अयोध्याकाण्ड
दोहा 119
4 पद
Chaupai1 / 4
फिरत नारि नर अति पछिताहीं। देअहि दोषु देहिं मन माहीं।।
सहित बिषाद परसपर कहहीं। बिधि करतब उलटे सब अहहीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
लौटते नर-नारी अत्यन्त पछताते — दैव (भाग्य) को दोष देते मन में। सहित विषाद (दुख) परस्पर कहते — (कहते) विधि (भाग्य) के करतब (कार्य) सब उलटे हैं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
phirata nāri nara ati pachitāhīṃ. deahi doṣu dehiṃ mana māhīṃ.
sahita biṣāda parasapara kahaha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The men and women turned back, deeply regretting. They blamed Fate in their hearts.
Chaupai2 / 4
निपट निरंकुस निठुर निसंकू। जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू।।
रूख कलपतरु सागरु खारा। तेहिं पठए बन राजकुमारा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लोग कहते) निपट (अत्यन्त) निरंकुश, निठुर (क्रूर), निशंक (निडर)। जिसने शशि (चन्द्रमा) सरुज (रोगी) सकलंक (दागदार) किया। रूख (निर्जीव) कल्पतरु (कल्पवृक्ष), सागर खारा (बनाया)। उसी ने राजकुमारों को वन भेजा।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
nipaṭa niraṃkusa niṭhura nisaṃkū. jehiṃ sasi kīnha saruja sakalaṃkū.
rūkha kalpataru sāgaru kha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Fate is utterly ruthless, heartless, and shameless — He who made the moon diseased and spotted. He made the wish-fulfilling tree lifeless, the ocean salty.'
Chaupai3 / 4
जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू।।
ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना। रचे बादि बिधि बाहन नाना।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लोग कहते) यदि इन्हें वनवास दिया — तो व्यर्थ विधि (ब्रह्मा) ने भोग-विलास बनाए। ये मार्ग पर पदत्राण (जूते) बिना विचरते — व्यर्थ विधि ने नाना वाहन रचे।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
jauṃ pe inhahi dīnha banabāsū. kīnha bādi bidhi bhoga bilāsū.
e bicarahiṃ maga binu
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'If He has given them exile in the forest, then all the pleasures He created are wasted. They walk the path barefoot without shoes.'
Chaupai4 / 4
ए महि परहिं डासि कुस पाता। सुभग सेज कत सृजत बिधाता।।
तरुबर बास इन्हहि बिधि दीन्हा। धवल धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लोग कहते) ये मही (पृथ्वी) पर कुश (घास)-पात (पत्ते) बिछाकर सोते — सुभग (सुन्दर) सेज (शय्या) विधाता क्यों सृजता? तरुवर (वृक्ष)-वास इन्हें विधि ने दिया — धवल (सफेद) धाम (महल) रचि-रचि श्रम किया (व्यर्थ)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
e mahi parahiṃ ḍāsi kusa pātā. subhaga seja kata sṛjata bidhātā.
tarubara bāsa inhahi bidhi
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'They sleep on the ground on grass and leaves — why then did the Creator make fine beds? Their home is the forest — why did He create palaces?'