अयोध्याकाण्ड
दोहा 106
5 पद
Chaupai1 / 5
को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।।
अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
प्रयाग-प्रभाव कौन कह सके? कलुष (पाप)-पुंज (समूह)-कुंजर (हाथी) — (पर) मृगराज (सिंह)। ऐसा सुहावना तीर्थपति (तीर्थराज प्रयाग) देखकर — सुखसागर रघुवर ने सुख पाया।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
ko kahi sakai prayāga prabhāū. kaluṣa puṃja kuṃjara mṛgarāū.
asa tīrthapati dekhi suhāvā.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Who can describe the glory of Prayag? It is a lion against the elephant-herd of sins. Seeing this beautiful lord of pilgrimages.
Chaupai2 / 5
कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई। श्रीमुख तीरथराज बड़ाई।।
करि प्रनामु देखत बन बागा। कहत महातम अति अनुरागा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सीता-लक्ष्मण-सखा (गुह) को सुनाकर कहा — श्रीमुख (से) तीर्थराज-बड़ाई (महिमा)। प्रणाम करके — वन-बाग देखते। महात्म्य (महिमा) अत्यन्त अनुराग (प्रेम) से कहते।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kahi siya lakhanahi sakhahi sunāī. śrīmukha tīrtharāja baḍāī.
kari pranāmu dekhata bana bāgā.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Telling Sita, Lakshmana, and His friend, Rama extolled Prayag's greatness. Bowing, He gazed upon the beautiful gardens.
Chaupai3 / 5
एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।।
मुदित नहाइ कीन्हि सिव सेवा। पुजि जथाबिधि तीरथ देवा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
इस प्रकार आकर बेणी (त्रिवेणी) देखी — स्मरण करते ही सकल सुमंगल देने वाली। मुदित (प्रसन्न) नहाकर शिव-सेवा की। यथाविधि तीर्थ-देवता पूजे।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
ehi bidhi āi bilokī benī. sumirata sakala sumaṅgala denī.
mudita nahāi kīnhi siva seva
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
In this way, He came and beheld the sacred confluence — remembering which bestows all blessings. He joyfully bathed and worshipped Lord Shiva.
Chaupai4 / 5
तब प्रभु भरद्वाज पहिं आए। करत दंडवत मुनि उर लाए।।
मुनि मन मोद न कछु कहि जाइ। ब्रह्मानंद रासि जनु पाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
तब प्रभु भरद्वाज (मुनि) के पास आए — दण्डवत करते मुनि ने उर (हृदय) से लगाया। मुनि-मन मोद (आनन्द) — कुछ कहा नहीं जाता। मानो ब्रह्मानन्द-राशि पाई।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
taba prabhu bharadvāja pahiṃ āe. karata daṇḍavata muni ura lāe.
muni mana moda na kachu kahi jāi
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then the Lord came to Bharadwaj. As He prostrated, the sage pressed Him to his heart. The sage's joy was beyond words.
Doha5 / 5
दीन्हि असीस मुनीस उर अति अनंदु अस जानि।
लोचन गोचर सुकृत फल मनहुँ किए बिधि आनि।।106।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
मुनीश (मुनीश्वर) ने आशीष दी — उर (हृदय) में अत्यन्त आनन्द — ऐसा जानकर। मानो लोचन (नेत्र)-गोचर (दृश्य) सुकृत (पुण्य)-फल — विधि (ब्रह्मा) ने लाकर बनाया।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
dīnhi asīsa munīsa ura ati anaṃdu asa jāni.
locana gocara sukṛta phala manahūṃ kie bidhi ā
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The great sage gave His blessing, knowing the supreme joy in his heart — as if the Creator had brought before his eyes the visible fruit of all his good deeds.