बालकाण्ड
दोहा 157
5 पद
Chaupai1 / 5
आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी।।
तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
घोड़े का अधिक रव (शब्द) आता देखकर — बराह मरुत (वायु) गति से भागा। तुरन्त नृप ने सर (बाण) सन्धान (संधान) किया — बाण देखते-देखते भूमि में मिल गया (चूक गया)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Seeing the horse approaching with great noise, the boar fled swift as the wind. The king immediately drew his bow, but as he watched, the arrow fell to the ground without hitting.
Chaupai2 / 5
तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।
प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
तक-तककर (निशाना लगाकर) महीश (राजा) ने तीर चलाए — छल करके सूअर ने शरीर बचाया। प्रकट होता, छिपता — मृग भागता जाता। रिस (क्रोध) वश भूप (राजा) साथ लगा चला।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The king aimed and shot arrow after arrow, but the boar craftily dodged them all. The deer kept appearing and disappearing as it fled; in anger, the king followed relentlessly.
Chaupai3 / 5
गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।
अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
बराह दूर — घन (घना) गहन (गहरा) वन में गया — जहाँ गज (हाथी), बाजि (घोड़े) का निबाह (गुजारा) नहीं। अत्यन्त अकेले, वन में विपुल क्लेश (कष्ट) — तदपि नरेश (राजा) मृग (का) मग (पीछा) नहीं छोड़ते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The boar went far into the dense, dark forest where neither elephant nor horse could follow. Utterly alone, the king suffered great distress in the forest, yet he would not abandon the chase.
Chaupai4 / 5
कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा। भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा।।
अगम देखि नृप अति पछिताई। फिरेउ महाबन परेउ भुलाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कोल (सूअर) ने भूप (राजा) को बड़ा धीर (दृढ़) देखकर — भागकर गिरिगुहा (पर्वत-गुफा) में गहन (गहरी) पैठ गया। अगम (दुर्गम) देखकर नृप अत्यन्त पछताए — फिरे (लौटे) — महावन में भुलाई (भटक) पड़े।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Seeing the brave king's resolve, the boar fled and hid in a deep mountain cave. Finding the cave inaccessible, the king deeply regretted, and turning back, he lost his way in the great forest.
Doha5 / 5
खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।
खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
खेद, खिन्न (दुखी), क्षुधित (भूखे), तृषित (प्यासे) — राजा बाजि (घोड़ा) समेत। व्याकुल होकर सरित (नदी), सर (तालाब) खोजते — जल बिना अचेत (बेहोश) हुए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Weary, dejected, hungry, and thirsty, the king along with his horse searched desperately for a river or lake, and fainted from lack of water.