उत्तरकाण्ड
दोहा 110
12 पद
Chaupai1 / 12
त्रिजग देव नर जोइ तनु धरउँ। तहँ तहँ राम भजन अनुसरऊँ।।
एक सूल मोहि बिसर न काऊ। गुर कर कोमल सील सुभाऊ।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) तीनों लोकों में जो भी शरीर धारण करूँ — वहाँ-वहाँ श्रीराम-भजन अनुसरण करूँ। एक शूल (कष्ट) — जब (प्रभु को) भूलूँ।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
trijaga deva nara joī tanu dharauṃ. tahaṃ tahaṃ rāma bhajana anusarauṃ.
eka sūla mohi bisara
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Whatever body I take across the three worlds — gods, men, or animals — there I follow the worship of Rama. One sorrow remains: when I forget Him.'
Chaupai2 / 12
चरम देह द्विज कै मैं पाई। सुर दुर्लभ पुरान श्रुति गाई।।
खेलउँ तहूँ बालकन्ह मीला। करउँ सकल रघुनायक लीला।।
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(काकभुशुण्डि ने कहा) अन्तिम देह — ब्राह्मण की पाई — देवताओं को भी दुर्लभ, पुराण-श्रुति गाते। तब भी बचपन में खेलता रहा।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
carama deha dvija kai maiṃ pāī. sura durlabha purāna śruti gāī.
khelauṃ tahūṃ bāla
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'In my final birth, I received a Brahmin's body — rare even for gods, as the Puranas and Vedas declare. Even then I played about in childhood.'
Chaupai3 / 12
प्रौढ़ भएँ मोहि पिता पढ़ावा। समझउँ सुनउँ गुनउँ नहिं भावा।।
मन ते सकल बासना भागी। केवल राम चरन लय लागी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) बड़ा होने पर पिता ने पढ़ाया। समझता, सुनता, गुनता — पर भाता नहीं। मन से सब विषय-वासना त्याग दी।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
prauḍha bhaeṃ mohi pitā paḍhāvā. samajhauṃ sunauṃ gunauṃ nahiṃ bhāvā.
mana te sakala ba
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'When I grew older, my father sent me to study. I would listen and understand but had no taste for learning. My mind had abandoned all worldly attachments.'
Chaupai4 / 12
कहु खगेस अस कवन अभागी। खरी सेव सुरधेनुहि त्यागी।।
प्रेम मगन मोहि कछु न सोहाई। हारेउ पिता पढ़ाइ पढ़ाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) कहो, हे खगेश! ऐसा अभागा कौन — गधी की सेवा करे, कामधेनु त्यागकर? प्रेम-मग्न — मुझे कुछ सूझता नहीं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kahu khagesa asa kavana abhāgī. kharī seva suradhenuhi tyāgī.
prema magana mohi kachu na
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Tell me, O king of birds, who is so unfortunate as to abandon the divine wish-fulfilling cow and serve a she-donkey instead? Immersed in love, I cared for nothing.'
Chaupai5 / 12
भए कालबस जब पितु माता। मैं बन गयउँ भजन जनत्राता।।
जहँ जहँ बिपिन मुनीस्वर पावउँ। आश्रम जाइ जाइ सिरु नावउँ।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) जब माता-पिता कालवश (मृत्यु को प्राप्त) हुए — मैं वन गया, जनत्राता (श्रीराम) का भजन करने। जहाँ-जहाँ वन में महामुनि (मिलते)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bhae kālabasa jaba pitu mātā. maiṃ bana gayauṃ bhajana janatrātā.
jahaṃ jahaṃ bipina munīsa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'When my parents died, I went to the forest to worship the Protector of beings. Wherever in the forest I found great sages.'
Chaupai6 / 12
बूझत तिन्हहि राम गुन गाहा। कहहिं सुनउँ हरषित खगनाहा।।
सुनत फिरउँ हरि गुन अनुबादा। अब्याहत गति संभु प्रसादा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) उनसे श्रीराम के गुण-गाथा पूछता — सुनता, हर्षित होकर, हे खगनाथ! श्रीहरि-गुण सुनते फिरता।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
būjhata tinhahi rāma guna gāhā. kahahiṃ sunauṃ haraṣita khaganāhā.
sunata phirauṃ hari ga
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'I would ask them about Rama's glorious deeds and listen with joy, O king of birds. I wandered, hearing Hari's virtues.'
Chaupai7 / 12
छूटी त्रिबिध ईषना गाढ़ी। एक लालसा उर अति बाढ़ी।।
राम चरन बारिज जब देखौं। तब निज जन्म सफल करि लेखौं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) तीन प्रकार की गाढ़ी ईषणा (तृष्णा) छूट गई — एक लालसा हृदय में अत्यन्त बढ़ी — श्रीराम के चरण-कमल कब देखूँ?
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
chūṭī tribidha īṣanā gāḍhī. eka lālasā ura ati bāḍhī.
rāma carana bārija jaba dekhau
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'The three strong desires — for sons, wealth, and fame — were all gone. One longing grew ever stronger in my heart: when shall I behold Rama's lotus feet?'
Chaupai8 / 12
जेहि पूँछउँ सोइ मुनि अस कहई। ईस्वर सर्ब भूतमय अहई।।
निर्गुन मत नहिं मोहि सोहाई। सगुन ब्रह्म रति उर अधिकाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) जिसे भी पूछता — वही मुनि कहता — ईश्वर सर्वभूतमय (सबमें व्याप्त) है। निर्गुण मत मेरे मन को (नहीं भाता)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
jehi pūṃchauṃ soī muni asa kaheī. īsvara sarba bhūtamaya aheī.
nirguṇa mata nahiṃ mo
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Whoever I asked would say: God pervades all beings. The impersonal doctrine did not appeal to my heart.'
Doha9 / 12
गुर के बचन सुरति करि राम चरन मनु लाग।
रघुपति जस गावत फिरउँ छन छन नव अनुराग।।110(क)।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) गुरु के वचन याद करके — श्रीराम-चरणों में मन लगा। श्रीरघुपति का यश गाता फिरता — क्षण-क्षण नया अनुराग।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
gura ke bacana surati kari rāma carana manu lāga.
raghupati jasa gāvata phirauṃ chana chana nava ana
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Remembering my Guru's words, my mind became fixed on Rama's feet. I wandered singing Raghupati's glory, with ever-new love at every moment.
Doha10 / 12
मेरु सिखर बट छायाँ मुनि लोमस आसीन।
देखि चरन सिरु नायउँ बचन कहेउँ अति दीन।।110(ख)।।
Doha11 / 12
सुनि मम बचन बिनीत मृदु मुनि कृपाल खगराज।
मोहि सादर पूँछत भए द्विज आयहु केहि काज।।110(ग)।।
Doha12 / 12
तब मैं कहा कृपानिधि तुम्ह सर्बग्य सुजान।
सगुन ब्रह्म अवराधन मोहि कहहु भगवान।।110(घ)।।