बालकाण्ड

दोहा 140

5 पद

Chaupai1 / 5
एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे।। कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीहरि के जन्म-कर्म — सुन्दर, सुखद, विचित्र, अनेक। कल्प-कल्प में प्रभु अवतरते — चारु (सुन्दर) चरित्र नाना विधि करते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
In this way, Hari's births and deeds are numerous, beautiful, blissful, and wonderfully varied. In each cosmic cycle, the Lord incarnates and performs charming deeds in diverse ways.
Chaupai2 / 5
तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।। बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।
हिन्दी अर्थ देखें
तब-तब मुनीश्वरों ने कथा गाई — परम पुनीत प्रबन्ध (ग्रन्थ) बनाए। विविध अनूप (अनुपम) प्रसंग बखाने — सुनकर सयाने (बुद्धिमान) आश्चर्य नहीं करते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Each time, the great sages have composed and sung these supremely holy narratives. They have described incomparable episodes of various kinds; the wise are not surprised to hear them.
Chaupai3 / 5
हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।। रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीहरि अनन्त — हरि-कथा अनन्त। सब सन्त बहु विधि कहते-सुनते। श्रीरामचन्द्र के सुहावने चरित्र — कोटि कल्प में भी गाए नहीं जाते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Hari is infinite and his stories are infinite; the saints tell and hear them in manifold ways. The delightful deeds of Ramachandra cannot be fully sung even in countless cosmic cycles.
Chaupai4 / 5
यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।। प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।
हिन्दी अर्थ देखें
(शिवजी ने कहा) यह प्रसंग मैंने कहा, भवानी! हरि-माया ज्ञानी मुनि को भी मोहित करती। प्रभु — कौतुकी (लीलाप्रिय), प्रणत (शरणागत) के हितकारी — सेवन सुलभ, सकल दुख हारी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'This episode I have told you, O Bhavani — how Hari's Maya deludes even wise sages. The Lord is playful, a benefactor of the suppliant, easy to serve, and the remover of all suffering.'
Doha5 / 5
सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।। अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुर, नर, मुनि — कोई नहीं जिसे प्रबल माया ने नहीं मोहा। ऐसा मन में विचारकर — महामाया-पति (श्रीहरि) को भजो।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'There is no god, man, or sage whom the mighty Maya has not deluded. Reflecting thus in your heart, worship the Lord of that great Maya.'

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