बालकाण्ड

दोहा 222

5 पद

Chaupai1 / 5
देखि राम छबि कोउ एक कहई। जोगु जानकिहि यह बरु अहई।। जौ सखि इन्हहि देख नरनाहू। पन परिहरि हठि करइ बिबाहू।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम की छबि (सौन्दर्य) देखकर कोई एक कहती — (कहती) जानकी (सीता) के लिए यही वर (दूल्हा) योग्य है। यदि, सखि! इन्हें नरनाह (राजा जनक) देख लें — तो पण (प्रतिज्ञा) छोड़कर हठपूर्वक विवाह करें।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing Rama's beauty, someone said, 'This groom is worthy of Janaki. If only the king could see them, he would abandon his vow and insist on arranging the marriage.'
Chaupai2 / 5
कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।। सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।
हिन्दी अर्थ देखें
कोई कहती — ये (दोनों) भूपति (राजा जनक) ने पहचाने — मुनि समेत सादर सम्मान किया। (पर) सखि! पण (प्रतिज्ञा) राजा नहीं त्यजेंगे — विधि (भाग्य) वश हठपूर्वक अविवेक को भजते (मानते)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Another said, 'The king has recognized these princes and has honored them along with the sage. But, friend, the king will not abandon his vow; under fate's sway, he stubbornly clings to folly.'
Chaupai3 / 5
कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता।। तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू।।
हिन्दी अर्थ देखें
कोई कहती — यदि विधाता (ब्रह्मा) भला (अच्छा) है — सबको उचित फलदाता सुनिए। तो जानकी को मिलेगा यही वर — नहीं, आलि (सखि)! यहाँ सन्देह नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Another said, 'If the Creator is good, and if he is heard to be the just giver of results to all, then Janaki will obtain this very groom. There is no doubt about this, dear friend.'
Chaupai4 / 5
जौ बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू।। सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें।।
हिन्दी अर्थ देखें
(एक नारी ने कहा) यदि विधि (भाग्य) वश ऐसा संजोग (मिलन) बने — तो सब लोग कृतकृत्य (धन्य) होंगे। सखि! हमारी आरति (व्याकुलता) अत्यन्त — शायद ये इसी नाते (कारण) आए हैं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'If by fate's will such a union comes to pass, then all the world will be fulfilled. Friend, our longing is so great — perhaps he has come for this very reason.'
Doha5 / 5
नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि। यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि।।222।।
हिन्दी अर्थ देखें
(एक नारी ने कहा) नहीं तो — हमें सुनो, सखि! इनका दर्शन दूर (कठिन)। यह संघटु (मिलन) तब होता — जब पूर्वकृत (पूर्वजन्म के) भूरि (बहुत) पुण्य हों।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Otherwise, listen friend, the sight of these two will remain far from us. Such a meeting can only happen when one has an abundance of merit from past lives.'

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