बालकाण्ड
दोहा 334
5 पद
Chaupai1 / 5
सबु समाजु एहि भाँति बनाई। जनक अवधपुर दीन्ह पठाई।।
चलिहि बरात सुनत सब रानीं। बिकल मीनगन जनु लघु पानीं।।
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सब समाज इस भाँति बनाकर — जनक ने अवधपुर (अयोध्या) पठाई (भेजी)। बारात चलेगी सुनते — सब रानियाँ — विकल मीनगण (मछलियाँ) मानो लघु (कम) पानी (जल) में।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Having prepared the entire retinue in this manner, Janaka dispatched it toward Ayodhya. Hearing that the procession was about to leave, all the queens were distraught—like fish in diminishing water.
Chaupai2 / 5
पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।
होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
बार-बार सीता को गोद में लेतीं — आशीष देतीं, सिखावन (उपदेश) देतीं। (कहतीं) सन्तत (सदा) पिय (पति) को प्यारी रहना। चिर (दीर्घकाल) अहिबात (सुहाग) — हमारी आशीष।
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Again and again they took Sita in their laps, giving blessings and instructions: "May you always be dear to your husband! May you forever remain a married woman—this is our blessing."
Chaupai3 / 5
सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।
अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(रानियाँ कहतीं) सासु-ससुर-गुरु सेवा करना। पति-रुख (इच्छा) लखकर (देखकर) आज्ञा अनुसरण करना। अत्यन्त स्नेहवश सखियाँ सयानी (बुद्धिमान) — नारी-धर्म मृदु (कोमल) वाणी से सिखातीं।
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"Serve your mother-in-law, father-in-law, and guru. Study your husband's wishes and follow his commands." With great affection, the wise female companions taught the brides the duties of a wife in gentle words.
Chaupai4 / 5
सादर सकल कुअँरि समुझाई। रानिन्ह बार बार उर लाई।।
बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं। कहहिं बिरंचि रचीं कत नारीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सादर सकल कुँवरी (राजकुमारियों) को समझाकर — रानियों ने बार-बार उर (हृदय) से लगाया। बार-बार माताएँ भेटतीं (गले लगातीं) — (कहतीं) विरञ्चि (ब्रह्मा) ने नारी क्यों रची!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
All the princesses were respectfully counseled, and the queens embraced them again and again. The mothers embraced them over and over, saying: "Why did Brahma create women?"
Doha5 / 5
तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।
चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।
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उस अवसर पर भाइयों सहित राम — भानुकुल (सूर्यवंश)-केतु (ध्वज)। जनक-मन्दिर (महल) मुदित (प्रसन्न) चले — विदा करवाने हेतु।
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At that time, Rama, the banner of the Solar Race, accompanied by his brothers, went happily to Janaka's palace to take his formal leave.