बालकाण्ड
दोहा 243
5 पद
Chaupai1 / 5
सहज मनोहर मूरति दोऊ। कोटि काम उपमा लघु सोऊ।।
सरद चंद निंदक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी के।।
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सहज मनोहर दोनों मूर्ति (रूप) — कोटि (करोड़ों) काम (कामदेव) की उपमा भी लघु (छोटी)। शरद-चन्द (शरद-चन्द्रमा) को निन्दक (लजाने वाले) मुख सुन्दर। नीरज (कमल-जैसे) नयन (नेत्र) — जी (प्राण) को भावते (प्रिय)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Both forms were naturally enchanting; even comparing them to millions of Kamadevas would be inadequate. Their beautiful faces shamed the autumn moon; their lotus eyes captivated the heart.
Chaupai2 / 5
चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।
कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।
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चितवत (देखती) सुन्दर — कामदेव के मन को हरने वाली। हृदय में भावती (अनुभव होती) — बखानी (वर्णन) नहीं जाती। कल (सुन्दर) कपोल (गाल) — श्रुति (कानों) में कुण्डल लोला (झूलते)। चिबुक (ठोड़ी), अधर (होंठ) सुन्दर — मृदु (कोमल) बोला (वाणी)।
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Their charming glances stole the mind of Kamadeva himself; the feeling they evoked in the heart defied description. They had graceful cheeks, pendulous earrings at their ears, and beautiful chins with sweet, gentle speech.
Chaupai3 / 5
कुमुदबंधु कर निंदक हाँसा। भृकुटी बिकट मनोहर नासा।।
भाल बिसाल तिलक झलकाहीं। कच बिलोकि अलि अवलि लजाहीं।।
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कुमुदबन्धु (चन्द्रमा)-कर (किरणों) को निन्दक (लजाने वाली) हँसी। भृकुटि (भौंहें) विकट (तिरछी), मनोहर नासा (नाक)। भाल (माथा) विशाल — तिलक झलकाते। कच (बालों) को देखकर अलि-अवलि (भौंरों की पंक्ति) लजातीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Their smiles mocked the moon; their brows were striking and their noses beautiful. Their broad foreheads gleamed with tilak marks, and their hair put rows of bees to shame.
Chaupai4 / 5
पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।
रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
पीत (पीली) चौतनी (मुकुट) सिरों पर सुहाई (शोभित)। कुसुम (फूल)-कलियाँ बीच-बीच बनाईं। रेखें रुचिर (सुन्दर) — कम्बु (शंख)-कल (सुन्दर) गीवा (गर्दन)। मानो त्रिभुवन (तीनों लोकों) की सुषमा (शोभा) की सीमा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Beautiful yellow diadems adorned their heads, with flower buds arranged here and there. Graceful lines adorned their conch-like necks — as though they were the very boundary of the beauty of the three worlds.
Doha5 / 5
कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।
बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कुंजर (हाथी)-मणि (रत्न) कण्ठा (कण्ठहार) कलित (सुन्दर) — उरों (छाती) पर तुलसिका (तुलसी) माल (माला)। वृषभ (बैल)-कन्ध (कन्धे), केहरि (सिंह)-ठवनि (ठाट) — बलनिधि (बल के भण्डार) बाहु (भुजाएँ) विशाल।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
On their necks hung beautiful necklaces of elephant-pearls, and on their chests were garlands of tulsi. With bull-like shoulders, lion-like bearing — those treasuries of strength had mighty arms.