बालकाण्ड
दोहा 288
5 पद
Chaupai1 / 5
बेनि हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे।।
कनक कलित अहिबेल बनाई। लखि नहि परइ सपरन सुहाई।।
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बेनि (बेलें) — सब हरित (हरी) मणिमय बनाईं — सरल, सपर्ब (गाँठदार) — पहचानी नहीं जातीं (असली लगतीं)। कनक (सोने) से कलित (सजी) अहिबेल (लताएँ) बनाईं — सपरन (पत्तों सहित) — सुहावनी — लखी (पहचानी) नहीं जातीं।
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All the tendrils were made of green gems — so smooth and jointed that they could not be told from real ones. Creeper-vines of gold were exquisitely wrought, so lifelike with their leaves that one could not tell they were artificial.
Chaupai2 / 5
तेहि के रचि पचि बंध बनाए। बिच बिच मुकता दाम सुहाए।।
मानिक मरकत कुलिस पिरोजा। चीरि कोरि पचि रचे सरोजा।।
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उनके रचि-पचि (सजाकर) बन्ध (गाँठें) बनाए — बीच-बीच सुहावने मुक्ता (मोती)-दाम (माला)। माणिक (लाल मणि), मरकत (पन्ना), कुलिस (हीरा), पिरोजा (नीलम) — चीरकर, खोदकर, पचाकर (जड़कर) सरोज (कमल) रचे।
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Around these were fashioned beautiful bows and loops, with strings of lovely pearls set here and there. Rubies, emeralds, diamonds, and turquoise were carved and shaped and crafted into lotuses.
Chaupai3 / 5
किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।
सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।
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भृंग (भौंरे), बहुरंग (बहुरंगी) विहंग (पक्षी) बनाए — पवन (वायु) के प्रसंग (स्पर्श) से गुंजते-कूजते। सुर-प्रतिमा (देव-मूर्तियाँ) खम्भों पर गढ़ी-काढ़ीं — मंगल-द्रव्य (शुभ सामग्री) लिए सब खड़ीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Bees and colorful birds were fashioned; they buzzed and sang when stirred by the breeze. Images of gods were carved and set upon the pillars, each holding auspicious objects in their hands.
Chaupai4 / 5
चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।
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चौकें (आँगन) — अनेक भाँति पुराईं (भरे)। सिन्दूर (सिन्दूर), मणिमय — सहज सुहाई (सुन्दर)।
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The courtyard was filled with many kinds of beautiful designs, naturally lovely, made of vermilion and gems.
Doha5 / 5
सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।
हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।
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सौरभ (सुगन्धित) पल्लव (पत्ते) — सुभग (सुन्दर), सुठि (अत्यन्त) — नीलमणि खोदकर (कोरकर) बनाए। हेम (सोने) के बौर (मंजरी), मरकत (पन्ने) के घवरि (गुच्छे) — लसत (शोभित) पाटमय (रेशमी) डोरी।
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Exquisite leaves were carved from sapphires, blossoms fashioned from gold, and clusters of emeralds were strung on silk threads, all shining beautifully.