अयोध्याकाण्ड
दोहा 241
5 पद
Chaupai1 / 5
मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी।।
परम पेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
मिलन की प्रीति कैसे वर्णन करें — कवि-कुल को अगम्य — कर्म-मन-वाणी (से)। परम प्रेम से पूर्ण दोनों भाई — मन-बुद्धि-चित्त (= सब) विलीन।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
milani prīti kimi jāi bakhānī. kabikula agama karama mana bānī.
parama pema pūrana dou bhāī.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
How can their loving reunion be described? It is beyond the reach of poet-clans, deeds, mind, and speech. Both brothers were filled with supreme love.
Chaupai2 / 5
कहहु सुपेम प्रगट को करई। केहि छाया कबि मति अनुसरई।।
कबिहि अरथ आखर बलु साँचा। अनुहरि ताल गतिहि नटु नाचा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कहो, सुप्रेम (श्रेष्ठ प्रेम) प्रकट कौन करे? किसकी छाया (= उपमा) कवि-मति अनुसरण करे? कवि को अर्थ-अक्षर (= शब्दों) का बल सच्चा (= पर्याप्त) — (पर) अनुकरण करते (प्रेम-) तन्तु (= तार) टूटता।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kahahu supema pragaṭa ko kareī. kehi chāyā kabi mati anusareī.
kabihi aratha ākhara balu sāṃcā
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Who can manifest such pure love? What shadow can the poet's mind follow? The poet's true strength lies in meaning and words.
Chaupai3 / 5
अगम सनेह भरत रघुबर को। जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को।।
सो मैं कुमति कहौं केहि भाँती। बाज सुराग कि गाँडर ताँती।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
अगम (= अवर्णनीय) स्नेह — भरत और रघुवर का — जहाँ ब्रह्मा-विष्णु-शिव का मन भी नहीं जाता। वह मैं कुमति (= अल्पबुद्धि) कैसे कहूँ — बात (= प्रेम) (वाणी से) परे।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
agama saneha bharata raghubara ko. jahaṃ na jāi manu bidhi hari hara ko.
so maiṃ kumati kahauṃ keha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The love between Bharata and Raghubir is unfathomable — where even the minds of Brahma, Vishnu, and Shiva cannot reach. How then can I, of dull wit, describe it?
Chaupai4 / 5
मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की। सुरगन सभय धकधकी धरकी।।
समुझाए सुरगुरु जड़ जागे। बरषि प्रसून प्रसंसन लागे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
भरत-रघुवर की मिलनी देखकर — देवगण भयभीत, धकधकी (= घबराहट) से काँपे। सुरगुरु (बृहस्पति) ने समझाया — (तब) जड़ (= मूर्ख देवता) जागे — फूल बरसाकर (हर्ष व्यक्त किया)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
milani biloki bharata raghubara kī. suragana sabhaya dhakdhakī dharakī.
samujhāe suraguru jaḍa jāge.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Witnessing the reunion of Bharata and Raghubir, the frightened gods trembled. The divine Guru (Brihaspati) consoled them and they came to their senses.
Doha5 / 5
मिलि सपेम रिपुसूदनहि केवटु भेंटेउ राम।
भूरि भायँ भेंटे भरत लछिमन करत प्रनाम।।241।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सप्रेम रिपुसूदन (शत्रुघ्न) से मिले — केवट (गुह) ने भी राम से भेंट की। भरत ने बहुत प्रेम से लक्ष्मण से भेंट की — लक्ष्मण प्रणाम करते।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
mili sapema ripusūdanahi kevaṭu bheṃṭeu rāma.
bhūri bhāyaṃ bheṃṭe bharata lacchimana karata pranāma
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Meeting Shatrughna with love, the boatman embraced Rama. Bharata joyfully embraced Lakshmana with great affection as Lakshmana bowed.