बालकाण्ड

दोहा 289

5 पद

Chaupai1 / 5
रचे रुचिर बर बंदनिबारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे।। मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए।।
हिन्दी अर्थ देखें
रुचिर (सुन्दर) श्रेष्ठ बन्दनिवारे (तोरण) रचे — मानो मनोभव (कामदेव) ने फन्द (जाल) सँवारे। अनेक मंगल-कलश बनाए — ध्वज (झण्डे), पताक (पताकाएँ), पट (वस्त्र), चामर (चँवर) सुहावने।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Beautiful and elegant wedding arches were erected, as if Kamadeva himself had fashioned his snares. Numerous auspicious pots were prepared, and flags, banners, fine cloths, and whisks adorned everything beautifully.
Chaupai2 / 5
दीप मनोहर मनिमय नाना। जाइ न बरनि बिचित्र बिताना।। जेहिं मंडप दुलहिनि बैदेही। सो बरनै असि मति कबि केही।।
हिन्दी अर्थ देखें
नाना मणिमय मनोहर दीप (दीपक) — विचित्र वितान (शामियाना) वर्णन नहीं हो सकता। जिस मण्डप में दुलहिनि (दुल्हन) बैदेही (सीता) — वह वर्णन करे — ऐसी मति (बुद्धि) कवि किसकी?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Enchanting lamps of many kinds studded with gems—the wondrous canopy cannot be described. The wedding pavilion where the bride Vaidehi would sit—what poet has the wit to describe it?
Chaupai3 / 5
दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।। जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।
हिन्दी अर्थ देखें
दूल्हा राम — रूप-गुण-सागर — वह वितान (शामियाना) तीनों लोकों में उजागर (प्रसिद्ध)। जनक-भवन (महल) की जैसी शोभा — गृह-गृह (घर-घर) प्रति (में) पुर (नगर) में वैसी ही दिखती।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The groom is Rama, an ocean of beauty and virtue; the canopy shines gloriously across the three worlds. The splendor that adorned Janaka's palace was mirrored in every home throughout the city.
Chaupai4 / 5
जेहिं तेरहुति तेहि समय निहारी। तेहि लघु लगहिं भुवन दस चारी।। जो संपदा नीच गृह सोहा। सो बिलोकि सुरनायक मोहा।।
हिन्दी अर्थ देखें
जिसने तेरहुति (मिथिला) उस समय निहारी (देखी) — उसे चौदह भुवन (लोक) लघु (छोटे) लगते। जो सम्पदा नीच (साधारण) गृह (घर) में शोभित — वह देखकर सुरनायक (इन्द्र) भी मोहित।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Whoever beheld Tirhut (Mithila) at that time felt the fourteen worlds were insignificant in comparison. The wealth that graced even the humblest homes was enough to enchant the lord of the gods.
Doha5 / 5
बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।। तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।
हिन्दी अर्थ देखें
जिस नगर में लक्ष्मी (स्वयं) बसतीं — कपट (छल) नारी-वर-वेष (सुन्दर स्त्री-रूप) धारकर। उस पुर (नगर) की शोभा कहते — सकुचाते शारद (सरस्वती) और शेष।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
In the city where Lakshmi herself dwells, having assumed the disguise of a beautiful woman—even Sharada and Shesha hesitate to describe the splendor of that city.

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