बालकाण्ड

दोहा 232

5 पद

Chaupai1 / 5
चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।। जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।
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सीता चकित (विस्मित) होकर चारों दिशाओं में देखतीं — (सोचतीं) नृपकिशोर (राजकुमार) कहाँ गए — मन चिन्ता (करता)। जहाँ मृग-शावक (हिरन-शिशु) जैसे नयन (नेत्र) देखें — मानो वहाँ श्वेत कमलों की श्रेणी (पंक्ति) बरसती।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Sita looked about in all directions, startled, wondering where the princes had gone. Wherever her doe-like eyes gazed, it was as though white lotuses rained down there.
Chaupai2 / 5
लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।। देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।
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तब सखियों ने लता (बेल) की ओट (आड़) से दिखाए — श्यामल (साँवले)-गौर (गोरे), सुहावने किशोर। रूप देखकर लोचन (नेत्र) ललचाए — हर्षित — मानो निज निधि (अपना खजाना) पहचाना।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then her companions pointed out to her from behind a creeper the two charming youths, one dark and one fair. Seeing their beauty, her eyes were delighted, as though they had found their own lost treasure.
Chaupai3 / 5
थके नयन रघुपति छबि देखें। पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेषें।। अधिक सनेहँ देह भै भोरी। सरद ससिहि जनु चितव चकोरी।।
हिन्दी अर्थ देखें
रघुपति-छबि (सौन्दर्य) देखकर नयन थक गए — पलकों ने भी निमेष (झपकना) छोड़ दिया। अधिक स्नेह से देह भोरी (भुलावे में) हो गई — शरद (शरद ऋतु) शशि (चन्द्रमा) को मानो चकोरी देखती।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Her eyes grew weary gazing upon Rama's beauty; her eyelids refused even to blink. Overwhelmed by deep love, she became oblivious of her body, like a chakori bird gazing at the autumn moon.
Chaupai4 / 5
लोचन मग रामहि उर आनी। दीन्हे पलक कपाट सयानी।। जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी। कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी।।
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लोचन-मग (नेत्रों के मार्ग) से राम को उर (हृदय) में लाकर — सयानी (बुद्धिमान) ने पलक-कपाट (पलकों के दरवाजे) बन्द किए। जब सखियों ने सीता को प्रेमवश जाना — कुछ कह नहीं सकीं — मन सकुचानी (संकोचित)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Through the pathway of her eyes, she drew Rama into her heart and then wisely closed the doors of her eyelids. When the companions saw Sita lost in love, they were too bashful to say anything, their minds full of modesty.
Doha5 / 5
लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ। निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।
हिन्दी अर्थ देखें
लताभवन (लता-कुञ्ज) से उस अवसर पर दोनों भाई प्रकट हुए — निकसे (निकले) मानो दो विमल (निर्मल) विधु (चन्द्रमा) — जलद-पटल (बादलों का पर्दा) हटाकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
At that moment, the two brothers emerged from the bower of creepers, appearing like two bright moons freed from a veil of clouds.

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