बालकाण्ड

दोहा 142

5 पद

Chaupai1 / 5
स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।। दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।
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(शिवजी ने कहा) स्वायम्भुव मनु और शतरूपा — जिनसे अनूप (अनुपम) नर-सृष्टि हुई। दम्पति का धर्म-आचरण श्रेष्ठ — अभी भी श्रुति (वेद) उनकी रीति गाते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Svayambhuva Manu and Shatarupa — from whom the matchless human creation arose — this couple practiced exemplary righteousness; even now the Vedas sing of their noble way of life.'
Chaupai2 / 5
नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।। लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।
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(शिवजी ने कहा) उनके पुत्र राजा उत्तानपाद — जिनके पुत्र ध्रुव — श्रीहरि के भक्त हुए। लघु (छोटे) पुत्र का नाम प्रियव्रत — जिनकी वेद-पुराण प्रशंसा करते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'King Uttanapada was their son, and Dhruva, the great devotee of Hari, was born as his son. Their younger son was named Priyavrata, whom the Vedas and Puranas praise.'
Chaupai3 / 5
देवहूति पुनि तासु कुमारी। जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी।। आदिदेव प्रभु दीनदयाला। जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला।।
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(शिवजी ने कहा) देवहूति — उनकी (मनु की) पुत्री — जो मुनि कर्दम की प्रिय पत्नी। आदिदेव, प्रभु, दीनदयालु — जिन्होंने (देवहूति के) जठर (गर्भ) में कपिल कृपालु को धारण किया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Devahuti was his daughter, the beloved wife of the sage Kardama. The primeval, compassionate Lord — the merciful Kapila — was borne in her womb.'
Chaupai4 / 5
सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना। तत्व बिचार निपुन भगवाना।। तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला। प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला।।
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(शिवजी ने कहा) जिन्होंने (कपिल ने) सांख्य-शास्त्र प्रकट करके बखाना — तत्त्व-विचार में निपुण भगवान। उन मनु ने बहुत काल तक राज किया — प्रभु की आज्ञा सब विधि से प्रतिपाला (निभाई)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'He who revealed the Sankhya philosophy, the Lord who is supremely skilled in the analysis of truth. That Manu ruled for a very long time, upholding the Lord's commands in every way.'
Soratha5 / 5
होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन। हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु।।142।।
हिन्दी अर्थ देखें
भवन (गृहस्थ) में बसते विषय-वैराग्य नहीं हुआ — चौथापन (वृद्धावस्था) आ गया। हृदय में बहुत दुख लगा — जन्म बीत गया हरि-भक्ति बिना।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Living in a household, detachment from sense objects did not arise, and old age arrived. Great sorrow filled his heart that his life had passed without devotion to Hari.'

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