बालकाण्ड

दोहा 152

5 पद

Chaupai1 / 5
इच्छामय नरबेष सँवारें। होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे।। अंसन्ह सहित देह धरि ताता। करिहउँ चरित भगत सुखदाता।।
हिन्दी अर्थ देखें
(श्रीहरि ने कहा) इच्छामय नर-वेष सँवारकर — तुम्हारे निकेत (घर) में प्रकट होऊँगा। अंशों सहित देह धारण करके, तात! भक्त-सुखदाता — चरित्र करूँगा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Assuming a human form of My own will, I shall manifest in your home. Along with My partial incarnations, I shall take a body, dear one, and perform deeds that delight the devotees.'
Chaupai2 / 5
जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।। आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।
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(श्रीहरि ने कहा) जो सुनकर सादर — नर बड़भागी (भाग्यशाली) — भव (संसार) तरेंगे, ममता-मद त्यागकर। आदिशक्ति जिसने जग उपजाया — वह भी अवतरेगी — मेरी यह माया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Those fortunate people who hear these deeds with reverence shall cross the ocean of worldly existence, abandoning attachment and pride. The primordial power who created the universe — she too, My Maya, shall incarnate.'
Chaupai3 / 5
पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।। पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।
हिन्दी अर्थ देखें
(श्रीहरि ने कहा) पूरूँगा मैं तुम्हारी अभिलाषा — सत्य, सत्य — मेरा प्रण (वचन) सत्य। बार-बार ऐसा कहकर कृपानिधान — अन्तर्धान हुए भगवान।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'I shall fulfill your desire — this is My true, true, and again true vow.' Saying this again and again, the ocean of mercy, the Lord, disappeared.
Chaupai4 / 5
दंपति उर धरि भगत कृपाला। तेहिं आश्रम निवसे कछु काला।। समय पाइ तनु तजि अनयासा। जाइ कीन्ह अमरावति बासा।।
हिन्दी अर्थ देखें
दम्पति ने हृदय में भक्त-कृपालु (श्रीहरि) को धारण किया — उस आश्रम में कुछ काल बसे। समय पाकर शरीर अनायास (सहज ही) त्यागा — जाकर अमरावती में निवास किया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The couple enshrined the gracious Lord in their hearts and lived in that hermitage for some time. When the right time came, they effortlessly gave up their bodies and went to dwell in Amaravati, Indra's city.
Doha5 / 5
यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु। भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।
हिन्दी अर्थ देखें
यह इतिहास अत्यन्त पुनीत (पवित्र) — उमा को वृषकेतु (शिवजी) ने कही। भरद्वाज! सुनो — अपर (और एक) राम-जन्म का कारण।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
This most sacred story Shiva told to Uma. Now listen, Bharadvaja, to yet another cause of Rama's birth.

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