बालकाण्ड

दोहा 287

5 पद

Chaupai1 / 5
दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहि बोलाई।। मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला।।
हिन्दी अर्थ देखें
(विश्वामित्र ने कहा) अवधपुर (अयोध्या) में दूत पठाओ (भेजो) जाकर — नृप दशरथ को बुलाकर लाओ। मुदित (प्रसन्न) राजा ने कहा — 'भलेहीं, कृपालु!' — उसी समय दूत बुलाकर भेजे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Send a messenger to Ayodhya at once and bring King Dasharatha here.' The delighted king said, 'Very well, O gracious one,' and immediately summoned and dispatched messengers.
Chaupai2 / 5
बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए।। हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा।।
हिन्दी अर्थ देखें
फिर सकल महाजन (प्रतिष्ठित नागरिक) बुलाए — सबने आकर सादर सिर नवाया। (जनक ने कहा) हाट (बाजार), बाट (सड़क), मन्दिर, सुरबासा (देवालय) — नगर चारों ओर सँवारो।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then he called together all the leading citizens. They all came and respectfully bowed. 'Decorate the markets, streets, temples, and shrines — beautify the city on all four sides.'
Chaupai3 / 5
हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।। रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
हर्षित होकर अपने-अपने घर गए — फिर परिचारक (सेवक) बुलाकर भेजे। (कहा) विचित्र वितान (शामियाने) बनाकर रचो। सिर पर वचन (आज्ञा) धरकर सुख पाकर चले।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
They departed joyfully to their respective homes, and servants were also sent with instructions. 'Erect wonderful canopies and awnings.' They placed the command on their heads and left happily.
Chaupai4 / 5
पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।। बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।
हिन्दी अर्थ देखें
बुलाकर नाना गुनी (कुशल कारीगर) भेजे — जो वितान (शामियाना)-रचना में कुशल, सुजान (बुद्धिमान)। विधि (ब्रह्मा) को वन्दन करके उन्होंने आरम्भ किया — कनक (सोने) के कदली (केले) के खम्भे बनाए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Many skilled artisans who were expert in constructing canopies were summoned. After invoking the Creator, they began their work, fashioning pillars of golden plantain trees.
Doha5 / 5
हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल। रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल।।287।।
हिन्दी अर्थ देखें
हरित (हरे) मणियों के पत्र (पत्ते)-फल — पद्मराग (लाल रत्न) के फूल। रचना देखकर अत्यन्त विचित्र — विरञ्चि (ब्रह्मा) का भी मन भूल (जाए)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The leaves and fruits were made of emeralds, and the flowers of rubies. The artistry was so marvelous that it bewildered even the mind of Brahma himself.

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