यश व्यापा — राम ने सीता वरी, चाप (धनुष) भंजा (तोड़ा)। पुर (नगर) नर-नारी आरती करते — निछावरी देते, बित्त (धन) बिसारकर (भूलकर)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The glory spread through earth, the netherworld, and heaven: 'Rama has won Sita and broken the bow.' The men and women of the city performed arati and made lavish offerings, forgetting their wealth.
Chaupai4 / 5
सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।। सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।
हिन्दी अर्थ देखें
सीता-राम की जोड़ी शोभित — छबि (सौन्दर्य) और श्रृंगार मानो एक ठौर (स्थान) में। सखियाँ कहतीं — (कहतीं) सीता! प्रभु-पद (चरण) पकड़ो। अत्यन्त भयभीत — चरण-स्पर्श नहीं करतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The pair of Sita and Rama shone as though Beauty and Adornment had come together in one place. Her companions said, 'Sita, clasp the Lord's feet,' but she was too afraid to touch them.
Doha5 / 5
गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि। मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि।।265।।
हिन्दी अर्थ देखें
गौतम-तिय (पत्नी अहल्या) की गति (दशा) स्मरण करके — पग (चरण) पाणि (हाथ) से नहीं छूतीं। मन में हँसे रघुवंशमणि — अलौकिक प्रीति जानकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Remembering the fate of Gautama's wife (Ahalya), she would not touch his feet with her hands. The jewel of the Raghu dynasty smiled in his heart, recognizing her extraordinary love.

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