बालकाण्ड

दोहा 260

5 पद

Chaupai1 / 5
दिसकुंजरहु कमठ अहि कोला। धरहु धरनि धरि धीर न डोला।। रामु चहहिं संकर धनु तोरा। होहु सजग सुनि आयसु मोरा।।
हिन्दी अर्थ देखें
(लक्ष्मण ने कहा) दिक्कुंजरों (दिशाओं के हाथियों)! कमठ (कछुए)! अहि (शेषनाग)! कोला (वराह)! — धरणि (पृथ्वी) धरो, धीर (स्थिर) — डोलो (हिलो) मत। राम शंकर-धनु तोड़ना चाहते — मेरी आज्ञा सुनकर सजग (सावधान) होओ।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'O elephants of the directions, O tortoise, O serpent and boar — hold the earth steady and firm, do not waver! Rama wishes to break Shankara's bow; hear my command and be alert!'
Chaupai2 / 5
चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।। सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।
हिन्दी अर्थ देखें
चाप (धनुष) समीप जब राम आए — नर-नारियों, देवताओं ने सुकृत (पुण्य) मनाए। सबका संशय और अज्ञान — मन्द (मूर्ख) महीपों (राजाओं) का अभिमान।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
When Rama drew near the bow, men, women, and gods all invoked their good deeds. Everyone's doubt and ignorance, the foolish pride of the kings,
Chaupai3 / 5
भृगुपति केरि गरब गरुआई। सुर मुनिबरन्ह केरि कदराई।। सिय कर सोचु जनक पछितावा। रानिन्ह कर दारुन दुख दावा।।
हिन्दी अर्थ देखें
भृगुपति (परशुराम) का गर्व-गुरुता (भारी घमण्ड)। सुर-मुनिवरों की कदराई (डर)। सीता का सोच (चिन्ता) — जनक का पछतावा। रानियों का दारुण (भयंकर) दुख-दावा (कष्ट)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The heavy pride of Bhrigu's descendant (Parashurama), the timidity of the gods and great sages, Sita's anxiety, Janaka's regret, and the terrible anguish of the queens —
Chaupai4 / 5
संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।। राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।
हिन्दी अर्थ देखें
शम्भु-चाप (शिव-धनुष) — बड़ा बोहितु (जहाज) पाकर — सब संग (साथ) बनाकर चढ़े। राम-बाहुबल — अपार सिन्धु (समुद्र)। पार (उतरना) चाहते — कोई कड़हारू (नाविक) नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
All these found Shiva's bow a great ship to board, and they all climbed aboard together. The ocean was the boundless might of Rama's arms — all wished to cross, but there was no helmsman.
Doha5 / 5
राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि। चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम ने सब लोगों को देखा — चित्र-लिखे (चित्रित) से। सीता को देखा — कृपायतन (कृपा-निवास) ने — विशेष विकल (व्याकुल) जाना।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Rama looked at everyone and saw them motionless like figures in a painting. Then he looked at Sita, that abode of compassion, knowing her to be especially distressed.

Read this doha in English →