बालकाण्ड
दोहा 352
5 पद
Chaupai1 / 5
जो बसिष्ठ अनुसासन दीन्ही। लोक बेद बिधि सादर कीन्ही।।
भूसुर भीर देखि सब रानी। सादर उठीं भाग्य बड़ जानी।।
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जो वसिष्ठ ने अनुशासन (आज्ञा) दिया — लोक (लौकिक)-वेद-विधि सादर की। भूसुर (ब्राह्मण)-भीड़ देखकर सब रानियाँ — सादर उठीं — बड़ा भाग्य जानकर।
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Whatever instructions Vasishtha had given, the king dutifully carried out according to both scriptural and worldly custom. Seeing the host of Brahmins, all the queens rose respectfully, knowing it was great good fortune.
Chaupai2 / 5
पाय पखारि सकल अन्हवाए। पूजि भली बिधि भूप जेवाँए।।
आदर दान प्रेम परिपोषे। देत असीस चले मन तोषे।।
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पाँव (पैर) पखारकर (धोकर) सबको नहलाया — पूजकर भली विधि भूप (राजा) ने खिलाया। आदर-दान-प्रेम से परिपोषित (सन्तुष्ट) — आशीष देते — मन तोषकर (सन्तुष्ट होकर) चले।
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They washed their feet, bathed them, and after proper worship, the king feasted them well. Nourished with respect, gifts, and love, the Brahmins departed contented, bestowing blessings.
Chaupai3 / 5
बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।
कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।
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बहु विधि गाधिसुत (विश्वामित्र) की पूजा की — (कहा) नाथ! मुझसम धन्य न दूजा। भूपति (राजा) ने भूरी (बहुत) प्रशंसा की — रानियों सहित पग (चरण)-धूरि (धूलि) ली।
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He honored Vishwamitra in many ways: "My Lord, none is as blessed as I." The king praised him profusely, and all the queens took the dust of his feet.
Chaupai4 / 5
भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।
पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।
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भीतर भवन (महल) में श्रेष्ठ वास (निवास) दिया। नृप (राजा)-रनिवास (अन्तःपुर) मन जोगवत (सेवा करते) रहा। फिर गुरु (वसिष्ठ) पद-कमल पूजे — विनय की — उर (हृदय) में प्रीति कम नहीं।
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A fine room within the palace was given to him. The king and queens attended to his every comfort. Then they worshipped the guru Vasishtha's lotus feet, their humble devotion arising from no small love.
Doha5 / 5
बधुन्ह समेत कुमार सब रानिन्ह सहित महीसु।
पुनि पुनि बंदत गुर चरन देत असीस मुनीसु।।352।।
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बधुओं (बहुओं) समेत कुमार (राजकुमार) सब — रानियों सहित महीश (राजा)। बार-बार गुरु-चरण वन्दते — मुनीश (मुनीश्वर) आशीष देते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The princes together with their brides, and the king together with the queens, bowed again and again at the guru's feet, and the great sage bestowed his blessings.