अयोध्याकाण्ड

दोहा 243

5 पद

Chaupai1 / 5
सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।। चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला।।
हिन्दी अर्थ देखें
शीलसिन्धु (= शील के सागर राम) ने गुरु (वसिष्ठ) का आगमन सुनकर — सीता-समीप रिपुदवन (शत्रुघ्न) को रखा। सवेग (शीघ्र) राम उस समय चले — धीर-धर्म-धुरन्धर (= स्तम्भ)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
sīlasiṃdhu suni gura āgavanū. siya samīpa rākhe ripudavanū. cale sabega rāmu tehi kālā.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The Ocean of virtue, hearing the Guru's arrival, left Shatrughna near Sita and rushed forth with all speed.
Chaupai2 / 5
गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।। मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
गुरु को देखकर अनुज (लक्ष्मण) सहित अनुरागे — दण्डवत् प्रणाम करने प्रभु लगे। मुनिवर दौड़कर हृदय से लगा लिया — प्रेम उमड़ा, (बोल न सके)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
gurahi dekhi sānuja anurāge. daṃḍa pranāma karana prabhu lāge. munibara dhāi lie ura lāī
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing the Guru, both brothers were filled with love and began to prostrate. The great sage rushed and embraced them.
Chaupai3 / 5
प्रेम पुलकि केवट कहि नामू। कीन्ह दूरि तें दंड प्रनामू।। रामसखा रिषि बरबस भेंटा। जनु महि लुठत सनेह समेटा।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रेम-पुलकित केवट (गुह) ने नाम कहकर — दूर से दण्डवत् प्रणाम किया। रामसखा (गुह) को ऋषि ने बलपूर्वक भेंटा — मानो (महान मिलन)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
prema pulaki kevaṭa kahi nāmū. kīnha dūri teṃ daṃḍa pranāmū. rāmasakhā riṣi barabasa bhe
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Thrilling with love, the boatman called out his name and prostrated from a distance. The sage forcibly embraced Rama's friend.
Chaupai4 / 5
रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।। एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं। बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं।।
हिन्दी अर्थ देखें
रघुपति-भक्ति — सुमंगल की जड़ — आकाश से सराहकर देवता फूल बरसाते। (कहते) इसके समान (नीच-कुल में जन्मा) कोई नहीं — (फिर भी) बड़े भाग्यशाली — प्रभु-कृपा से।
रोमन लिप्यंतरण देखें
raghupati bhagati sumaṃgala mūlā. nabha sarāhi sura barisahiṃ phūlā. ehi sama nipaṭa nīca kou nā
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Devotion to Raghupati is the root of all auspiciousness — the gods praised him and showered flowers. 'There is none as utterly lowly as this one.'
Doha5 / 5
जेहि लखि लखनहु तें अधिक मिले मुदित मुनिराउ। सो सीतापति भजन को प्रगट प्रताप प्रभाउ।।243।।
हिन्दी अर्थ देखें
जिसे देखकर लक्ष्मण से भी अधिक — प्रसन्न मुनिराज मिले — सो सीतापति-भजन का प्रकट प्रताप-प्रभाव (है)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
jehi lakhi lakhanahu teṃ adhika mile mudita munirāu. so sītāpati bhajana ko pragaṭa pratāpa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
He whom the sage met even more joyfully than he met Lakshmana — such is the manifest power of worshipping Sita's Lord.

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