बालकाण्ड

दोहा 156

5 पद

Chaupai1 / 5
हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।। करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।
हिन्दी अर्थ देखें
हृदय में फल का अनुसन्धान (इच्छा) कुछ नहीं — भूप विवेकी, परम सुजान (बुद्धिमान)। जो धर्म-कर्म मन-वाणी से करते — ज्ञानी नृप वासुदेव (श्रीहरि) को अर्पित करते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
In his heart there was no desire for any reward — the king was supremely wise and discerning. Whatever righteous deeds he performed in mind, word, and deed, the enlightened king offered them all to Lord Vasudeva.
Chaupai2 / 5
चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा।। बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ।।
हिन्दी अर्थ देखें
एक बार उत्तम अश्व पर चढ़कर राजा — मृगया (शिकार) का सब साज-समाज सजाकर। विन्ध्याचल के गभीर (घने) वन में गए — बहुत पुनीत (श्रेष्ठ) मृग (हिरण) मारने लगे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Once, mounting a fine horse, the king set out with full hunting equipment for the chase. He entered the deep forests of the Vindhya mountains, and slew many sanctified deer.
Chaupai3 / 5
फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।। बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।
हिन्दी अर्थ देखें
वन में फिरते नृप ने बराह (सूअर) देखा — मानो शशि (चन्द्रमा) को ग्रसकर (निगलकर) राहु वन में छिपा। बड़ा विधु (चन्द्रमा) मुख में नहीं समाता — मानो क्रोधवश उगलता नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
While roaming the forest, the king spotted a wild boar — as if Rahu had hidden in the woods after swallowing the moon. The great moon would not fit in its mouth, as though it was spitting it out in rage.
Chaupai4 / 5
कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।। घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।
हिन्दी अर्थ देखें
कोल (दाढ़ — सूअर के दाँत) कराल (भयंकर), दसन (दाँत) की छबि (शोभा) गाई। तनु (शरीर) विशाल, पीवर (मोटा) अधिकाई (बहुत)। घुरघुराता — घोड़े के निकट आया। चकित (विस्मित) कान उठाकर (घोड़ा) देखता।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Its terrible tusks shone gloriously; its body was huge and exceedingly fat. It snorted as it came near the horse, which stood startled, ears pricked up.
Doha5 / 5
नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहु। चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहु।।156।।
हिन्दी अर्थ देखें
नील महीधर (पर्वत) शिखर समान — विशाल बराह (सूअर) देखकर। चपरि (एड़ लगाकर) घोड़ा सुटुककर (दौड़ाकर) नृप चला — हाँकि (बिना मारे) निबाह (गुजारा) नहीं होता।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing the massive boar, like the peak of a dark mountain, the king spurred his horse and galloped after it — for he could not let it escape.

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