बालकाण्ड
दोहा 355
5 पद
Chaupai1 / 5
मंगलगान करहिं बर भामिनि। भै सुखमूल मनोहर जामिनि।।
अँचइ पान सब काहूँ पाए। स्त्रग सुगंध भूषित छबि छाए।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
श्रेष्ठ भामिनी (स्त्रियाँ) मंगल-गान करतीं — सुखमूल (सुख-कारण) मनोहर जामिनी (रात) हुई। सबने अँचइ (खुश्बूदार) पान पाए — स्रग (माला)-सुगन्ध-भूषित (सजे) — छबि छाई।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Beautiful women sang auspicious songs; the delightful night became the very source of happiness. Everyone received betel-leaf and fragrant garlands, and shone adorned with ornaments.
Chaupai2 / 5
रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।
प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
राम देखकर — रजायसु (आज्ञा) पाकर — सिर नवाकर अपने-अपने भवन (घर) चले। प्रेम-प्रमोद-विनोद (आनन्द)-बड़ाई — समय, समाज, मनोहरता —
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
After gazing upon Rama and receiving his permission, all departed to their own homes, bowing their heads. The love, delight, joy, spectacle, occasion, company, and beauty of it all—
Chaupai3 / 5
कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।
सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
— सत (सौ) शारदा (सरस्वती)-शेष नहीं कह सकतीं। वेद, विरञ्चि (ब्रह्मा), महेश (शिव), गणेश (भी नहीं)। वह मैं कैसे वर्णन करके कहूँ? भूमिनाग (शेषनाग) सिर पर क्या धरणी (पृथ्वी) धरे?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
—cannot be described even by a hundred Sharadas and Sheshas, nor by the Vedas, Brahma, Shiva, or Ganesha. How then can I attempt to describe it? Can the earth-serpent bear the earth upon his head?
Chaupai4 / 5
नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाई रानी।।
बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
नृप (राजा) ने सब भाँति सबका सम्मान किया — मृदु (कोमल) वचन कहकर रानी बुलाई। (कहा) बधू (बहुएँ) लड़कियाँ हैं — पर-घर (ससुराल) आई हैं। नयन-पलक की भाँति रखना।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The king honored everyone in every way, and calling the queens, spoke gentle words: "The brides are young girls who have come to a new home; guard them as you would the pupils of your eyes."
Doha5 / 5
लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।
अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(दशरथ ने कहा) लड़के श्रमित (थके) — उनींद (नींद) वश। जाकर शयन करवाओ। ऐसा कहकर विश्रामगृह (शयनकक्ष) गए — राम-चरण में चित्त लगाकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
"The children are tired and drowsy; go and put them to sleep." Saying this, the king retired to his resting chamber with his mind fixed on Rama's feet.