बालकाण्ड
दोहा 214
5 पद
Chaupai1 / 5
सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।
बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।
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सुभग (सुन्दर) द्वार — सब कुलिस (वज्र-समान कठोर) कपाट (दरवाजे)। भूप (राजाओं) की भीड़, नट (नर्तक), मागध (स्तुतिपाठक), भाट (चारण)। बनी विशाल बाजि (घोड़ों) और गज (हाथियों) की शाला (अस्तबल)। हय (घोड़े), गय (हाथी), रथ — सब काल (सदा) संकुल (भरे)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The gates were magnificent with diamond-hard doors; crowds of kings, actors, bards, and minstrels thronged around. Vast stables for horses and elephants were built; they were always bustling with horses, elephants, and chariots.
Chaupai2 / 5
सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे।।
पुर बाहेर सर सारित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
शूर (वीर), सचिव (मन्त्री), सेनप (सेनापति) बहुत। नृपगृह (राजमहल) सरिस (समान) सबके सदन (भवन)। पुर (नगर) के बाहर सर (तालाब)-सरित (नदी) समीप — जहाँ-तहाँ विपुल (अनेक) महीप (राजा) उतरे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Heroes, ministers, and generals were in plenty; their mansions rivaled the king's palace. Outside the city, near lakes and rivers, numerous kings had encamped.
Chaupai3 / 5
देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।
कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।
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एक अनूप (अनुपम) अँवराई (आम्रवाटिका) देखी — सब सुपास (सुखद), सब भाँति सुहाई (सुन्दर)। कौशिक (विश्वामित्र) ने कहा — मेरा मन माना — यहाँ रहें, रघुवीर सुजान (बुद्धिमान)!
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They noticed a uniquely beautiful mango grove — pleasant in every way and delightful from all sides. Kaushika said: 'My heart is pleased — let us stay here, O wise hero of the Raghus.'
Chaupai4 / 5
भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनिबृंद समेता।।
बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए।।
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(श्रीराम ने कहा) भलेहीं, नाथ! — कृपानिकेत (कृपा के धाम) कहकर — मुनिवृन्द (मुनि-समूह) समेत वहाँ उतरे। विश्वामित्र महामुनि आए — मिथिलापति (जनक) ने समाचार पाए।
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'Very well, my Lord,' said the abode of mercy, and they alighted there along with the company of sages. When the great sage Vishvamitra's arrival was reported, King Janaka of Mithila received the news.
Doha5 / 5
संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति।
चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति।।214।।
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संग सचिव, शुचि (पवित्र) भूरि (अनेक) भट (योद्धा), भूसुर (ब्राह्मण), वर (श्रेष्ठ) गुरु, ज्ञाति (परिजन)। मुनिनायक (मुनियों के नेता) से मिलने चले — मुदित (प्रसन्न) राजा इस भाँति।
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Accompanied by trusted ministers, numerous warriors, eminent Brahmins, and family elders and teachers, the delighted king set out in this manner to meet the chief of sages.