बालकाण्ड
दोहा 314
5 पद
Chaupai1 / 5
सुरन्ह सुमंगल अवसरु जाना। बरषहिं सुमन बजाइ निसाना।।
सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानन्हि नाना जूथा।।
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देवताओं ने सुमंगल-अवसर जाना — सुमन (फूल) बरसाकर निशान (नगाड़े) बजाए। शिव, ब्रह्मा आदि विबुध (देवता)-बरूथ (समूह) — नाना विमानों पर चढ़े, नाना जूथ (समूह)।
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The gods recognized the auspicious moment and showered flowers while sounding their drums. Shiva, Brahma, and hosts of deities rode upon various celestial vehicles in many groups.
Chaupai2 / 5
प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।
देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।
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प्रेम-पुलकित तन — हृदय में उछाह (उत्साह)। राम-विवाह देखने चले। जनकपुर देखकर सुर (देवता) अनुरागे — निज-निज लोक सबको लघु (छोटे) लगे।
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With love-thrilled bodies and hearts full of joy, they came to witness Rama's wedding. Seeing Janakpur, the gods were captivated; their own worlds seemed insignificant.
Chaupai3 / 5
चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।
नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।
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विचित्र विताना (शामियाने) चकित होकर देखते — सकल अलौकिक नाना रचना। नगर नर-नारी — रूप-निधान (सौन्दर्य-भण्डार)। सुघर (सुन्दर), सुधर्म (धार्मिक), सुशील (सदाचारी), सुजान (बुद्धिमान)।
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They gazed in wonder at the wondrous canopy, with decorations wholly beyond this world. The men and women of the city were treasuries of beauty—refined, righteous, virtuous, and wise.
Chaupai4 / 5
तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।
बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।
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उन्हें देखकर सब सुर-सुरनारियाँ — मानो नखत (तारे) विधु (चन्द्रमा)-उजियारी (प्रकाश) में। विधि (ब्रह्मा) को विशेष आश्चर्य हुआ — अपनी करनी (कारीगरी) कहीं कुछ नहीं देखी।
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Seeing them, all the gods and goddesses felt like stars in the light of the full moon. Brahma was especially amazed; nowhere could he see anything of his own making.
Doha5 / 5
सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।
हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।
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शिव ने सब देवताओं को समझाया — (कहा) आश्चर्य में मत भूलो। हृदय में धीरज धरकर विचारो — सीता-रघुवीर-विवाह (है यह)!
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Shiva counseled all the gods: "Do not be lost in wonder. Steady your hearts and reflect: this is the wedding of Sita and Raghubira."