बालकाण्ड

दोहा 242

5 पद

Chaupai1 / 5
बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।। जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।
हिन्दी अर्थ देखें
विद्वानों को प्रभु विराटमय (विश्वरूप) दीखे — बहु मुख, कर (हाथ), पग (पैर), लोचन (नेत्र), सीस (सिर)। जनक-जाति (जनक-परिवार) कैसे देखते — जैसे सजन (सज्जन), सगे (रिश्तेदार), प्रिय लगते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The learned ones saw the Lord in his cosmic form — with many mouths, hands, feet, eyes, and heads. The people of Janaka's family saw him as they would a dear, loving kinsman.
Chaupai2 / 5
सहित बिदेह बिलोकहिं रानी। सिसु सम प्रीति न जाति बखानी।। जोगिन्ह परम तत्वमय भासा। सांत सुद्ध सम सहज प्रकासा।।
हिन्दी अर्थ देखें
विदेह (जनक) सहित रानियाँ देखतीं — शिशु (बालक)-सम प्रीति — वर्णन नहीं हो सकती। योगियों को परम तत्त्वमय (तत्त्व-स्वरूप) भासा (दिखा) — शान्त, शुद्ध, सम (समान), सहज प्रकाश।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The queens along with Videha beheld him with indescribable affection, as one feels for a child. The yogis saw him as the Supreme Reality — serene, pure, uniform, and naturally luminous.
Chaupai3 / 5
हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।। रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।
हिन्दी अर्थ देखें
हरिभक्तों ने दोनों भाई देखे — इष्टदेव (अपने आराध्य) जैसे — सब सुखदाता। राम को सीता जिस भाव से देखतीं — वह स्नेह-सुख कथनीय (कहने योग्य) नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The devotees of Hari saw the two brothers as their cherished deity, the giver of all happiness. The love and joy with which Sita gazed at Rama cannot be expressed in words.
Chaupai4 / 5
उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।। एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।
हिन्दी अर्थ देखें
उर (हृदय) में अनुभव करतीं — वह भी कह नहीं सकतीं। कौन प्रकार कोई कवि कहे? इस प्रकार — जिसका जैसा भाव — उसने कोसलराजा (श्रीराम) को वैसा देखा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Even she who experienced it in her heart could not articulate it — what poet could possibly describe it? In this way, each person saw the prince of Kosala according to their own inner feeling.
Doha5 / 5
राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर। सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।
हिन्दी अर्थ देखें
राजसमाज में राजत (शोभित) — कोसलराज-किशोर। सुन्दर श्यामल (साँवले)-गौर (गोरे) तन (शरीर) — विश्व-बिलोचन (नेत्र)-चोर (मोहने वाले)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The prince of the Kosala kingdom shone in that royal assembly — beautiful, one dark and one fair, the captivator of the eyes of the entire universe.

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