बालकाण्ड
दोहा 182
9 पद
Chaupai1 / 9
मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा।।
जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना।।
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मेघनाद को फिर हँकरावा (बुलवाया) — शिक्षा दी, बल-बैर बढ़ाया। (कहा) जो देवता समर (युद्ध) में धीर (वीर), बलवान — जिन्हें लड़ने का अभिमान —
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He then summoned Meghanada and instructed him, inflaming his valor and enmity: 'Those gods who are brave and powerful in battle, who pride themselves on their fighting prowess—'
Chaupai2 / 9
तिन्हहि जीति रन आनेसु बाँधी। उठि सुत पितु अनुसासन काँधी।।
एहि बिधि सबही अग्या दीन्ही। आपुनु चलेउ गदा कर लीन्ही।।
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(रावण ने कहा) उन्हें रण (युद्ध) में जीतकर बाँधकर ले आओ। पुत्र उठा — पिता का अनुशासन कन्धे पर (धारण किया)। इस प्रकार सबको आज्ञा दी — आपुनु (स्वयं) गदा हाथ में लेकर चला।
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'Defeat them in combat and bring them bound as captives!' The son rose and shouldered his father's command. In this manner he gave orders to all, and himself set out with mace in hand.
Chaupai3 / 9
चलत दसानन डोलति अवनी। गर्जत गर्भ स्त्रवहिं सुर रवनी।।
रावन आवत सुनेउ सकोहा। देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा।।
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दसानन (रावण) चलते अवनी (पृथ्वी) डोलती (काँपती)। गर्जना से देवताओं की रवनी (स्त्रियों) के गर्भ स्रवित (गिरते)। रावण सक्रोध (क्रोधपूर्वक) आता सुनकर — देवताओं ने मेरु गिरि (पर्वत) की खोह (गुफा) ताकी (ढूँढी)।
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As Ravana marched, the earth trembled; he roared so fiercely that the celestial women miscarried. Hearing of Ravana's furious advance, the gods hid in the caves of Mount Meru.
Chaupai4 / 9
दिगपालन्ह के लोक सुहाए। सूने सकल दसानन पाए।।
पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी। देइ देवतन्ह गारि पचारी।।
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दिग्पालों के सुहावने लोक — सूने सब दसानन ने पाए। बार-बार भारी सिंहनाद करके — देवताओं को गाली और पचारी (ललकार) देता।
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He found the beautiful realms of all the guardians of the directions lying deserted. Again and again he roared like a lion and challenged the gods with abuse.
Chaupai5 / 9
रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खौजत कतहुँ न पावा।।
रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी।।
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रण-मद मत्त (नशे में) फिरता — जग धावा (आक्रमण) करता। प्रतिभट (प्रतिद्वन्द्वी) खोजता — कहीं नहीं पाता। रवि (सूर्य), शशि (चन्द्र), पवन (वायु), वरुण, धनधारी (कुबेर)। अग्नि, काल, यम — सब अधिकारी (देवता)।
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Drunk with battle-frenzy, he roamed throughout the universe seeking a worthy opponent but finding none. The Sun, Moon, Wind-god, Varuna, Kubera, Agni, Time, Yama — all the rulers —
Chaupai6 / 9
किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।
ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।
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किन्नर, सिद्ध, मनुज (मनुष्य), सुर (देवता), नाग — हठपूर्वक सबके मार्ग में लगा (रोका)। ब्रह्मसृष्टि में जहाँ तक तनुधारी (शरीरधारी) — दसमुख (रावण) के वश में नर-नारी।
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Kinnaras, Siddhas, humans, gods, and serpents — he confronted them all stubbornly. Every embodied being in Brahma's creation — men and women — came under Ravana's sway.
Chaupai7 / 9
आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।
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सब भयभीत आज्ञा करते — नित्य आकर विनीत (विनम्र) होकर चरणों में नवते (झुकते)।
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All obeyed his commands in fear, and came daily to bow humbly at his feet.
Doha8 / 9
भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।
मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।
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भुजबल से विश्व वश करके रखा — कोई स्वतन्त्र नहीं। मण्डलीक (सम्राटों) में मणि (शिरोमणि) रावण — निज मन्त्र (बुद्धि) से राज करता। देव, यक्ष, गन्धर्व, नर, किन्नर, नाग-कुमारियाँ — जीतकर वरीं (ब्याहीं) — निज बाहुबल से — बहुत सुन्दर, श्रेष्ठ नारियाँ।
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Having conquered the world by the strength of his arms, he left none independent. The crest-jewel among emperors, Ravana ruled by his own counsel. Princesses of gods, Yakshas, Gandharvas, humans, Kinnaras, and Nagas — he conquered and took many beautiful and noble women by the force of his arms.
Doha9 / 9
देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।
जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।