बालकाण्ड

दोहा 302

5 पद

Chaupai1 / 5
सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।। करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।
हिन्दी अर्थ देखें
वसिष्ठ सहित नृप (राजा) शोभित कैसे — सुर-गुर (बृहस्पति) संग पुरन्दर (इन्द्र) जैसे। कुल-रीति, वेद-विधि से राजा ने — सबको देखकर सब भाँति बनावट (तैयारी) देखी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The king alongside Vasishtha shone like Indra accompanied by his divine preceptor. Having performed all family rites as prescribed by the Vedas, the king surveyed all the arrangements.
Chaupai2 / 5
सुमिरि रामु गुर आयसु पाई। चले महीपति संख बजाई।। हरषे बिबुध बिलोकि बराता। बरषहिं सुमन सुमंगल दाता।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम स्मरण करके गुरु-आज्ञा पाकर — महीपति (राजा) शंख बजाकर चले। विबुध (देवता) हर्षित — बारात देखकर — सुमन (फूल) बरसाते, सुमंगलदाता (शुभ-शकुन देने वाले)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Meditating upon Rama and receiving the guru's permission, the king set forth, sounding the conch. The gods rejoiced seeing the procession and showered auspicious flowers.
Chaupai3 / 5
भयउ कोलाहल हय गय गाजे। ब्योम बरात बाजने बाजे।। सुर नर नारि सुमंगल गाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
कोलाहल हुआ — हय (घोड़े)-गज (हाथी) गरजे। व्योम (आकाश) में बारात-बाजने बजे। सुर (देवता)-नर (मनुष्य)-नारी सुमंगल गातीं — सरस राग (में) शहनाइयाँ बजतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
There was great tumult as elephants, horses, and chariots resounded. In the sky, the wedding music played. Gods, men, and women sang auspicious songs, and melodious shehnais played.
Chaupai4 / 5
घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।। करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।
हिन्दी अर्थ देखें
घण्ट (बड़ी घण्टी)-घण्टि (छोटी घण्टी) — ध्वनि वर्णन नहीं हो सकती। सरव (नारे) करते पायक (पैदल सैनिक) — फहराते (झण्डे)। विदूषक (भाँड) नाना कौतुक (तमाशे) करते — हास-कुशल (हँसाने में निपुण), कल (मधुर) गान, सुजान (चतुर)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The sound of large and small bells was indescribable; foot-soldiers shouted and waved their banners. Jesters performed various amusing antics—skilled in laughter, merriment, and melodious songs.
Doha5 / 5
तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।। नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रेष्ठ कुँवर (राजकुमार) तुरग (घोड़े) नचाते — मृदंग-निशान (नगाड़े) सुनकर। नागर (चतुर) नट (दर्शक) चकित देखते — ताल-बन्धान (लय) में डगते (चलते) नहीं (अर्थात् मन्त्रमुग्ध खड़े)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The noble princes made their horses dance to the beat of drums and kettledrums. The clever townspeople watched amazed—they could not take a single step off the rhythm.

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