बालकाण्ड
दोहा 191
5 पद
Chaupai1 / 5
नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।
मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।
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नवमी तिथि, मधु (चैत्र) मास पुनीत (पवित्र)। शुक्ल पक्ष, अभिजित (नक्षत्र) — हरि-प्रीत (श्रीहरि को प्रिय)। मध्य-दिवस (दोपहर) — अत्यन्त शीत (ठण्ड) न धाम (गर्मी)। पावन (पवित्र) काल — लोक-विश्राम (संसार को शान्ति देने वाला)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
It was the sacred ninth day of the bright fortnight in the month of Chaitra, under the beloved Abhijit constellation of Hari. It was midday — neither too cold nor too hot — a holy time that gives peace to the world.
Chaupai2 / 5
सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ।।
बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा।।
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शीतल, मन्द (धीमी), सुरभि (सुगन्धित) वायु बहती। हर्षित सुर (देवता), सन्तों के मन में चाव (उत्साह)। वन कुसुमित (फूलों से भरे), गिरिगण (पर्वत-समूह) मणियारा (मणियों-से चमकते)। सकल सरिताएँ (नदियाँ) अमृतधारा स्रवतीं (बहतीं)।
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A cool, gentle, and fragrant breeze was blowing; the gods and saints were delighted at heart. The forests blossomed, the mountains shone like jewels, and all the rivers flowed with streams of nectar.
Chaupai3 / 5
सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना।।
गगन बिमल सकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा।।
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वह अवसर विरञ्चि (ब्रह्मा) ने जब जाना — सकल सुर (देवता) विमान सजाकर चले। गगन (आकाश) विमल (निर्मल) — सकुल (परिवार सहित) सुर-जूथ (देवता-समूह)। गन्धर्व बरूथ (समूह) गुण (गुणगान) गावते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
When Brahma perceived that auspicious moment, all the gods set forth in their celestial chariots. The sky was clear and filled with hosts of gods; troops of Gandharvas sang divine praises.
Chaupai4 / 5
बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।
अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।
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सुन्दर अञ्जलि सजाकर सुमन (फूल) बरसाते। गगन (आकाश) में गहगहाकर दुन्दुभी (नगाड़े) बजतीं। नाग, मुनि, देवता स्तुति करते — बहु विधि अपनी-अपनी सेवा लावते (अर्पित करते)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
They showered flowers with beautiful handfuls; drums resounded mightily in the sky. Nagas, sages, and gods offered praise, and all rendered their own particular service in many ways.
Doha5 / 5
सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।
जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम।।191।।
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सुर-समूह ने विनती करके अपने-अपने धाम (लोक) पहुँचे। जगनिवास (जगत के आश्रय) प्रभु प्रकट हुए — अखिल (सम्पूर्ण) लोक-विश्राम (संसार की शान्ति)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The hosts of gods made their supplications and returned to their respective abodes. Then the Lord of the universe manifested — He who is the repose of all the worlds.