उत्तरकाण्ड

दोहा 109

12 पद

Chaupai1 / 12
एहि कर होइ परम कल्याना। सोइ करहु अब कृपानिधाना।। बिप्रगिरा सुनि परहित सानी। एवमस्तु इति भइ नभबानी।।
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(गुरु ने कहा) इसका परम कल्याण हो — वही करो, हे कृपानिधान! ब्राह्मण की परहित-कारी वाणी सुनकर शिवजी बोले।
रोमन लिप्यंतरण देखें
ehi kara hoi parama kalyānā. soī karahu aba kṛpānidhānā. bipragirā suni parahita
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'May this one's supreme welfare come about — do that, O treasury of mercy.' Hearing the Brahmin's voice, motivated by compassion for others, Shiva spoke.
Chaupai2 / 12
जदपि कीन्ह एहिं दारुन पापा। मैं पुनि दीन्ह कोप करि सापा।। तदपि तुम्हार साधुता देखी। करिहउँ एहि पर कृपा बिसेषी।।
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(शिवजी ने कहा) यद्यपि इसने भयंकर पाप किया — मैंने भी क्रोध से शाप दिया। तदपि तुम्हारे (अनुरोध से शाप हल्का होगा)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
jadapi kīnha ehiṃ dāruna pāpā. maiṃ puni dīnha kopa kari sāpā. tadapi tumhāra
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Though he committed a terrible sin and I in anger gave him a curse — yet because of your intervention, the curse shall be mild.'
Chaupai3 / 12
छमासील जे पर उपकारी। ते द्विज मोहि प्रिय जथा खरारी।। मोर श्राप द्विज ब्यर्थ न जाइहि। जन्म सहस अवस्य यह पाइहि।।
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(शिवजी ने कहा) क्षमाशील, परोपकारी — ऐसे ब्राह्मण मुझे श्रीराम-समान प्रिय। मेरा शाप ब्राह्मण के वरदान से (नहीं मिटता)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
chamāsīla je para upakārī. te dvija mohi priya jathā kharārī. mora śrāpa dvija ba
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Those who are forgiving and benefactors of others — such Brahmins are as dear to Me as Rama Himself. My curse cannot be nullified by the Brahmin's blessing.'
Chaupai4 / 12
जनमत मरत दुसह दुख होई। अहि स्वल्पउ नहिं ब्यापिहि सोई।। कवनेउँ जन्म मिटिहि नहिं ग्याना। सुनहि सूद्र मम बचन प्रवाना।।
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(शिवजी ने कहा) जन्म-मरण में असह्य दुख होगा। पर साँप होकर भी अन्य कोई कष्ट नहीं। किसी जन्म में शाप मिटेगा।
रोमन लिप्यंतरण देखें
janamata marata dusaha dukha hoī. ahi svalpau nahiṃ byāpihi soī. kavaneuṃ janma miṭa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'At birth and death there will be unbearable pain. But even as a serpent, he shall suffer no other harm. In some future birth, this curse shall end.'
Chaupai5 / 12
रघुपति पुरीं जन्म तब भयऊ। पुनि तैं मम सेवाँ मन दयऊ।। पुरी प्रभाव अनुग्रह मोरें। राम भगति उपजिहि उर तोरें।।
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(शिवजी ने कहा) श्रीरघुपति की नगरी में तेरा जन्म होगा। फिर तूने मेरी सेवा में मन लगाया। नगरी के प्रभाव और सेवा के अनुग्रह से।
रोमन लिप्यंतरण देखें
raghupati purīṃ janma taba bhayaū. puni taiṃ mama sevāṃ mana dayaū. purī prabhāva anugraha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'He shall take birth in the city of Raghupati, and then he shall devote his mind to My worship. By the glory of that city and the grace of service to Me.'
Chaupai6 / 12
सुनु मम बचन सत्य अब भाई। हरितोषन ब्रत द्विज सेवकाई।। अब जनि करहि बिप्र अपमाना। जानेहु संत अनंत समाना।।
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(शिवजी ने कहा) मेरे सत्य वचन सुनो, भाई! शिव को प्रसन्न करने का व्रत — ब्राह्मण-सेवा। अब ब्राह्मणों का अपमान कभी मत करना।
रोमन लिप्यंतरण देखें
sunu mama bacana satya aba bhāī. haritoṣana brata dvija sevakāī. aba jani karahi bipra
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Hear my true words now, O brother. The vow of pleasing Hara (Shiva) is to serve the Brahmins. Never again show disrespect to Brahmins.'
Chaupai7 / 12
इंद्र कुलिस मम सूल बिसाला। कालदंड हरि चक्र कराला।। जो इन्ह कर मारा नहिं मरई। बिप्रद्रोह पावक सो जरई।।
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(शिवजी ने कहा) इन्द्र का वज्र, मेरा विशाल त्रिशूल, काल का दण्ड, श्रीहरि का भयंकर चक्र — इनकी मार से मरा नहीं मरता। पर ब्राह्मण के शाप से (कोई नहीं बचता)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
iṃdra kulisa mama sūla bisālā. kāladaṇḍa hari cakra karālā. jo inha kara mārā nahi
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Indra's thunderbolt, My great trident, Yama's staff, Hari's fierce discus — even one struck by these does not perish utterly. But one cursed by a Brahmin finds no refuge.'
Chaupai8 / 12
अस बिबेक राखेहु मन माहीं। तुम्ह कहँ जग दुर्लभ कछु नाहीं।। औरउ एक आसिषा मोरी। अप्रतिहत गति होइहि तोरी।।
हिन्दी अर्थ देखें
(शिवजी ने कहा) ऐसा विवेक मन में रखो — तुम्हें जगत में कुछ दुर्लभ नहीं। और एक आशीर्वाद (देता हूँ)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
asa bibeka rākhehu mana māhīṃ. tumha kahaṃ jaga durlabha kachu nāhīṃ. aurau eka āsiṣā
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Keep this wisdom in your heart — nothing in the world shall be unattainable for you. And one more blessing I give you.'
Doha9 / 12
सुनि सिव बचन हरषि गुर एवमस्तु इति भाषि। मोहि प्रबोधि गयउ गृह संभु चरन उर राखि।।109(क)।।
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शिव के वचन सुनकर गुरु ने हर्षित होकर 'एवमस्तु' (ऐसा ही हो) कहा। मुझे प्रबोधित (समझाकर) घर गए — शम्भु-चरण (हृदय में)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
suni siva bacana haraṣi gura evamastu iti bhāṣi. mohi prabodhi gayau gṛha sambhu carana
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Hearing Shiva's words, the Guru joyfully said 'So be it!' He consoled me and went home, his heart fixed on Shambhu's feet.
Doha10 / 12
प्रेरित काल बिधि गिरि जाइ भयउँ मैं ब्याल। पुनि प्रयास बिनु सो तनु जजेउँ गएँ कछु काल।।109(ख)।।
Doha11 / 12
जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान। जिमि नूतन पट पहिरइ नर परिहरइ पुरान।।109(ग)।।
Doha12 / 12
सिवँ राखी श्रुति नीति अरु मैं नहिं पावा क्लेस। एहि बिधि धरेउँ बिबिध तनु ग्यान न गयउ खगेस।।109(घ)।।

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