बालकाण्ड
दोहा 348
5 पद
Chaupai1 / 5
मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।
जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।
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मागध (स्तुतिपाठक), सूत (चारण), बन्दी (भाट), नट (नर्तक), नागर (चतुर) — तीनों लोकों में उजागर (प्रसिद्ध) यश गाते। 'जय' ध्वनि — विमल (निर्मल) वेद-श्रेष्ठ-वाणी — दसों दिशाओं में सुमंगल-सनी (भीगी) सुनाई देतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Bards, minstrels, and clever panegyrists sang his glory, resplendent in the three worlds. Cries of "Victory!" and the pure, beautiful words of the Vedas were heard in all ten directions, mingled with auspiciousness.
Chaupai2 / 5
बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे।।
बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं।।
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विपुल (अनेक) बाजने बजने लगे — नभ (आकाश) सुर (देवता), नगर-लोग अनुरागे (प्रेममग्न)। बने (सजे) बाराती — वर्णन नहीं हो सकते। महामुदित (अत्यन्त प्रसन्न) — मन में सुख समाता नहीं।
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Many instruments began to play; the gods in the sky and the people of the city were enraptured. The adorned wedding guests were beyond description; their immense joy could not be contained in their hearts.
Chaupai3 / 5
पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।
करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।
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पुरवासियों (नगरवासियों) ने तब राजा को जोहारा (अभिवादन किया) — राम देखकर सुखी हुए। मणिगण (रत्न)-चीर (वस्त्र) निछावरी (न्योछावर) करते — बारि (जल) बिलोचन (नेत्रों में), पुलकित शरीर।
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The citizens then saluted the king; seeing Rama, they were made happy. They waved gems and fine garments as offerings, their eyes filled with tears and their bodies thrilling.
Chaupai4 / 5
आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।
सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।
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मुदित (प्रसन्न) पुर-नारियाँ आरती करतीं — चार श्रेष्ठ कुँवर (राजकुमार) निरखकर (देखकर) हर्षित। सिबिका (पालकी) सुभग — ओहार (पर्दा) उघारकर (खोलकर) — दुलहिनियों (बहुओं) को देखकर सुखी होतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The joyful women of the city performed arati and rejoiced beholding the four handsome princes. Opening the beautiful curtains of the palanquins, they gazed upon the brides and were delighted.
Doha5 / 5
एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।
मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।
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इस प्रकार सबको सुख देते — राजद्वार पर आए। मुदित (प्रसन्न) माताएँ — बधुओं (बहुओं) समेत कुमार (राजकुमारों) की परिछन (आरती) करतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
In this way, giving joy to all, they arrived at the royal gate. The delighted mothers performed the welcoming ceremony for the princes together with their brides.