बालकाण्ड
दोहा 300
5 पद
Chaupai1 / 5
कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।
चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।
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कलित (सुन्दर) श्रेष्ठ हाथियों पर अम्बारी (हौदे) पड़ीं — जिस भाँति सँवारीं — कही नहीं जातीं। मत्तगज (मस्त हाथी) चले — घण्ट (घण्टियाँ) विराजीं — मानो सुभग (सुन्दर) सावन (वर्षा ऋतु) के घन (बादलों) की राजी (पंक्ति)।
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Elegant howdahs were placed upon the finest elephants, decorated in a manner beyond description. The stately elephants marched forth adorned with bells, like a splendid array of rain clouds in the month of Shravana.
Chaupai2 / 5
बाहन अपर अनेक बिधाना। सिबिका सुभग सुखासन जाना।।
तिन्ह चढ़ि चले बिप्रबर बृन्दा। जनु तनु धरें सकल श्रुति छंदा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
अपर (अन्य) अनेक विधान (प्रकार) के वाहन — सिबिका (पालकी), सुभग (सुन्दर), सुखासन (आरामदायक बैठक), जान (रथ)। उन पर चढ़कर विप्रवर (श्रेष्ठ ब्राह्मण) वृन्द (समूह) चले — मानो सकल श्रुति-छन्दों (वेद-मन्त्रों) ने तनु (शरीर) धरा।
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Many other types of conveyances were there—beautiful palanquins, comfortable seats, and carriages. Riding in them went groups of distinguished Brahmins, as if all the Vedic meters had assumed bodily form.
Chaupai3 / 5
मागध सूत बंदि गुनगायक। चले जान चढ़ि जो जेहि लायक।।
बेसर ऊँट बृषभ बहु जाती। चले बस्तु भरि अगनित भाँती।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
मागध (स्तुतिपाठक), सूत (चारण), बन्दी (भाट), गुणगायक — जान (वाहन) पर चढ़कर चले — जो जिसके लायक। बेसर (खच्चर), ऊँट, वृषभ (बैल) — बहुत जाति (प्रकार) के — अगणित भाँति की वस्तुएँ भरकर चले।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Bards, minstrels, panegyrists, and singers of praise rode in vehicles each suited to their station. Mules, camels, and bulls of many breeds set forth, loaded with countless varieties of goods.
Chaupai4 / 5
कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।
चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।
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करोड़ों काँवर (बोझा) लेकर कहार (बोझा-ढोने वाले) चले। विविध वस्तुओं का कौन वर्णन कर पाए? सकल सेवक-समुदाय चले — अपना-अपना साज-समाज सजाकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Tens of millions of porters carried loads on shoulder-poles. Who could count the variety of goods? All the servant-bands marched forth, each group having prepared its own equipage.
Doha5 / 5
सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।
कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सबके उर (हृदय) में निर्भर (भरपूर) हर्ष — पुलकित (रोमांचित) शरीर। (कहते) कभी दोनों वीर राम-लक्ष्मण — नयन (आँखें) भरकर देखेंगे?
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Everyone's heart was brimming with joy; their bodies were covered with goosebumps. "When shall we feast our eyes upon the two heroes, Rama and Lakshmana?"