बालकाण्ड

दोहा 306

5 पद

Chaupai1 / 5
बरषि सुमन सुर सुंदरि गावहिं। मुदित देव दुंदुभीं बजावहिं।। बस्तु सकल राखीं नृप आगें। बिनय कीन्ह तिन्ह अति अनुरागें।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुमन (फूल) बरसाकर सुर-सुन्दरियाँ गातीं — मुदित (प्रसन्न) देवता दुन्दुभी (नगाड़े) बजाते। सकल वस्तुएँ नृप (राजा) के आगे रखीं — अत्यन्त अनुराग (प्रेम) से विनय की।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Gods showered flowers from above while celestial women sang; the joyful gods beat their drums. All the goods were placed before the king, and the welcomers made their humble offerings with great love.
Chaupai2 / 5
प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।। करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रेम समेत राजा ने सब लिया — बकसीस (इनाम) याचकों (माँगने वालों) को दी। पूजा-मान्यता-बड़ाई (सम्मान) करके — जनवासे (अतिथि-गृह) को लवाकर (साथ लेकर) चले।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The king graciously accepted everything with love, and gave rewards to the supplicants. Honoring and praising everyone, they led them toward the guest quarters.
Chaupai3 / 5
बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं। देखि धनहु धन मदु परिहरहीं।। अति सुंदर दीन्हेउ जनवासा। जहँ सब कहुँ सब भाँति सुपासा।।
हिन्दी अर्थ देखें
विचित्र वसन (वस्त्र) के पाँवड़े (कालीन) बिछे — देखकर धन (कुबेर) भी धन-मद (गर्व) छोड़ दे। अत्यन्त सुन्दर जनवास दिया — जहाँ सबको सब भाँति सुपास (सुख)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Carpets of wonderful fabrics were spread on the path; seeing them, even Kubera would forget his pride of wealth. Extremely beautiful guest quarters were provided, where everyone had every comfort.
Chaupai4 / 5
जानी सियँ बरात पुर आई। कछु निज महिमा प्रगटि जनाई।। हृदयँ सुमिरि सब सिद्धि बोलाई। भूप पहुनई करन पठाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
सीता ने जाना — बारात पुर (नगर) में आई। कुछ निज महिमा प्रकट जनाई। हृदय में सब सिद्धि स्मरण करके बुलाई — भूप (राजा) की पहुनाई (अतिथि-सत्कार) करने भेजी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Sita, knowing the wedding procession had arrived in the city, revealed some of her divine glory. Meditating in her heart, she summoned all the Siddhis and sent them to attend to the king's hospitality.
Doha5 / 5
सिधि सब सिय आयसु अकनि गईं जहाँ जनवास। लिएँ संपदा सकल सुख सुरपुर भोग बिलास।।306।।
हिन्दी अर्थ देखें
सब सिद्धि — सीता की आज्ञा सुनकर — जनवास (अतिथि-गृह) गईं। सकल सम्पदा, सुख — सुरपुर (स्वर्ग) जैसे भोग-विलास लेकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
All the Siddhis, heeding Sita's command, went to the guest quarters, bringing with them all the splendors, comforts, and luxuries of heaven.

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