बालकाण्ड
दोहा 354
5 पद
Chaupai1 / 5
सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू।।
जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे।।
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सब विधि सबको समदि (समादृत करके) नरनाह (राजा) — हृदय भरपूर उछाह (उत्साह)। जहाँ रनिवास (अन्तःपुर) — वहाँ पग (पैर) रखे — बहूटियों (बहुओं) सहित कुँवर (राजकुमार) निहारे (देखे)।
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Having honored everyone in every way, the king's heart was brimming with joy. Going to the inner court, he beheld the princes together with their brides.
Chaupai2 / 5
लिए गोद करि मोद समेता। को कहि सकइ भयउ सुखु जेता।।
बधू सप्रेम गोद बैठारीं। बार बार हियँ हरषि दुलारीं।।
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मोद (आनन्द) समेत गोद में लिए — कितना सुख हुआ — कौन कह सके? बधू (बहुओं) को सप्रेम गोद बैठाकर — बार-बार हृदय से हर्षित होकर दुलारीं।
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He took them in his lap with great delight; who can describe the happiness he felt? With love, he seated the brides in his lap and fondled them again and again with a joyful heart.
Chaupai3 / 5
देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू।।
कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि हरषु होत सब काहू।।
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समाज (दृश्य) देखकर मुदित (प्रसन्न) रनिवास (अन्तःपुर) — सबके उर (हृदय) में आनन्द ने निवास किया। भूप (राजा) ने कहा — विवाह कैसे हुआ — सुनकर सबको हर्ष।
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Seeing the whole scene, the inner court was delighted; bliss took up residence in everyone's heart. The king narrated how the wedding had taken place, and everyone who heard it was filled with joy.
Chaupai4 / 5
जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।
बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।
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जनक-राज (का) गुण, शील, बड़ाई (यश)। प्रीति-रीति (प्रेम-परम्परा), सम्पदा सुहावनी। बहु विधि भूप (राजा) ने भाट (चारण) जैसे वर्णन किया। सब रानियाँ करनी (कार्य) सुनकर प्रमुदित (अत्यन्त प्रसन्न)।
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He described King Janaka's virtues, character, grandeur, affection, customs, and magnificent wealth in many ways, like a bard. Hearing the story, all the queens were supremely delighted.
Doha5 / 5
सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र गुर ग्याति।
भोजन कीन्ह अनेक बिधि घरी पंच गइ राति।।354।।
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सुतों (पुत्रों) समेत नहाकर — नृप (राजा) ने विप्र (ब्राह्मण)-गुर (गुरु)-ज्ञाति (रिश्तेदार) बुलाए। अनेक विधि भोजन किया — रात की पाँच घड़ी बीत गई।
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After bathing with his sons, the king invited the Brahmins, guru, and kinsmen. A feast of many kinds was held, and five hours of the night passed.