बालकाण्ड

दोहा 223

5 पद

Chaupai1 / 5
बोली अपर कहेहु सखि नीका। एहिं बिआह अति हित सबहीं का।। कोउ कह संकर चाप कठोरा। ए स्यामल मृदुगात किसोरा।।
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अपर (दूसरी) बोली — (कहा) अच्छा कहा, सखि! इस विवाह में सबका अत्यन्त हित। कोई कहती — शंकर-चाप (शिव-धनुष) कठोर — ये श्यामल (साँवले), मृदुगात (कोमल शरीर), किशोर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Another spoke, 'You have said well, friend. This marriage would be in everyone's best interest.' Another said, 'Shiva's bow is exceedingly hard, and these are delicate-limbed dark youths.'
Chaupai2 / 5
सबु असमंजस अहइ सयानी। यह सुनि अपर कहइ मृदु बानी।। सखि इन्ह कहँ कोउ कोउ अस कहहीं। बड़ प्रभाउ देखत लघु अहहीं।।
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(एक नारी ने कहा) सब असमंजस (दुविधा) है, सयानी (बुद्धिमान सखि)! यह सुनकर अपर (दूसरी) मृदु (कोमल) वाणी कहती। (कहती) सखि! इनके बारे में कोई-कोई ऐसा कहते — बड़ा प्रभाव (शक्ति) — देखने में लघु (छोटे) दिखते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'The whole situation is perplexing, O wise one.' Hearing this, another spoke softly, 'Friend, some say about them — those who appear small can have great power.'
Chaupai3 / 5
परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।। सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।
हिन्दी अर्थ देखें
(नारी ने कहा) जिनके पद-पंकज (चरण-कमल) की धूरि (धूल) स्पर्श करके — भूरि (भारी) पाप-कृत अहल्या तरी (मुक्त हुई)। क्या वे शिवधनु तोड़े बिना रहेंगे? यह प्रतीति (विश्वास) भूलकर भी मत परिहरो (छोड़ो)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'By the touch of the dust of whose lotus feet, Ahalya was liberated from her heavy sins — can he possibly fail to break Shiva's bow? Never let go of this faith.'
Chaupai4 / 5
जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।। तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।
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(नारी ने कहा) जिस विरञ्चि (ब्रह्मा) ने सीता रचकर सँवारी — उसी ने विचारकर श्यामल (साँवला) वर (दूल्हा) रचा। उसके वचन सुनकर सब हर्षित हुईं — (कहा) ऐसे ही हो — मृदु (कोमल) वाणी कहतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'The Creator who fashioned and adorned Sita has thoughtfully created this dark-complexioned groom for her.' Hearing her words, all the women were delighted and said softly, 'May it be so indeed!'
Doha5 / 5
हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद। जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।
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हृदय में हर्षित — सुमन (फूल) बरसाती — सुमुखि (सुन्दर मुख वाली), सुलोचनी (सुन्दर नेत्रों वाली) स्त्रियों का वृन्द (समूह)। दोनों बन्धु जहाँ-जहाँ जाते — वहाँ-वहाँ परमानन्द।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
With joy in their hearts, the beautiful, bright-eyed women showered flowers. Wherever the two brothers went, there was supreme bliss.

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