बालकाण्ड

दोहा 188

5 पद

Chaupai1 / 5
गए देव सब निज निज धामा। भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा । जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। हरषे देव बिलंब न कीन्हा।।
हिन्दी अर्थ देखें
सब देवता अपने-अपने धाम (लोक) गए — भूमि सहित मन को विश्राम (शान्ति) मिली। जो कुछ ब्रह्मा ने आज्ञा दी — हर्षित देवताओं ने विलम्ब नहीं किया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
All the gods went to their respective abodes; the Earth too found peace of mind. Whatever instructions Brahma had given, the gods were delighted and did not delay.
Chaupai2 / 5
बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।। गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।
हिन्दी अर्थ देखें
बनचर (वानर) देह धरकर पृथ्वी पर — अतुलित (अतुलनीय) बल-प्रताप उनमें। गिरि (पर्वत), तरु (वृक्ष), नख (नाखून) — आयुध (हथियार) — सब वीर। हरि-मारग (श्रीहरि का मार्ग) चितवते — मतिधीर (स्थिर बुद्धि)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Taking the forms of forest-dwellers on the earth, they possessed incomparable strength and valor. With mountains, trees, and claws as their weapons, all these warriors fixed their eyes on Hari's path with firm minds.
Chaupai3 / 5
गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।। यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।
हिन्दी अर्थ देखें
गिरि-कानन (पर्वत-वन) जहाँ-तहाँ भरपूर — अपनी-अपनी रूरी (सुन्दर) अनीक (सेना) रचकर रहे। यह सब रुचिर (सुन्दर) चरित्र मैंने कहा — अब वह सुनो जो बीच में रखा था।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
They filled the mountains and forests everywhere, forming their own beautiful armies. I have narrated all these delightful events — now listen to what I had set aside in the middle.
Chaupai4 / 5
अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।। धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।
हिन्दी अर्थ देखें
अवधपुरी (अयोध्या) में रघुकुलमणि (रघुवंश-रत्न) राजा — वेद-विदित (वेदों में प्रसिद्ध) — उनका दशरथ नाम। धर्म-धुरन्धर (धर्म के स्तम्भ), गुणनिधि (गुणों के भण्डार), ज्ञानी — हृदय में भक्ति, मति (बुद्धि) सारंगपाणि (विष्णु) में।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
In the city of Ayodhya, there was a jewel of the Raghu dynasty — a king whose name was Dasharatha, known to the Vedas. He was a champion of dharma, a treasure of virtues, wise, and devoted in his heart to Lord Vishnu.
Doha5 / 5
कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत। पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।
हिन्दी अर्थ देखें
कौसल्या आदि प्रिय नारियाँ — सब आचरण पुनीत (पवित्र)। पति-अनुकूल, प्रेम दृढ़ (मजबूत) — हरि-पद-कमल (श्रीहरि के चरण-कमलों) में विनीत (विनम्र)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Kausalya and his other dear wives were all of pure conduct, devoted to their husband, firm in love, and humble at the lotus feet of Hari.

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