अयोध्याकाण्ड
दोहा 77
5 पद
Chaupai1 / 5
सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।।
नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
नरनाह (राजा) बोल नहीं सकते — विकल (व्याकुल)। शोक-जनित (शोक से उत्पन्न) उर (हृदय) में दारुण (भयंकर) दाह (जलन)। अत्यन्त अनुराग (प्रेम) से पद (चरणों) पर सिर नवाकर — उठकर रघुवीर ने तब विदा माँगी।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
sakai na boli bikala naranāhū. soka janita ura dāruna dāhū.
nāi sīsu pada ati anurāgā. uṭhi raghu
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The king could not speak, overwhelmed as he was — the terrible burning of grief filled his heart. Bowing his head at His father's feet with great love, Rama rose.
Chaupai2 / 5
पितु असीस आयसु मोहि दीजै। हरष समय बिसमउ कत कीजै।।
तात किएँ प्रिय प्रेम प्रमादू। जसु जग जाइ होइ अपबादू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(श्रीराम ने कहा) पिता! आशीष-आज्ञा मुझे दो। हर्ष-समय — विस्मय (दुख) क्यों करें? तात! प्रिय (प्रियजनों) — प्रेम-प्रमाद (प्रेम का अतिरेक) करने से — यश जाता, जग (संसार) में अपवाद (निन्दा) होता।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
pitu asīsa āyasu mohi dījai. haraṣa samaya bisamau kata kījai.
tāta kieṃ priya prema pramādū.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Father, give me your blessing and command. Why be distressed at a time of joy? Dear father, love can cause lapses in judgment.'
Chaupai3 / 5
सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।।
सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
स्नेहवश सुनकर नरनाह (राजा) उठे — बाँह पकड़कर रघुपति बैठाए। (कहा) सुनो, तात! तुम्हें मुनि कहते — राम चराचर (जड़-चेतन) नायक (स्वामी) हैं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
suni saneha basa uṭhi naranāhāṃ. baiṭhāre raghupati gahi bāhāṃ.
sunahu tāta tumha kahuṃ muni kaha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Hearing this, the king rose, overcome by love. Taking Raghupati by the arm, he seated Him: 'Hear me, son — sages say this.'
Chaupai4 / 5
सुभ अरु असुभ करम अनुहारी। ईस देइ फलु ह्दयँ बिचारी।।
करइ जो करम पाव फल सोई। निगम नीति असि कह सबु कोई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(दशरथ ने कहा) शुभ और अशुभ कर्म अनुसार — ईश (ईश्वर) हृदय में विचारकर फल देता। जो कर्म करता — वही फल पाता — निगम (वेद)-नीति ऐसी — सब कोई कहता।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
subha aru asubha karama anuhārī. īsa dei phalu hṛdayaṃ bicārī.
karai jo karama pāva phala soī. nigama
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'According to one's good or bad deeds, God gives the fruit, having weighed it in His heart. One reaps the fruit of one's own actions — so declare the Vedas.'
Doha5 / 5
औरु करै अपराधु कोउ और पाव फल भोगु।
अति बिचित्र भगवंत गति को जग जानै जोगु।।77।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(दशरथ ने कहा) और (कोई) करे अपराध — और (कोई) पाए फल-भोग। अत्यन्त विचित्र भगवान-गति (ईश्वर के मार्ग) — जग (संसार) में कौन जानने योग्य?
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
auru karai aparādhu kou aura pāva phala bhogu.
ati bicitra bhagavanta gati ko jaga jānai jogu.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
One person commits the offence and another reaps the consequence — how strange are the ways of God! Who in this world can know His ways?