बालकाण्ड
दोहा 269
5 पद
Chaupai1 / 5
देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।
पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।
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भृगुपति (परशुराम) का कराल (भयंकर) वेष देखते — सकल भुआल (राजा) भय-विकल उठे। पिता समेत अपना-अपना नाम कह-कहकर — सब दण्डप्रणाम करने लगे।
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Seeing Bhrigu's descendant in his fierce form, all the kings rose up, trembling with fear. Each one, together with their fathers, gave their names and began prostrating themselves.
Chaupai2 / 5
जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।
जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।
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जिसे सुभाव (सहज ही) हितू (मित्र) जानकर देखते — वह जानता मानो आकर खुट (मृत्यु) आई। जनक फिर आकर सिर नवाया — सीता बुलवाकर प्रणाम करवाया।
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Whomever he glanced at with seeming favor, that person felt as if his end had come. Then Janaka came and bowed his head, and had Sita brought forward to pay her respects.
Chaupai3 / 5
आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।
बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।
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(परशुराम ने) आशीर्वाद दिया — सखियाँ हर्षित हुईं — सयानी (बुद्धिमान) ने निज समाज (समूह) में ले गईं। विश्वामित्र फिर आकर मिले — दोनों भाइयों को पद-सरोज (चरण-कमल) पर रखा।
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Parashurama gave his blessing, and the happy companions led her back to their group. Then Vishwamitra came and met him, and brought the two brothers to touch his lotus feet.
Chaupai4 / 5
रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा।।
रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन।।
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(विश्वामित्र ने कहा) राम-लक्ष्मण — दशरथ के ढोटा (पुत्र)। भली जोड़ी देखकर (परशुराम ने) आशीर्वाद दिया। राम को देखते रहे — थककर (तृप्त होकर) लोचन (नेत्र)। अपार रूप — मार (कामदेव)-मद-मोचन (दर्प-नाशक)।
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'These are Rama and Lakshmana, sons of Dasharatha.' Parashurama blessed them, seeing the fine pair. He stared at Rama, his eyes unable to turn away — Rama's beauty was limitless, dispelling the intoxication of Kamadeva.
Doha5 / 5
बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।
पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।
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फिर विदेह (जनक) को देखकर (परशुराम ने) कहा — (कहा) कहो, यह अत्यन्त भीड़ क्या? पूछते — जानकर (भी) अनजान जैसे — क्रोध शरीर में व्यापा।
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Then, looking again at Videha, he said, 'Tell me, what is this great commotion about?' His questioning was like that of one who pretends not to know, and anger pervaded his body.