लङ्काकाण्ड पाठ

सम्पूर्ण पाठ — 121 दोहे, 785 पद, एक ही पृष्ठ पर। पाठ में लगभग 5 घंटे लगते हैं। किसी भी पद पर टैप करके उसका हिन्दी अर्थ और अंग्रेज़ी अनुवाद देखें।

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मंगलाचरण

रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम्। मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवं वन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरामम्॥1॥
Shloka
अर्थ / Meaning
शंखेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं कालव्यालकरालभूषणधरं गंगाशशांकप्रियम्। काशीशं कलिकल्मषौघशमनं कल्याणकल्पद्रुमं नौमीड्यं गिरिजापतिं गुणनिधिं कन्दर्पहं शंकरम्॥2॥
Shloka
अर्थ / Meaning
यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्। खलानां दण्डकृद्योऽसौ शंकरः शं तनोतु मे॥3॥
Shloka
अर्थ / Meaning

दोहा 1

यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।। प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।। सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।। राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।। राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।। सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ। आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 2

सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।। देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।। करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।। लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।। संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास। ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 3

जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।। जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।। मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।। गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।। बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान। ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 4

बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।। चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।। देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।। अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।। तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं। अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 5

अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।। सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।। खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।। खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।। दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।। सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस। सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 6

निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।। मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।। चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।। तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।। जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ। सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 7

नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।। चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।। तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।। मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।। जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात। नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 8

तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।। सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।। देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।। मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।। कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि। निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 9

कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।। बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।। सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।। सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।। प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।। प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि। नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 10

यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।। सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।। सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।। संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।। बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास। परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 11

इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।। सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।। ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।। दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।। प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन। धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक। कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 12

पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।। मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।। कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।। मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।। छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।। बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास। तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान। दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 13

देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।। मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।। लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।। मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।। प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान। सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग। रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 14

कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।। सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।। सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।। मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।। कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु। लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 15

पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।। भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।। श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।। आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।। उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान। मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ। प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 16

बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।। नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।। रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।। जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।। मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध। सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद। मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 17

इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।। कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।। मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।। बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।। काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ। सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ। अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 18

बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।। प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।। बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।। निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।। भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।। बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज। सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 19

तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।। सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।। अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।। मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।। उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ। राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 20

कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।। मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।। बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।। अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।। सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि। आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 21

रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।। कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।। अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।। गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।। दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।। सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस। अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 22

सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।। तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।। खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।। देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।। धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु। लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास। सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 23

तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।। तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।। जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।। आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।। रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।। चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ। फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह। कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि। जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष। तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस। प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।
Doha
अर्थ / Meaning
हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक। जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 24

धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।। नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।। मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।। बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।। देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।। पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।। कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।। खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।। कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख। इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 25

सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।। जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।। भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।। जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।। सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान। रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 26

सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।। सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।। तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।। पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।। सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।। कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 27

सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।। जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।। तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।। जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।। सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि। मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 28

सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।। नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।। बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।। जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।। हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस। हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 29

जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।। नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।। आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।। लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।। सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।। इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद। ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 30

अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।। दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।। मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।। जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।। जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ। तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 31

जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।। कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।। तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।। सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।। कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास। सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक। खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 32

जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।। हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।। डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।। कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।। की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।। ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास। कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ। धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 33

एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।। मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।। मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।। सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।। रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर। बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।
Soratha
अर्थ / Meaning
तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर। तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 34

मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।। असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।। मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।। बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।। समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।। सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।। झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।। पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ। झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।। कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 35

कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।। गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।। भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।। जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।। तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।। रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।। प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज। पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ। मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 36

कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।। रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।। कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।। जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।। पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।। जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।। सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध। बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 37

जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।। कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।। अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।। अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।। निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु। कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 38

नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।। बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।। अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।। रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।। सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।। नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस। तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार। समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 39

रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।। लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।। करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।। प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।। गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।। घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव। गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 40

लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।। देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।। अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।। उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।। तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।। चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर। कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 41

कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।। बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।। देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।। कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।। निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धरि कुधर खंड प्रचंड कर्कट भालु गढ़ पर डारहीं। झपटहिं चरन गहि पटकि महि भजि चलत बहुरि पचारहीं।। अति तरल तरुन प्रताप तरपहिं तमकि गढ़ चढ़ि चढ़ि गए। कपि भालु चढ़ि मंदिरन्ह जहँ तहँ राम जसु गावत भए।।
Chhand
अर्थ / Meaning
एकु एकु निसिचर गहि पुनि कपि चले पराइ। ऊपर आपु हेठ भट गिरहिं धरनि पर आइ।।41।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 42

राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।। चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।। हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।। निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।। सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।। सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि। ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 43

भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।। कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।। मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।। कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।। दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल। रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 44

जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।। रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।। नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।। पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।। काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड। रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 45

महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।। कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।। उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।। अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।। लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत। कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 46

प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।। राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।। जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।। द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।। सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।। अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार। एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 47

सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।। समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।। भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।। हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।। गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ। गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 48

निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।। राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।। आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।। बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।। बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान। जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध। सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 49

परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।। ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।। तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।। कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।। करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।। बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ढाहे महीधर सिखर कोटिन्ह बिबिध बिधि गोला चले। घहरात जिमि पबिपात गर्जत जनु प्रलय के बादले।। मर्कट बिकट भट जुटत कटत न लटत तन जर्जर भए। गहि सैल तेहि गढ़ पर चलावहिं जहँ सो तहँ निसिचर हए।।
Chhand
अर्थ / Meaning
मेघनाद सुनि श्रवन अस गढ़ु पुनि छेंका आइ। उतर्यो बीर दुर्ग तें सन्मुख चल्यो बजाइ।।49।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 50

कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।। कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।। अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।। जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।। सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर। सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 51

देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।। महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।। बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।। अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।। जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट। ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 52

नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।। नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।। बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।। कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।। कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ। लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 53

छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।। इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।। भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।। मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।। देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ। जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 54

घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।। लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।। क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।। रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।। मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ। जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 55

सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।। सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।। संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।। तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।। धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन। कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 56

राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।। उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।। देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।। नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।। काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार। राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 57

अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।। मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।। जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।। इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।। सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान। मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 58

कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।। मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।। कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।। राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।। गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि। बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 59

परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।। सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।। मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।। जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।। सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल। प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 60

तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।। कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।। जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।। चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।। राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत। अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार। मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 61

उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।। अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।। मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।। जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।। अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।। अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।। बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।। निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।। उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।। उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर। आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।
Soratha
अर्थ / Meaning

दोहा 62

हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।। तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।। कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।। ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।। कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।। तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।। अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान। जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 63

भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।। अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।। अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।। नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।। स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक। रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 64

महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।। कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।। अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।। तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।। धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर। जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 65

बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।। नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।। लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।। मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।। पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।। चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव। काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 66

उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।। भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।। मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।। काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।। पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।। सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह। एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 67

कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।। कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।। मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।। मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।। देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन। मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 68

कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।। प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।। जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।। घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।। रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच। पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 69

कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।। भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।। आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।। तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।। बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस। महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 70

भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।। चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।। कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।। राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।। लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।। धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।। उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि। गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 71

सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।। बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।। तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।। धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।। तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।। करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।। बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संग्राम भूमि बिराज रघुपति अतुल बल कोसल धनी। श्रम बिंदु मुख राजीव लोचन अरुन तन सोनित कनी।। भुज जुगल फेरत सर सरासन भालु कपि चहु दिसि बने। कह दास तुलसी कहि न सक छबि सेष जेहि आनन घने।।
Chhand
अर्थ / Meaning
निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज धाम। गिरिजा ते नर मंदमति जे न भजहिं श्रीराम।।71।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 72

दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।। राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।। बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।। मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।। इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।। इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।। गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 73

सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।। डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।। धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।। अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।। मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।। पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।। नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास। सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 74

चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।। अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।। जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।। अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।। पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।। इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ। माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ। चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 75

मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।। तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।। मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।। सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।। तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।। जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।। प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।। जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत। अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 76

जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।। कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।। लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।। कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।। उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।। आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।। बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।। लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।। छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान। धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 77

बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।। तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।। जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।। सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।। नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि। नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 78

तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।। पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।। सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।। निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।। चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति गर्ब गनइ न सगुन असगुन स्त्रवहिं आयुध हाथ ते। भट गिरत रथ ते बाजि गज चिक्करत भाजहिं साथ ते।। गोमाय गीध कराल खर रव स्वान बोलहिं अति घने। जनु कालदूत उलूक बोलहिं बचन परम भयावने।।
Chhand
अर्थ / Meaning
ताहि कि संपति सगुन सुभ सपनेहुँ मन बिश्राम। भूत द्रोह रत मोहबस राम बिमुख रति काम।।78।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 79

चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।। बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।। बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।। चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।। पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।। केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।। हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धाए बिसाल कराल मर्कट भालु काल समान ते। मानहुँ सपच्छ उड़ाहिं भूधर बृंद नाना बान ते।। नख दसन सैल महाद्रुमायुध सबल संक न मानहीं। जय राम रावन मत्त गज मृगराज सुजसु बखानहीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
दुहु दिसि जय जयकार करि निज निज जोरी जानि। भिरे बीर इत रामहि उत रावनहि बखानि।।79।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 80

रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।। अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।। सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।। बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।। दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।। कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर। जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज। एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान। लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 81

सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।। हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।। एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।। उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।। बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
क्रुद्धे कृतांत समान कपि तन स्त्रवत सोनित राजहीं। मर्दहिं निसाचर कटक भट बलवंत घन जिमि गाजहीं।। मारहिं चपेटन्हि डाटि दातन्ह काटि लातन्ह मीजहीं। चिक्करहिं मर्कट भालु छल बल करहिं जेहिं खल छीजहीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
धरि गाल फारहिं उर बिदारहिं गल अँतावरि मेलहीं। प्रहलादपति जनु बिबिध तनु धरि समर अंगन खेलहीं।। धरु मारु काटु पछारु घोर गिरा गगन महि भरि रही। जय राम जो तृन ते कुलिस कर कुलिस ते कर तृन सही।।
Chhand
अर्थ / Meaning
निज दल बिचलत देखेसि बीस भुजाँ दस चाप। रथ चढ़ि चलेउ दसानन फिरहु फिरहु करि दाप।।81।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 82

धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।। गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।। चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।। चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।। तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संधानि धनु सर निकर छाड़ेसि उरग जिमि उड़ि लागहीं। रहे पूरि सर धरनी गगन दिसि बिदसि कहँ कपि भागहीं।। भयो अति कोलाहल बिकल कपि दल भालु बोलहिं आतुरे। रघुबीर करुना सिंधु आरत बंधु जन रच्छक हरे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
निज दल बिकल देखि कटि कसि निषंग धनु हाथ। लछिमन चले क्रुद्ध होइ नाइ राम पद माथ।।82।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 83

रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।। खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।। कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।। सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।। उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो ब्रह्म दत्त प्रचंड सक्ति अनंत उर लागी सही। पर्यो बीर बिकल उठाव दसमुख अतुल बल महिमा रही।। ब्रह्मांड भवन बिराज जाकें एक सिर जिमि रज कनी। तेहि चह उठावन मूढ़ रावन जान नहिं त्रिभुअन धनी।।
Chhand
अर्थ / Meaning
देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर। आवत कपिहि हन्यो तेहिं मुष्टि प्रहार प्रघोर।।83।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 84

जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।। मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।। धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।। कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।। पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आतुर बहोरि बिभंजि स्यंदन सूत हति ब्याकुल कियो। गिर् यो धरनि दसकंधर बिकलतर बान सत बेध्यो हियो।। सारथी दूसर घालि रथ तेहि तुरत लंका लै गयो। रघुबीर बंधु प्रताप पुंज बहोरि प्रभु चरनन्हि नयो।।
Chhand
अर्थ / Meaning
उहाँ दसानन जागि करि करै लाग कछु जग्य। राम बिरोध बिजय चह सठ हठ बस अति अग्य।।84।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 85

इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।। नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।। प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।। जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।। अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नहिं चितव जब करि कोप कपि गहि दसन लातन्ह मारहीं। धरि केस नारि निकारि बाहेर तेऽतिदीन पुकारहीं।। तब उठेउ क्रुद्ध कृतांत सम गहि चरन बानर डारई। एहि बीच कपिन्ह बिधंस कृत मख देखि मन महुँ हारई।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जग्य बिधंसि कुसल कपि आए रघुपति पास। चलेउ निसाचर क्रुर्द्ध होइ त्यागि जिवन कै आस।।85।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 86

चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।। भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।। प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।। अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना। जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।। कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सारंग कर सुंदर निषंग सिलीमुखाकर कटि कस्यो। भुजदंड पीन मनोहरायत उर धरासुर पद लस्यो।। कह दास तुलसी जबहिं प्रभु सर चाप कर फेरन लगे। ब्रह्मांड दिग्गज कमठ अहि महि सिंधु भूधर डगमगे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सोभा देखि हरषि सुर बरषहिं सुमन अपार। जय जय जय करुनानिधि छबि बल गुन आगार।।86।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 87

एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी। देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।। गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।। उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।। रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।। स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कादर भयंकर रुधिर सरिता चली परम अपावनी। दोउ कूल दल रथ रेत चक्र अबर्त बहति भयावनी।। जल जंतुगज पदचर तुरग खर बिबिध बाहन को गने। सर सक्ति तोमर सर्प चाप तरंग चर्म कमठ घने।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बीर परहिं जनु तीर तरु मज्जा बहु बह फेन। कादर देखि डरहिं तहँ सुभटन्ह के मन चेन।।87।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 88

मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।। काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।। कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।। बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।। भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।। कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बोल्लहिं जो जय जय मुंड रुंड प्रचंड सिर बिनु धावहीं। खप्परिन्ह खग्ग अलुज्झि जुज्झहिं सुभट भटन्ह ढहावहीं।। बानर निसाचर निकर मर्दहिं राम बल दर्पित भए। संग्राम अंगन सुभट सोवहिं राम सर निकरन्हि हए।।
Chhand
अर्थ / Meaning
रावन हृदयँ बिचारा भा निसिचर संघार। मैं अकेल कपि भालु बहु माया करौं अपार।।88।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 89

देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।। सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।। चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।। सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।। देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु राम लछिमन देखि मर्कट भालु मन अति अपडरे। जनु चित्र लिखित समेत लछिमन जहँ सो तहँ चितवहिं खरे।। निज सेन चकित बिलोकि हँसि सर चाप सजि कोसल धनी। माया हरी हरि निमिष महुँ हरषी सकल मर्कट अनी।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बहुरि राम सब तन चितइ बोले बचन गँभीर। द्वंदजुद्ध देखहु सकल श्रमित भए अति बीर।।89।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 90

अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।। तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।। रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।। निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।। आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।। सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जनि जल्पना करि सुजसु नासहि नीति सुनहि करहि छमा। संसार महँ पूरुष त्रिबिध पाटल रसाल पनस समा।। एक सुमनप्रद एक सुमन फल एक फलइ केवल लागहीं। एक कहहिं कहहिं करहिं अपर एक करहिं कहत न बागहीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
राम बचन सुनि बिहँसा मोहि सिखावत ग्यान। बयरु करत नहिं तब डरे अब लागे प्रिय प्रान।।90।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 91

कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।। नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।। छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।। निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।। राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भए क्रुद्ध जुद्ध बिरुद्ध रघुपति त्रोन सायक कसमसे। कोदंड धुनि अति चंड सुनि मनुजाद सब मारुत ग्रसे।। मँदोदरी उर कंप कंपति कमठ भू भूधर त्रसे। चिक्करहिं दिग्गज दसन गहि महि देखि कौतुक सुर हँसे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तानेउ चाप श्रवन लगि छाँड़े बिसिख कराल। राम मारगन गन चले लहलहात जनु ब्याल।।91।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 92

चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।। रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।। बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।। तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।। दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।। तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।। प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।। रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जनु राहु केतु अनेक नभ पथ स्त्रवत सोनित धावहीं। रघुबीर तीर प्रचंड लागहिं भूमि गिरन न पावहीं।। एक एक सर सिर निकर छेदे नभ उड़त इमि सोहहीं। जनु कोपि दिनकर कर निकर जहँ तहँ बिधुंतुद पोहहीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जिमि जिमि प्रभु हर तासु सिर तिमि तिमि होहिं अपार। सेवत बिषय बिबर्ध जिमि नित नित नूतन मार।।92।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 93

दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।। गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।। दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।। सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।। कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कहँ रामु कहि सिर निकर धाए देखि मर्कट भजि चले। संधानि धनु रघुबंसमनि हँसि सरन्हि सिर बेधे भले।। सिर मालिका कर कालिका गहि बृंद बृंदन्हि बहु मिलीं। करि रुधिर सरि मज्जनु मनहुँ संग्राम बट पूजन चलीं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
पुनि दसकंठ क्रुद्ध होइ छाँड़ी सक्ति प्रचंड। चली बिभीषन सन्मुख मनहुँ काल कर दंड।।93।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 94

आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।। तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।। देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।। सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।। राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर् यो। दस बदन सोनित स्त्रवत पुनि संभारि धायो रिस भर् यो।। द्वौ भिरे अतिबल मल्लजुद्ध बिरुद्ध एकु एकहि हनै। रघुबीर बल दर्पित बिभीषनु घालि नहिं ता कहुँ गनै।।
Chhand
अर्थ / Meaning
उमा बिभीषनु रावनहि सन्मुख चितव कि काउ। सो अब भिरत काल ज्यों श्रीरघुबीर प्रभाउ।।94।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 95

देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।। रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।। पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।। लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।। बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संभारि श्रीरघुबीर धीर पचारि कपि रावनु हन्यो। महि परत पुनि उठि लरत देवन्ह जुगल कहुँ जय जय भन्यो।। हनुमंत संकट देखि मर्कट भालु क्रोधातुर चले। रन मत्त रावन सकल सुभट प्रचंड भुज बल दलमले।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तब रघुबीर पचारे धाए कीस प्रचंड। कपि बल प्रबल देखि तेहिं कीन्ह प्रगट पाषंड।।95।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 96

अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।। रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।। भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।। डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।। रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जाना प्रताप ते रहे निर्भय कपिन्ह रिपु माने फुरे। चले बिचलि मर्कट भालु सकल कृपाल पाहि भयातुरे।। हनुमंत अंगद नील नल अतिबल लरत रन बाँकुरे। मर्दहिं दसानन कोटि कोटिन्ह कपट भू भट अंकुरे।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सुर बानर देखे बिकल हँस्यो कोसलाधीस। सजि सारंग एक सर हते सकल दससीस।।96।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 97

प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।। रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।। प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।। सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।। देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
गहि भूमि पार् यो लात मार् यो बालिसुत प्रभु पहिं गयो। संभारि उठि दसकंठ घोर कठोर रव गर्जत भयो।। करि दाप चाप चढ़ाइ दस संधानि सर बहु बरषई। किए सकल भट घायल भयाकुल देखि निज बल हरषई।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तब रघुपति रावन के सीस भुजा सर चाप। काटे बहुत बढ़े पुनि जिमि तीरथ कर पाप। 97।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 98

सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।। मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।। बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।। तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।। गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।। पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।। मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।। भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उर लात घात प्रचंड लागत बिकल रथ ते महि परा। गहि भालु बीसहुँ कर मनहुँ कमलन्हि बसे निसि मधुकरा।। मुरुछित बिलोकि बहोरि पद हति भालुपति प्रभु पहिं गयौ। निसि जानि स्यंदन घालि तेहि तब सूत जतनु करत भयो।।
Chhand
अर्थ / Meaning
मुरुछा बिगत भालु कपि सब आए प्रभु पास। निसिचर सकल रावनहि घेरि रहे अति त्रास।।98।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 99

तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।। सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।। होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।। मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।। जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।। ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।। कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
एहि के हृदयँ बस जानकी जानकी उर मम बास है। मम उदर भुअन अनेक लागत बान सब कर नास है।। सुनि बचन हरष बिषाद मन अति देखि पुनि त्रिजटाँ कहा। अब मरिहि रिपु एहि बिधि सुनहि सुंदरि तजहि संसय महा।।
Chhand
अर्थ / Meaning
काटत सिर होइहि बिकल छुटि जाइहि तव ध्यान। तब रावनहि हृदय महुँ मरिहहिं रामु सुजान।।99।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 100

अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।। राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।। करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।। सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।। सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।। सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धाए जो मर्कट बिकट भालु कराल कर भूधर धरा। अति कोप करहिं प्रहार मारत भजि चले रजनीचरा।। बिचलाइ दल बलवंत कीसन्ह घेरि पुनि रावनु लियो। चहुँ दिसि चपेटन्हि मारि नखन्हि बिदारि तनु ब्याकुल कियो।।
Chhand
अर्थ / Meaning
देखि महा मर्कट प्रबल रावन कीन्ह बिचार। अंतरहित होइ निमिष महुँ कृत माया बिस्तार।।100।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 101

जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।। बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।। जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।। करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।। मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।। जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।। भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।। लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।। हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।। एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।
Chhand
अर्थ / Meaning
प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।। तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।। मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।। दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।
Chhand
अर्थ / Meaning
तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही। जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।। प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी। रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे। सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।। श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं। सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
ताके गुन गन कछु कहे जड़मति तुलसीदास। जिमि निज बल अनुरूप ते माछी उड़इ अकास।।101(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
काटे सिर भुज बार बहु मरत न भट लंकेस। प्रभु क्रीड़त सुर सिद्ध मुनि ब्याकुल देखि कलेस।।101(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 102

काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।। मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।। सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।। सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।। बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।। मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रतिमा रुदहिं पबिपात नभ अति बात बह डोलति मही। बरषहिं बलाहक रुधिर कच रज असुभ अति सक को कही।। उतपात अमित बिलोकि नभ सुर बिकल बोलहि जय जए। सुर सभय जानि कृपाल रघुपति चाप सर जोरत भए।।
Chhand
अर्थ / Meaning
खैचि सरासन श्रवन लगि छाड़े सर एकतीस। रघुनायक सायक चले मानहुँ काल फनीस।।102।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 103

सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।। लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।। गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।। धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।। प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।। जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जय कृपा कंद मुकंद द्वंद हरन सरन सुखप्रद प्रभो। खल दल बिदारन परम कारन कारुनीक सदा बिभो।। सुर सुमन बरषहिं हरष संकुल बाज दुंदुभि गहगही। संग्राम अंगन राम अंग अनंग बहु सोभा लही।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सिर जटा मुकुट प्रसून बिच बिच अति मनोहर राजहीं। जनु नीलगिरि पर तड़ित पटल समेत उड़ुगन भ्राजहीं।। भुजदंड सर कोदंड फेरत रुधिर कन तन अति बने। जनु रायमुनीं तमाल पर बैठीं बिपुल सुख आपने।।
Chhand
अर्थ / Meaning
कृपादृष्टि करि प्रभु अभय किए सुर बृंद। भालु कीस सब हरषे जय सुख धाम मुकंद।।103।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 104

पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।। जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।। उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।। सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।। भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।। राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।। अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जान्यो मनुज करि दनुज कानन दहन पावक हरि स्वयं। जेहि नमत सिव ब्रह्मादि सुर पिय भजेहु नहिं करुनामयं।। आजन्म ते परद्रोह रत पापौघमय तव तनु अयं। तुम्हहू दियो निज धाम राम नमामि ब्रह्म निरामयं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
अहह नाथ रघुनाथ सम कृपासिंधु नहिं आन। जोगि बृंद दुर्लभ गति तोहि दीन्हि भगवान।।104।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 105

मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।। अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।। रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।। लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।। कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मंदोदरी आदि सब देइ तिलांजलि ताहि। भवन गई रघुपति गुन गन बरनत मन माहि।।105।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 106

आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।। तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।। पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।। सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।। तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
किए सुखी कहि बानी सुधा सम बल तुम्हारें रिपु हयो। पायो बिभीषन राज तिहुँ पुर जसु तुम्हारो नित नयो।। मोहि सहित सुभ कीरति तुम्हारी परम प्रीति जो गाइहैं। संसार सिंधु अपार पार प्रयास बिनु नर पाइहैं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
प्रभु के बचन श्रवन सुनि नहिं अघाहिं कपि पुंज। बार बार सिर नावहिं गहहिं सकल पद कंज।।106।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 107

पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।। समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।। बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।। कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।। अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अति हरष मन तन पुलक लोचन सजल कह पुनि पुनि रमा। का देउँ तोहि त्रेलोक महुँ कपि किमपि नहिं बानी समा।। सुनु मातु मैं पायो अखिल जग राजु आजु न संसयं। रन जीति रिपुदल बंधु जुत पस्यामि राममनामयं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सुनु सुत सदगुन सकल तव हृदयँ बसहुँ हनुमंत। सानुकूल कोसलपति रहहुँ समेत अनंत।।107।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 108

अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।। तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।। मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।। बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।। ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।। देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।। देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।। सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तेहि कारन करुनानिधि कहे कछुक दुर्बाद। सुनत जातुधानीं सब लागीं करै बिषाद।।108।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 109

प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।। लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।। लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।। पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।। तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
श्रीखंड सम पावक प्रबेस कियो सुमिरि प्रभु मैथिली। जय कोसलेस महेस बंदित चरन रति अति निर्मली।। प्रतिबिंब अरु लौकिक कलंक प्रचंड पावक महुँ जरे। प्रभु चरित काहुँ न लखे नभ सुर सिद्ध मुनि देखहिं खरे।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
धरि रूप पावक पानि गहि श्री सत्य श्रुति जग बिदित जो। जिमि छीरसागर इंदिरा रामहि समर्पी आनि सो।। सो राम बाम बिभाग राजति रुचिर अति सोभा भली। नव नील नीरज निकट मानहुँ कनक पंकज की कली।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बरषहिं सुमन हरषि सुन बाजहिं गगन निसान। गावहिं किंनर सुरबधू नाचहिं चढ़ीं बिमान।।109(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार। देखि भालु कपि हरषे जय रघुपति सुख सार।।109(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 110

तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।। आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।। बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।। अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।। जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।। अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।। भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
करि बिनती सुर सिद्ध सब रहे जहँ तहँ कर जोरि। अति सप्रेम तन पुलकि बिधि अस्तुति करत बहोरि।।110।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 111

जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।। भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।। तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।। जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।। अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।। अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।। रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।
Chhand
अर्थ / Meaning
गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।। भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।। बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।। भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।। सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।। अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।। इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।
Chhand
अर्थ / Meaning
कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।। धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।। अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।। जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।
Chhand
अर्थ / Meaning
खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।। नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बिनय कीन्हि चतुरानन प्रेम पुलक अति गात। सोभासिंधु बिलोकत लोचन नहीं अघात।।111।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 112

तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।। अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।। सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।। ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।। बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अनुज जानकी सहित प्रभु कुसल कोसलाधीस। सोभा देखि हरषि मन अस्तुति कर सुर ईस।।112।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 113

जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।। धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।। जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।। यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।। जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।। लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।। मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।
Chhand
अर्थ / Meaning
परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।। अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।। मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।। अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।
Chhand
अर्थ / Meaning
कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।। मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।। बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।। मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।
Chhand
अर्थ / Meaning
दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं। सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।। सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं। ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।
Chhand
अर्थ / Meaning
अब करि कृपा बिलोकि मोहि आयसु देहु कृपाल। काह करौं सुनि प्रिय बचन बोले दीनदयाल।।113।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 114

सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।। मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।। प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।। सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।। सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।। खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुमन बरषि सब सुर चले चढ़ि चढ़ि रुचिर बिमान। देखि सुअवसरु प्रभु पहिं आयउ संभु सुजान।।114(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
परम प्रीति कर जोरि जुग नलिन नयन भरि बारि। पुलकित तन गदगद गिराँ बिनय करत त्रिपुरारि।।114(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 115

मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।। मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।। अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।। काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।। भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।। स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।। अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।
Chhand
अर्थ / Meaning
मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।
Chhand
अर्थ / Meaning
नाथ जबहिं कोसलपुरीं होइहि तिलक तुम्हार। कृपासिंधु मैं आउब देखन चरित उदार।।115।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 116

करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।। नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।। दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।। देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।। सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तोर कोस गृह मोर सब सत्य बचन सुनु भ्रात। भरत दसा सुमिरत मोहि निमिष कल्प सम जात।।116(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
तापस बेष गात कृस जपत निरंतर मोहि। देखौं बेगि सो जतनु करु सखा निहोरउँ तोहि।।116(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
बीतें अवधि जाउँ जौं जिअत न पावउँ बीर। सुमिरत अनुज प्रीति प्रभु पुनि पुनि पुलक सरीर।।116(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning
करेहु कल्प भरि राजु तुम्ह मोहि सुमिरेहु मन माहिं। पुनि मम धाम पाइहहु जहाँ संत सब जाहिं।।116(घ)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 117

सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।। बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।। लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।। नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।। हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि जेहि ध्यान न पावहिं नेति नेति कह बेद। कृपासिंधु सोइ कपिन्ह सन करत अनेक बिनोद।।117(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
उमा जोग जप दान तप नाना मख ब्रत नेम। राम कृपा नहि करहिं तसि जसि निष्केवल प्रेम।।117(ख)।।
Doha
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दोहा 118

भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।। नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।। तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।। सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।। दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।। देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभु प्रेरित कपि भालु सब राम रूप उर राखि। हरष बिषाद सहित चले बिनय बिबिध बिधि भाषि।।118(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कपिपति नील रीछपति अंगद नल हनुमान। सहित बिभीषन अपर जे जूथप कपि बलवान।।118(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning
कहि न सकहिं कछु प्रेम बस भरि भरि लोचन बारि। सन्मुख चितवहिं राम तन नयन निमेष निवारि।।118(ग)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 119

अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।। मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।। सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।। रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।। सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।। हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम। सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम। सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 120

तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।। कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।। तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।। पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।। देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सीता सहित अवध कहुँ कीन्ह कृपाल प्रनाम। सजल नयन तन पुलकित पुनि पुनि हरषित राम।।120(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
पुनि प्रभु आइ त्रिबेनीं हरषित मज्जनु कीन्ह। कपिन्ह सहित बिप्रन्ह कहुँ दान बिबिध बिधि दीन्ह।।120(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning

दोहा 121

प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।। भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।। नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।। इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।। तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।। सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।। प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।
Chaupai
अर्थ / Meaning
लियो हृदयँ लाइ कृपा निधान सुजान रायँ रमापती। बैठारि परम समीप बूझी कुसल सो कर बीनती। अब कुसल पद पंकज बिलोकि बिरंचि संकर सेब्य जे। सुख धाम पूरनकाम राम नमामि राम नमामि ते।।1।।
Chhand
अर्थ / Meaning
सब भाँति अधम निषाद सो हरि भरत ज्यों उर लाइयो। मतिमंद तुलसीदास सो प्रभु मोह बस बिसराइयो।। यह रावनारि चरित्र पावन राम पद रतिप्रद सदा। कामादिहर बिग्यानकर सुर सिद्ध मुनि गावहिं मुदा।।2।।
Chhand
अर्थ / Meaning
समर बिजय रघुबीर के चरित जे सुनहिं सुजान। बिजय बिबेक बिभूति नित तिन्हहि देहिं भगवान।।121(क)।।
Doha
अर्थ / Meaning
यह कलिकाल मलायतन मन करि देखु बिचार। श्रीरघुनाथ नाम तजि नाहिन आन अधार।।121(ख)।।
Doha
अर्थ / Meaning