बालकाण्ड
दोहा 276
5 पद
Chaupai1 / 5
कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।
माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
लक्ष्मण ने कहा — मुनि! आपका शील (सदाचार) — कौन नहीं जानता — संसार-विदित (प्रसिद्ध)। माता-पिता से उऋण (कर्ज-मुक्त) भले हुए। गुरु-ऋण रहा — बड़ा सोच जी को।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Lakshmana said, 'O sage, your gentle nature is well known to the world. You have repaid your parents' debt handsomely. Your debt to your guru remains — a great weight on your mind.'
Chaupai2 / 5
सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।।
अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लक्ष्मण ने कहा) वह मानो हमारे माथे काढ़ा (लगाया)। दिन बीत गए — ब्याज (सूद) बड़ा बढ़ा। अब व्यवहरिया (हिसाब करने वाला) बुलाओ — तुरन्त मैं थैली खोलकर (चुका) दूँ।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'It seems that debt has been placed upon our heads. Many days have passed and the interest has grown large. Now call a broker and settle accounts — I shall pay at once, opening my purse.'
Chaupai3 / 5
सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।।
भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कटु (कड़वे) वचन सुनकर कुठार (फरसा) सुधारा — 'हाय-हाय' सब सभा पुकारी। (लक्ष्मण ने कहा) भृगुवर (परशुराम)! परसु (फरसा) मुझे दिखाते! विप्र (ब्राह्मण) विचारकर बचाता हूँ, नृपद्रोही (राजाओं के शत्रु)!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Hearing these cutting words, Parashurama brandished his axe. The whole assembly cried, 'Alas! Alas!' 'O great Bhrigu, you show me your axe! Considering you a Brahmin, I spare you, O enemy of kings.'
Chaupai4 / 5
मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।
अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लक्ष्मण ने कहा) कभी मिले नहीं सुभट (श्रेष्ठ योद्धा) रण-गाढ़े (युद्ध में कठोर)। द्विज (ब्राह्मण), देवता — घर के बाढ़े (वीर)। सबने 'अनुचित' कहकर पुकारा — रघुपति ने सयन (इशारे) से लक्ष्मण को रोका।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'You have never met true warriors in battle; you are a Brahmin, brave only at home.' Everyone cried out, 'This is wrong!' Raghupati restrained Lakshmana with a glance.
Doha5 / 5
लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।
बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
लक्ष्मण के उत्तर — आहुति (हवन-सामग्री) सरिस (समान)। भृगुवर (परशुराम) का कोप — कृसानु (अग्नि)। बढ़ता देखकर जल-सम वचन बोले — रघुकुलभानु (रघुवंश-सूर्य श्रीराम)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Lakshmana's retorts were like fuel, and Bhrigu's descendant's wrath was the fire. Seeing it blaze, the sun of the Raghu dynasty spoke words like water to quench it.