बालकाण्ड
दोहा 103
6 पद
Chaupai1 / 6
तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई।।
आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना।।
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तुरन्त भवन आए पर्वतराज। सकल पर्वतों और सरोवरों को बुलाया। आदर-दान-विनती (से)।
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The mountain king quickly returned home and summoned all the mountains and lakes. With respect, gifts, and humble courtesy, Himavan bade farewell to them all.
Chaupai2 / 6
जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।।
जगत मातु पितु संभु भवानी। तेही सिंगारु न कहउँ बखानी।।
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जब शम्भु (शिव) कैलास आए — सब देवता अपने-अपने लोक चले गए। जगत के माता-पिता — शम्भु-भवानी — उनका श्रृंगार (विहार) बखानकर नहीं कहता।
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When Shambhu arrived at Kailasa, all the gods departed to their respective abodes. Shambhu and Bhavani are the father and mother of the universe — I shall not describe their conjugal bliss.
Chaupai3 / 6
करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।
हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।
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विविध प्रकार के भोग-विलास करते — गणों समेत कैलास में बसते। हर (शिव) और गिरिजा (पार्वती) का नित नया विहार — इस प्रकार बहुत काल बीत गया।
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They enjoyed pleasures of various kinds and dwelt at Kailasa with the attendants. Hara and Girija found ever-new delight each day; in this manner, a vast span of time passed.
Chaupai4 / 6
तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुर समर जेहिं मारा।।
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना।।
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तब षड्मुख (छह मुख वाले) कुमार (कार्तिकेय) का जन्म हुआ — जिन्होंने तारक असुर को संग्राम (युद्ध) में मारा। आगम, निगम (वेद), पुराणों में प्रसिद्ध — षण्मुख का जन्म सकल जग जाना।
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Then their six-faced son Kumara (Kartikeya) was born, who slew the demon Taraka in battle. His birth is renowned in the Agamas, Nigamas, and Puranas — the whole world knows of Shanmukha's birth.
Chhand5 / 6
जगु जान षन्मुख जन्मु कर्मु प्रतापु पुरुषारथु महा।
तेहि हेतु मैं बृषकेतु सुत कर चरित संछेपहिं कहा।।
यह उमा संगु बिबाहु जे नर नारि कहहिं जे गावहीं।
कल्यान काज बिबाह मंगल सर्बदा सुखु पावहीं।।
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जगत जानता है — षण्मुख का जन्म, कर्म, प्रताप और महान पुरुषार्थ। इसी कारण मैंने वृषकेतु (शिव) के पुत्र का चरित्र संक्षेप में कहा। यह उमा-संग (विवाह) — जो नर-नारी कहें, गाएँ — कल्याणकारी विवाह-मंगल — सर्वदा सुख पाएँ।
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The whole world knows of the birth, deeds, valor, and great heroism of Shanmukha. For that reason, I have briefly told the story of the son of the bull-bannered one. Those men and women who narrate or sing of this union and marriage of Uma shall always enjoy happiness, auspiciousness, and the blessings of a joyful wedding.
Doha6 / 6
चरित सिंधु गिरिजा रमन बेद न पावहिं पारु।
बरनै तुलसीदासु किमि अति मतिमंद गवाँरु।।103।।
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(तुलसीदास कहते हैं) गिरिजा-रमण (शिव) के चरित्र — समुद्र-समान — वेद भी पार नहीं पाते। अति मतिमन्द (मूढ़) गँवार तुलसीदास कैसे वर्णन करे?
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The exploits of Girija's lord are an ocean; even the Vedas cannot find its further shore. How then can the dull and ignorant Tulsidas describe them?