बालकाण्ड

दोहा 315

5 पद

Chaupai1 / 5
जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।। करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।
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(शिवजी ने कहा) जिनका नाम लेने-मात्र से जग में — सकल अमंगल-मूल नष्ट होते। चारों पदार्थ (धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष) करतल (हथेली) पर आ जाते — वे सीता-राम — कामारि (शिव) ने कहा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
"By merely taking whose name in this world all roots of inauspiciousness are destroyed, and the four great goals of life are obtained—that Rama and that Sita," says the Slayer of Kama (Shiva).
Chaupai2 / 5
एहि बिधि संभु सुरन्ह समुझावा। पुनि आगें बर बसह चलावा।। देवन्ह देखे दसरथु जाता। महामोद मन पुलकित गाता।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार शम्भु (शिव) ने देवताओं को समझाया — फिर आगे श्रेष्ठ बसह (नन्दी बैल) चलाया। देवताओं ने दशरथ-यात्रा (बारात) देखी — महामोद (प्रसन्नता), मन पुलकित शरीर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Thus Shiva instructed the gods, and then drove his fine bull forward. The gods saw Dasharatha proceeding—their joy was immense, their bodies thrilling with delight.
Chaupai3 / 5
साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।। सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।
हिन्दी अर्थ देखें
साधु-समाज — संग महीदेव (ब्राह्मण) — मानो सुख-सेवा (शुभ कर्म) ने तनु (शरीर) धरकर। चार सुभग (सुन्दर) सुतों के साथ शोभित — मानो अपवर्ग (मोक्ष) सकल तनुधारी (शरीरधारक)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
A company of saints and sages accompanied the Brahmins, as if good deeds had taken bodily form to enjoy happiness. With him shone his four handsome sons, as if all four forms of liberation had taken human shape.
Chaupai4 / 5
मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।। पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।
हिन्दी अर्थ देखें
मरकत (पन्ना)-कनक (सोने) वर्ण (रंग) की श्रेष्ठ जोड़ी — देखकर देवताओं को कम नहीं प्रीति। फिर राम को देखकर हृदय में हर्षित — नृप (राजा) की सराहना करके सुमन (फूल) बरसाए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The emerald-and-gold-colored pair were a sight that filled the gods with no small love. Then, gazing upon Rama, they rejoiced, praised the king, and showered flowers.
Doha5 / 5
राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि। पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम-रूप — नख (पैर) से शिख (शिखा) तक सुभग (सुन्दर) — बार-बार निहारकर। पुलकित शरीर, सजल (जल-भरे) लोचन (नेत्र) — उमा समेत पुरारि (शिवजी)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Beholding Rama's beauty from head to toe again and again, Shiva along with Uma stood with thrilled body and tear-filled eyes.

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