बालकाण्ड

दोहा 158

5 पद

Chaupai1 / 5
फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।। जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।
हिन्दी अर्थ देखें
वन में फिरते एक आश्रम देखा — वहाँ कपट-मुनिवेष (झूठे साधु-वेश) में एक नृपति (राजा) बसता। जिसका देश नृप (प्रतापभानु) ने छीन लिया था — समर (युद्ध) में सेना छोड़कर भाग गया था।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Wandering in the forest, he saw a hermitage where a king dwelt disguised as a sage. This was the king whose country Pratapabhanu had seized, whose army had fled in battle.
Chaupai2 / 5
समय प्रतापभानु कर जानी। आपन अति असमय अनुमानी।। गयउ न गृह मन बहुत गलानी। मिला न राजहि नृप अभिमानी।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रतापभानु का समय (सौभाग्य) जानकर — अपना अत्यन्त असमय (दुर्भाग्य) अनुमानकर। गृह (घर) नहीं गया — मन में बहुत ग्लानि (लज्जा)। अभिमानी नृप — राजा से मिला नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
He recognized it was Pratapabhanu's time of fortune and deemed it his own time of misfortune. Full of shame, he had not returned home, and being too proud, he had not sought the king's pardon.
Chaupai3 / 5
रिस उर मारि रंक जिमि राजा। बिपिन बसइ तापस कें साजा।। तासु समीप गवन नृप कीन्हा। यह प्रतापरबि तेहि तब चीन्हा।।
हिन्दी अर्थ देखें
हृदय में रिस (क्रोध) मारकर (दबाकर) — रंक (दरिद्र) की तरह राजा — विपिन (वन) में तापस (तपस्वी) के साज (वेश) में बसता। उसके समीप नृप (प्रतापभानु) ने गमन किया — प्रतापरवि को उसने तब पहचाना।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Suppressing his rage like a pauper, the king lived in the forest in the guise of an ascetic. When the king approached him, the false ascetic recognized Pratapabhanu at once.
Chaupai4 / 5
राउ तृषित नहि सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना।। उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजा प्यासा — उसने (कपट-तापस को) नहीं पहचाना। सुन्दर वेष देखकर महामुनि जाना। तुरग (घोड़े) से उतरकर प्रणाम किया — परम चतुर (होने से) अपना नाम नहीं कहा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
But the thirsty king did not recognize him. Seeing his fine ascetic garb, he took him for a great sage. Dismounting, he bowed in reverence — shrewd as he was, he did not reveal his own name.
Doha5 / 5
भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ। मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।
हिन्दी अर्थ देखें
भूपति (राजा) को तृषित (प्यासा) देखकर उसने सरबर (तालाब) दिखा दिया। मज्जन (स्नान) और पान (पानी पीना) — अश्व समेत — नृपति ने हर्षित होकर किया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing the king was thirsty, the false sage showed him a lake. The king joyfully bathed and drank along with his horse.

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